विधानसभा चुनाव परिणाम 2018: भाजपा की गिरती साख के पीछे कहीं ये 4 कारण तो नहीं
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देश के पांच राज्यों (मिजोरम, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़) के चुनावी रूझान आने शुरू हो गए हैं। इन चुनावी रूझानों से फिलहाल साफ लग रहा है कि छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी का पूरी तरह से सफाया हो गया है, वहीं राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।
हालांकि इन दोनों राज्यों में भी कांग्रेस फिलहाल बढ़त बनाए हुए है। ऐसा लगता है कि इन तीनों प्रमुख हिंदी प्रदेशों के नतीजों से लोग नोटबंदी और जीएसटी लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले से अभी भी नाराज चल रह हैं। वहीं किसानों को भी उनकी उपज का सही दाम न मिलना भी इस हार का बड़ा कारण हो सकता है।
छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों ने निकाला गुस्सा
गुजरात की तरह छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में छोटे से लेकर के बड़ा व्यापारी भी पहले केंद्र द्वारा लागू की गई नोटबंदी और उसके बाद जीएसटी से काफी परेशान चल रहे थे। वहीं देश के ज्यादातर राज्यों में किसानों की आर्थिक स्थिति में किसी तरह का कोई सुधार नहीं देखने को मिला है।
हाल ही देश भर के किसानों ने दिल्ली में उपज का सही दाम न मिलने को लेकर के विरोध प्रदर्शन भी किया था। इससे पहले 6 जून 2017 में मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों का एक बहुत बड़ा आंदोलन हुआ था, जिसमें गोलीबारी से 5 किसानों की मौत हो गई थी।
जीएसटी से व्यापारियों में गुस्सा
चाहे इंदौर हो या फिर भोपाल अथवा जयपुर, कोटा, जोधपुर व बीकानेर, हर जगह का व्यापारी जीएसटी से परेशान है। ऐसा इसलिए क्योंकि जीएसटी की वजह से इन व्यापारियों को एक रुपये का सामान बेचने का भी पूरा हिसाब-किताब रखना पड़ता है। हर महीने तीन रिटर्न फॉर्म दाखिल करने से उनका खर्चा काफी बढ़ गया है।
त्योहारी सीजन में नहीं हुई बिक्री
इन तीनों राज्यों में चुनाव की घोषणा होते वक्त त्योहारी सीजन भी शुरू हो गया है। उत्तर-मध्य भारत में त्योहारी सीजन सबसे मुफिद माना जाता है क्योंकि व्यापारियों को उम्मीद होती है कि इस समय जितनी बिक्री होगी वो पूरे साल के बराबर होगी। हालांकि इस बार व्यापारियों की बिक्री न के बराबर रही, इससे उनका खर्चा भी नहीं निकला। वहीं दूसरी तरफ ई-कॉमर्स कंपनियों ने बिक्री का नया रिकॉर्ड बनाया।
कम हुई किसानों की खेती से होने वाली आय
भाजपा की केंद्र में पिछले साढ़े चार सालों से सरकार है। इस दौरान किसानों की आय बढ़ने के बजाय घटती गई। वहीं खेती से होने वाली पैदावार भी सितंबर में खत्म हुई तिमाही में 5.3 फीसदी से घटकर केवल 3.8 फीसदी रह गई।
उपज कमजोर होने के साथ ही किसानों की आय पर भी प्रभाव पड़ा है। किसानों की आय में गिरावट होने से गांव-देहातों में उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री भी काफी कम हो गई है।
2019 के लोकसभा चुनावों में पड़ेगा असर
पांच राज्यों के चुनाव परिणामों का असर अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिलेगा। अगर केंद्र सरकार ने व्यापारियों व किसानों के हितों की अनदेखी की तो फिर यह परिणाम पूरे देश में देखने को मिल सकते हैं। इसलिए सरकार को किसानों व व्यापारियों के लिए कुछ ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे, जिससे उन्हें लगे कि वाकई में अच्छे दिन आ गए हैं।