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DY Chandrachud: 'वेदांता के खिलाफ वायसराय रिपोर्ट में विश्वसनीयता का अभाव', पूर्व चीफ जस्टिस ने की टिप्पणी
Sat, 19 Jul 2025 11:44 AM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Sat, 19 Jul 2025 11:44 AM IST
सार
वेदांता समूह ने शुक्रवार को नियामकीय फाइलिंग में कहा कि न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की यह टिप्पणी वेदांता द्वारा वायसराय रिसर्च रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों के संबंध में पूर्व मुख्य न्यायाधीश से स्वतंत्र कानूनी राय मांगने के बाद आई है। आइए इस बारे में और जानें।
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पूर्व CJI चंद्रचूड़
- फोटो : ANI
विस्तार
वेदांता समूह पर अमेरिका स्थित वायसराय रिसर्च की रिपोर्ट में गंभीर आरोप हैं, जिससे समूह के कारोबार और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इस रिपोर्ट में विश्वसनीयता का अभाव है। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने अपनी कानूनी राय में यह बात कही है।
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कंपनी ने शुक्रवार को नियामकीय फाइलिंग में कहा कि न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की यह टिप्पणी वेदांता द्वारा वायसराय रिसर्च रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों के संबंध में पूर्व मुख्य न्यायाधीश से स्वतंत्र कानूनी राय मांगने के बाद आई है।
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फाइलिंग के अनुसार, पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि "वायसराय का सूचीबद्ध कंपनियों में शॉर्ट पोजीशन लेने और फिर परिणामी बाजार प्रभाव से अवैध रूप से लाभ कमाने के लिए भ्रामक रिपोर्ट प्रकाशित करने का रिकॉर्ड रहा है।"
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पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "इस मामले में मानहानि साबित करने के लिए आवश्यक तत्व- सिविल और आपराधिक दोनों- पर्याप्त हैं। वायसराय ने सार्वजनिक रूप से, प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले बयान प्रकाशित किए हैं, जो सीधे तौर पर वेदांता को निशाना बनाते हैं।"
वायसराय ने 9 जुलाई की अपनी रिपोर्ट में वेदांता की लंदन स्थित मूल कंपनी वेदांता रिसोर्सेज पर भारत में सूचीबद्ध कंपनी को व्यवस्थित रूप से बर्बाद करने का आरोप लगाया।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि समूह का पूरा ढांचा "वित्तीय रूप से अस्थिर", परिचालन के मोर्चे कमजोर, लेनदारों के लिए गंभीर जोखिम पैदा करने वाला और "एक पोंजी योजना जैसा" है।
हालंकि, वेदांता ने रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। चंद्रचूड़ ने कहा, "रिपोर्ट में "पोंजी स्कीम" और "पैरासाइट" जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं, जिससे वेदांता के व्यवसाय और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
इन परिस्थितियों में, वेदांता के लिए कानूनी उपाय अपनाना उचित होगा।"
अदाणी-हिंडनबर्ग मामले पर अंतिम आदेश पारित करने वाले पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि वायसराय की रिपोर्ट में विश्वसनीयता का अभाव है, क्योंकि इसमें सूचीबद्ध कंपनियों में शॉर्ट पोजीशन लेने और फिर शेयरों की कीमत घटने पर अवैध रूप से लाभ कमाने के लिए भ्रामक रिपोर्ट प्रकाशित करने का ट्रैक रिकॉर्ड है।