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आलू,चीनी में तेज के चलते थोक महंगाई दर दो साल के उच्चतम स्तर पर

Wed, 14 Sep 2016 09:03 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 14 Sep 2016 09:03 PM IST
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Vegetables soar inflation by 3.74 percent
सब्‍ज‌ियां - फोटो : getty images

थोक महंगाई दर 3.74 फीसदी के साथ दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। आलू, चीनी व दालों की थोक कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से थोक महंगाई दर में यह इजाफा हुआ है। अगस्त माह में खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर 8.23 फीसदी रही।

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जुलाई में थोक महंगाई दर 3.55 फीसदी तो खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर 11.82 फीसदी के स्तर पर थी। यानी कि जुलाई के मुकाबले अगस्त में खाद्य व पेय उत्पादों के थोक दाम में कमी आई है।
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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त माह में खाने-पीने की वस्तुओं में सबसे अधिक आलू के थोक दाम में पिछले साल अगस्त के मुकाबले 66.72 फीसदी की बढ़ोतरी रही।दाल के भाव में 34.55 फीसदी का इजाफा रहा। वहीं गेहूं के दाम में 7.27 फीसदी, फल में 13.91 फीसदी, दूध में 3.40 फीसदी, अंडा, मांस व मछली में 8.75 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। लेकिन अगस्त महीने में प्याज के थोक भाव में पिछले साल अगस्त के मुकाबले 64.19 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। 
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आंकड़ों के मुताबिक गैर खाद्य पदार्थों की थोक कीमतों में अगस्त माह में 8.44 फीसदी का इजाफा रहा। फ्यूल व पावर के थोक दाम में 1.62 फीसदी तो मैन्यूफैक्चरिंग उत्पादों की थोक महंगाई दर 2.42 फीसदी रही।

आंकड़ों के मुताबिक अगस्त माह में एलपीजी के थोक दाम में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1.85 फीसदी तो पेट्रोल में 8.65 फीसदी की गिरावट रही। मैन्यूफैक्चरिंग उत्पादों में सबसे अधिक चीनी के थोक दाम में 35.36 फीसदी का इजाफा रहा। खाद्य तेल के थोक दाम में 5.56 फीसदी की बढ़ोतरी रही।

महंगाई में और हो सकता है इजाफा: उद्योग

Vegetables soar inflation by 3.74 percent
महंगाई ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
उद्योग जगत ने आगामी महीनों में महंगाई के और बढ़ने के आसार जताए हैं, जिससे रिजर्व बैंक की ब्याज दर घटने की संभावना कम हो गई है। इक्रा की वरिष्ठ अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि इस साल के शेष महीनों में थोक महंगाई दर चार से 4.5 फीसदी के बीच और उपभोक्ता महंगाई दर चार से पांच फीसदी के बीच रह सकती है।

एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा कि आरबीआई उपभोक्ता महंगाई दर के आधार पर नीति निर्धारित करता है, जो अगस्त में घटकर 5.05 फीसदी दर्ज किया गया है, लेकिन यह दर ब्याज दर घटाने के लिए काफी नहीं हो सकती है, क्योंकि इसमें स्थिरता नहीं आई है और आने वाले महीनों में यह बढ़कर छह फीसदी से ऊपर पहुंच सकती है।

रावत ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के कारण बाजार की तरलता बढ़ने और अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ तथा चीन के केंद्रीय बैंकों की नीतिगत घोषणाओं के कारण उपभोक्ता महंगाई दर बढ़ सकती है। उद्योग संघ ने महंगाई को लक्ष्य के आसपास रखने के लिए सरकार को मांग और पूर्ति संबंधी संरचनागत मुद्दों को सुलझाने का सुझाव दिया है।
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