US tariffs: झींगा,मेडिकल उपकरण और सोने के आभूषणों पर होगा ज्यादा असर; इलेक्ट्रॉनिक्स में भारत के लिए बड़ा अवसर
अमेरिका घरेलू झींगा उद्योग का सबसे बड़ा बाजार है। उच्च टैरिफ के कारण झींगा अब अमेरिकी बाजार में काफी कम प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। अमेरिका ने पहले ही भारतीय झींगा पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगा रखी है। भारत के कुल झींगा निर्यात में से 40 प्रतिशत अमेरिका को निर्यात किया जाता है।
विस्तार
भारत के निर्यात क्षेत्र जैसे झींगा, कालीन, चिकित्सा उपकरण और सोने के आभूषणों पर अमेरिका द्वारा घोषित 27% अतिरिक्त आयात शुल्क का असर पड़ेगा। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और फार्मा जैसे निर्यात क्षेत्रों को अमेरिका में अपने प्रतिस्पर्धी देशों पर बढ़त मिलेगी। इस घोषणा में सभी आयातित वस्तुओं पर सार्वभौमिक 10 प्रतिशत टैरिफ शामिल है, जो 5 अप्रैल से प्रभावी होगा। 9 अप्रैल को इसे 27 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
अमेरिका घरेलू झींगा उद्योग का सबसे बड़ा बाजार है। उच्च टैरिफ के कारण झींगा अब अमेरिकी बाजार में काफी कम प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। अमेरिका ने पहले ही भारतीय झींगा पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगा रखी है। भारत के कुल झींगा निर्यात में से 40 प्रतिशत अमेरिका को निर्यात किया जाता है। इक्वाडोर और इंडोनेशिया अमेरिकी बाजार में घरेलू निर्यातकों के प्रमुख प्रतिस्पर्धी हैं।
2023-24 के दौरान फ्रोजन झींगा का निर्यात 7,16,004 टन था। पिछले वित्त वर्ष में अमेरिका ने 2,97,571 टन आयात किया। फ्रोजन झींगा अमेरिका को निर्यात होने वाली प्रमुख वस्तु बनी रही। अमेरिका भारतीय कालीन का सबसे बड़ा आयातक है और 2023-24 में 17,000 करोड़ का आयात किया था।
इलेक्ट्रॉनिक्स में भारत के लिए बड़ा अवसर
इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और स्मार्टफोन क्षेत्रों में वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों को अमेरिका के ऊंचे टैरिफ के कारण लागत प्रतिस्पर्धात्मकता खोने की संभावना है। यह भारत के लिए एक अवसर खोलता है, जिसने पहले से ही उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना जैसे सरकारी प्रोत्साहनों के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में निवेश करना शुरू कर दिया है। टैरिफ के कारण ताइवान से आपूर्ति श्रृंखलाओं का आंशिक स्थानांतरण (32 प्रतिशत) भी भारत को लाभ पहुंचा सकता है, बशर्ते इसे पर्याप्त बुनियादी ढांचे और नीतिगत समर्थन मिले।
इन क्षेत्रों को टैरिफ से होगा फायदा
कृषि, फार्मा, सेमीकंडक्टर, कॉपर, तेल, गैस और एलएनजी
इन सेक्टर पर पड़ सकता है असर
ऑटोमोबाइल एवं इसके कलपुर्जे
इन पर टैरिफ नहीं
फार्मा, सेमीकंडक्टर, तांबा और ऊर्जा उत्पाद जैसे तेल, गैस, कोयला और एलएनजी।
आईटी : इंतजार करो की रणनीति
आईटी क्षेत्र अभी टैरिफ पर कोई जल्दबाजी में नहीं है। क्षेत्र का मानना है कि इस प्रभाव को जानने के लिए अगली एक तिमाही तक देखो और इंतजार करो की रणनीति अपनानी होगी। निर्यात आधारित भारतीय आईटी क्षेत्र पर टैरिफ आदेश का सीधा असर नहीं पड़ेगा। 250 अरब डॉलर का भारतीय आईटी समूह अपने राजस्व का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी ग्राहकों को सेवा प्रदान करने से प्राप्त करता है।
टेक्सटाइल्स: नए निवेश को बढ़ावा
चीनी और बांग्लादेशी निर्यात पर उच्च टैरिफ भारतीय वस्त्र निर्माताओं के लिए बाजार हिस्सेदारी हासिल करने, उत्पादन को आकर्षित करने और अमेरिका को निर्यात बढ़ाने के लिए प्रमुख क्षेत्रों में से एक है। वस्त्र उत्पादन में भारत का मजबूत आधार और कम टैरिफ वैश्विक मांग और नए निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं।
फार्मा को छूट, लेकिन भविष्य में दवा निर्यात को लेकर चिंता
टैरिफ से फार्मास्यूटिकल क्षेत्र को छूट दी गई। इससे दवा निर्यात पर भविष्य में संभावित प्रतिबंधों को लेकर चिंता उत्पन्न हो गई हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने कहा, भविष्य में कार्रवाइयों में फार्मा उत्पाद, व्यापार विस्तार अधिनियम, 1962 के अंतर्गत शुल्क के अधीन हो सकते हैं। यह अधिनियम अमेरिका को आयात पर नए शुल्क लगाने का अधिकार देता है।
कृषि निर्यात को बनाए रख सकता है भारत
प्रमुख कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी ने कहा कि भारत अमेरिका को अपने कृषि निर्यात को बनाए रख सकता है या विस्तार भी कर सकता है, क्योंकि प्रतिस्पर्धी देशों को और भी अधिक कठोर शुल्कों का सामना करना पड़ रहा है।
चावल में बेहतर स्थिति
इस पर अमेरिकी टैरिफ अभी 9 प्रतिशत है। भारत 26 प्रतिशत तक की वृद्धि के बावजूद वियतनाम और थाईलैंड के मुकाबले प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखता है। भारत अमेरिका को सालाना 250,000 से 300,000 टन चावल निर्यात करता है।
रत्न-आभूषण क्षेत्र को बड़ा झटका
जवाबी शुल्क भारतीय रत्न एवं आभूषण निर्यात के लिए एक बड़ा झटका है। जीजेईपीसी ने कहा, लंबे समय में हम वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव देखते हैं। अल्पावधि में हम अमेरिकी बाजार में भारत के मौजूदा 10 अरब डॉलर के निर्यात को बनाए रखने में चुनौतियों का अनुमान लगाते हैं। खुले हीरों पर आयात शुल्क मौजूदा ‘0’ प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक हो सकता है और सोने के आभूषणों पर 5.5-7 प्रतिशत हो सकता है। अमेरिका भारत से 11.58 अरब डॉलर के रत्न और आभूषण आयात करता है और भारत को 5.31 अरब डॉलर का निर्यात करता है।
मशीनरी और ऑटो क्षेत्र पर होगा ज्यादा असर
मशीनरी, ऑटोमोबाइल और खिलौने जैसे क्षेत्र, जिनमें चीन और थाईलैंड वर्तमान में अग्रणी हैं, भी टैरिफ संबंधी स्थानांतरण के प्रति संवेदनशील हैं। भारत से आने वाले सामान पर पहले से ही स्टील, एल्यूमीनियम और ऑटो सेक्टर पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा रहा है। भारत कम लागत वाले स्टील आयात के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाएगा, क्योंकि अमेरिका के कदम से प्रभावित देश अपने शिपमेंट को घरेलू बाजार की ओर मोड़ सकते हैं। अमेरिकी टैरिफ का सामना करने वाले देश भारत में विनिर्माण शुरू कर सकते हैं।
| निर्यात (2024 में) | मूल्य (निर्यात मूल्य अरब डॉलर में) |
| दवा निर्माण तथा जैविक | 8.1 |
| दूरसंचार उपकरण | 6.5 |
| कीमती, अर्ध-कीमती पत्थर | 5.3 |
| पेट्रोलियम उत्पाद | 4.1 |
| सोना व अन्य आभूषण | 3.2 |
| सहायक उपकरण सहित सूती वस्त्र | 2.8 |
| सोना व अन्य आभूषण | 3.2 |
| लोहा-इस्पात के उत्पाद | 2.7 |
आयात की स्थिति
भारत ने 2024 में कच्चा तेल (4.5 अरब डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (3.6 अरब), कोयला, कोक (3.4 अरब), तराशे व पॉलिश किए गए हीरे (2.6 अरब), इलेक्ट्रिक मशीनरी (1.4 अरब), विमान, अंतरिक्ष यान तथा कलपुर्जे (1.3 अरब) और सोना (1.3 अरब डॉलर) का आयात किया।