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US Tariffs: भारत सरकार निर्यातकों के साथ... वित्त मंत्री बोलीं- मदद के लिए मिशन पर काम जारी, हितों की रक्षा...

Fri, 29 Aug 2025 04:46 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 29 Aug 2025 04:46 AM IST
सार

अमेरिकी टैरिफ के कारण उपजी चिंताओं के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि निर्यात संवर्धन मिशन शुरू करने पर तेजी से काम हो रहा है। सरकार ने कहा है कि निर्यातकों के साथ वे मजबूती से खड़ी हैं। हितों की हिफाजत होगी।

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US Tariff Indian govt with exporters Fin Min Sitharaman assurance working on mission to help interest priority
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल) - फोटो : X / @nsitharaman

विस्तार

अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ के असर को कम करने के लिए केंद्र सरकार हरसंभव कदम उठा रही है। सरकार ने निर्यातकों को भरोसा दिया कि वह उनके साथ मजबूती से खड़ी है, उनके हितों की रक्षा की जाएगी। वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ का असर अल्पकालिक होगा। समग्र व्यापार और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रहेगा।

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अमेरिकी टैरिफ से उत्पन्न चुनौतियों और चिंताओं को लेकर भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन के नेतृत्व में बृहस्पतिवार को मिले प्रतिनिधिमंडल को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आश्वस्त किया कि सरकार इस चुनौतीपूर्ण समय में उनकी चिंताएं दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। कहा, निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव उपाय तलाशे जा रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा, सरकार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिये निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी काम कर रही है। इससे निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक तेजी से पहुंचने में मदद मिल सकती है।  
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एमएसएमई के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी
सरकार टैरिफ प्रभावित क्षेत्रों में एमएसएमई निर्यातकों के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना, निर्यात ऋणों पर स्थगन ताकि परिसंपत्ति डाउनग्रेड किए बिना परिचालन की सहूलियत मिल सके और लंबे भुगतान चक्रों के कारण नकदी प्रवाह की चुनौतियां कम करने के लिए निर्यात प्राप्ति अवधि के विस्तार पर भी विचार कर रही है।
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सरकार बजट में घोषित निर्यात संवर्धन मिशन के तहत छह वित्त वर्षों (2025 से 2031) के लिए करीब 25,000 करोड़ रुपये के सहायता उपायों पर गौर कर रही है।  दो उपयोजनाओं निर्यात प्रोत्साहन (10,000 करोड़ से अधिक) और निर्यात दिशा (14,500 करोड़ से अधिक) के माध्यम से इसके क्रियान्वयन का प्रस्ताव है।

नहीं झुकेंगे : रूस से तेल आयात 20 फीसदी तक बढ़ेगा
अमेरिकी दबाव दरकिनार कर भारत ने सितंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात 10-20 फीसदी तक बढ़ाने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार, यह बढ़ोतरी प्रतिदिन 1,50,000 से 3,00,000 बैरल तक हो सकती है। सरकार का कहना है, यह निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा व आर्थिक हितों के मद्देनजर है। 

भारत सरकार का कहना है...
पश्चिमी देशों के रूस से अरबों डॉलर का सामान खरीदने के बावजूद, भारत पर मुनाफाखोरी के आरोप लगाना दोहरा मापदंड है।

व्यापार समझौते पर अभी वार्ता जारी नहीं
वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर फिलहाल औपचारिक बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने कहा, बातचीत और जवाबी कार्रवाई साथ-साथ नहीं चल सकती। बातचीत अभी स्थगित नहीं हुई है, लेकिन अभी हम अगले औपचारिक दौर पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। साथ ही कहा कि किसी भी व्यापार समझौते में पहले अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ पर विचार करना होगा।

घरेलू अर्थव्यवस्था में मांग के लिए बढ़ा जोखिम: आरबीआई
भारतीय उत्पादों पर बढ़ा टैरिफ लागू होने के एक दिन बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा कि अमेरिकी व्यापार नीतियों से जुड़ीं अनिश्चितताएं भारतीय अर्थव्यवस्था में समग्र मांग के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा कर रही हैं। हालांकि, निकट भविष्य में महंगाई अनुमान से नीचे रहेगी। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में इसके चार फीसदी के लक्ष्य से नीचे आने की उम्मीद है।  


आरबीआई ने कहा, मौजूदा चुनौतियों के बीच एसएंडपी की ओर से भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार भविष्य में पूंजी प्रवाह और साख के लिए शुभ संकेत है। मानसून खरीफ फसलों के अनुकूल है। वास्तविक ग्रामीण मजदूरी में वृद्धि से वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में गांवों में मांग बढ़ सकती है। बेहतर वित्तीय स्थितियों, ब्याज दरों में कटौती व सहायक राजकोषीय उपायों बढ़ते घरेलू आशावाद के साथ समग्र मांग को बनाए रखने के लिए माहौल अनुकूल है। बुलेटिन में कहा गया है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति आगे आने वाले आंकड़ों व विकसित हो रहे घरेलू विकास-महंगाई गतिशीलता पर कड़ी नजर रखेगी, ताकि बेहतर रणनीति बनाई जा सके।

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