वैश्विक व्यापार: रूस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट से भारत को कैसे मिलेगा फायदा? जानिए विशेषज्ञों की राय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों में छूट से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। विशेषज्ञ इसे भारतीय उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़ावा मान रहे हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस और ईरान अधिनियम (एसआरआईए) के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों में छूट भारत की ऊर्जा सुरक्षा और निर्यातकों के लिए राहत लेकर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी कीमत पर रूसी कच्चे तेल तक लगातार पहुंच से लागत नियंत्रित होगी। इससे महंगाई का दबाव कम होगा और आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिलेगा। इस निर्णय को भारतीय उद्योग के लिए एक आवश्यक बढ़ावा बताया गया है, जो द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और मजबूत करेगा।
भारत को इस छूट से क्या लाभ होगा?
उद्योग मंडल के महासचिव अनंत स्वरूप ने कहा कि अमेरिका के रूस से संबंधित प्रतिबंध कानून के तहत अतिरिक्त शुल्कों में छूट अस्थायी राहत देती है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने बताया कि रूस से प्रतिस्पर्धी कीमत पर कच्चे तेल तक लगातार पहुंच से लागत नियंत्रित होगी। इससे महंगाई का दबाव कम होगा और भारत की वृद्धि की गति को समर्थन मिलेगा।
भारतीय उद्योग और व्यापार पर क्या असर पड़ेगा?
अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ और हाईटेक गियर्स के अध्यक्ष दीप कपूरिया ने इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह कदम द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने में शेष मतभेदों को दूर करने में मदद करेगा। कपूरिया ने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लिंडसे ग्राहम अधिनियम की धारा 15 के तहत छूट प्रदान करना एक स्वागत योग्य कदम है। भारतीय उद्योग के लिए यह द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक आवश्यक बढ़ावा है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (एफआईईओ) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि इस व्यावहारिक कदम से भारत के निर्यात पर एक बड़ा जोखिम टल गया है। इससे खरीदार का विश्वास और ऑर्डर प्रवाह मजबूत होगा, खासकर कपड़ा, चमड़ा, रत्न और आभूषण, तथा इंजीनियरिंग सामान जैसे रोजगार-गहन क्षेत्रों में।
क्या यह छूट स्थायी है और आगे क्या चुनौतियां हैं?
अनंत स्वरूप ने यह भी कहा कि ऐसी छूट जिसे कम समय में संशोधित या वापस लिया जा सकता है, कारोबार के लिए दीर्घकालिक योजना हेतु स्थायी निश्चितता प्रदान नहीं करती है। फिक्की को उम्मीद है कि भारत और अमेरिका दोनों यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसे उपाय चल रही व्यापार वार्ताओं को जटिल न बनाएं। अजय सहाय ने भी कहा कि यह छूट समीक्षा योग्य बनी हुई है, जिससे भविष्य के अनुबंधों और निवेशों पर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने बताया कि निर्यातकों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसए) को दीर्घकालिक शुल्क निश्चितता की आवश्यकता है। ट्रंप ने 16 अक्तूबर को राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए एसआरआईए के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों में छूट दी थी। शुक्रवार रात एक कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि कुछ प्रतिबंधों को रोकना अमेरिका के "राष्ट्रीय हितों" में है। इस कानून ने राष्ट्रपति को भारत और चीन जैसे रूसी कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाने का अधिकार दिया था।