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Deal: श्रमिकों को राहत देने के मसले पर दक्षिण कोरिया और जापान के बीच समझौता, जानें क्या है पूरा मामला
Mon, 06 Mar 2023 05:37 PM IST
विवेक दास
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विवेक दास
Updated Mon, 06 Mar 2023 05:37 PM IST
सार
Deal: 2018 में दक्षिण कोरिया के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जापान के निप्पॉन स्टील और मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्री को 100 मिलियन कोरियन वोन (77 हजार डॉलर) मुआवजे के तौर पर साउथ कोरिया के 15 पीड़ितों में प्रत्येक को दिया जाना चाहिए। यह मामला 1910 से 1940 के बीच कोरियाई लोगों को जापान की ओर से प्रताड़ित करने का है।
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दक्षिण कोरिया और जापान में समझौता
- फोटो : Social Media
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विस्तार
दक्षिण कोरिया और जापान ने सोमवार को कोरिया पर कब्जे के दौरान जापान की ओर से जबरन श्रम लिए जाने के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक समझौते की घोषणा की है। दोनों संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोगी देश भारत-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर बढ़ रही अशांति के मद्देनजर संबंधों को सुचारू बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे ''अमेरिका के दो करीबी सहयोगियों के बीच सहयोग और साझेदारी का एक नया अध्याय बताया।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री पार्क जिन ने सोमवार को कहा कि इंपीरियल जापान की ओर से 15 पीड़ितों या उनके परिवार के सदस्यों को मुआवजा देगा।
2018 में दक्षिण कोरिया के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जापान के निप्पॉन स्टील और मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्री को 100 मिलियन कोरियन वोन (77 हजार डॉलर) मुआवजे के तौर पर साउथ कोरिया के 15 पीड़ितों में प्रत्येक को दिया जाना चाहिए। यह मामला 1910 से 1940 के बीच कोरियाई लोगों जापान की ओर से प्रताड़ित करने का है।
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बता दें कि मुकदमे में जिन 15 पीड़ितों के पक्ष में फैसला सुनाया गया उनमें में से वर्तमान में केवल तीन लोग जीवित हैं। वे सभी 90 वर्ष से अधिक के हैं।
जापान के विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी ने संवाददाताओं से कहा, 'हम जापान और दक्षिण कोरिया के बीच स्वस्थ संबंध बहाल करने के लिए दक्षिण कोरिया सरकार की ओर से आज घोषित उपायों का स्वागत करते हैं। यह संबंध 2018 में दक्षिण कोरिया के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से बहुत मुश्किल स्थिति में रहा है।'
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उन्होंने कहा, 'दक्षिण कोरिया सरकार की ओर से घोषित उपाय इस आधार पर नहीं हैं कि जापानी कंपनियां फाउंडेशन (दक्षिण कोरिया में) में योगदान देंगी। जापान और विदेशों में व्यक्तियों या निजी कंपनियों की ओर से स्वैच्छिक दान पर जापानी सरकार का कोई विशेष नियंत्रण नहीं है।
जापान दक्षिण कोरियाई अदालत के 2018 के फैसले से सहमत नहीं था और टोक्यो की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया था।
इससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया, जापान ने मेमोरी चिप्स में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया था। दक्षिण कोरिया ने वर्तमान दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति यून सुक योल के पूर्ववर्ती मून जे-इन के कार्यकाल के दौरान टोक्यो के साथ अपने सैन्य खुफिया-साझाकरण समझौते को रद्द कर दिया गया था।