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SBI: बजट राजकोषीय समझदारी, कर पुनर्गठन और कृषि सुधारों पर केंद्रित हो, एसबीआई रिसर्च ने सरकार को दिए ये सुझाव

Mon, 08 Jul 2024 06:35 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 08 Jul 2024 06:35 PM IST
सार

SBI: भारतीय स्टेट बैंक ने बजट से संबंधित एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। एसबीआई की शोध रिपोर्ट में उन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर प्रकाश डाला गया है, जिन पर देश में सतत आर्थिक वृद्धि और विकास के लिए ध्यान देने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में राजकोषीय समेकन के मार्ग पर चलते हुए राजकोषीय विवेक का पालन करने पर जोर दिया गया है।

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Union Budget should focus on fiscal prudence, tax restructuring, agriculture reforms: SBI Research
भारतीय स्टेट बैंक - फोटो : amarujala.com

विस्तार

देश का केंद्रीय बजट 23 जुलाई को आना है। भारतीय स्टेट बैंक ने बजट से संबंधित एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। एसबीआई की शोध रिपोर्ट में उन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर प्रकाश डाला गया है, जिन पर देश में सतत आर्थिक वृद्धि और विकास के लिए ध्यान देने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में राजकोषीय समेकन के मार्ग पर चलते हुए राजकोषीय विवेक का पालन करने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य लगभग 4.9 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया गया है। आइए जानते हैं एसबीआई की रिपोर्ट में बजट से जुड़े और क्या-क्या सुझाव दिए गए हैं?

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एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है, 'सरकार को राजकोषीय सूझबूझ के पालन पर ध्यान देना चाहिए और राजकोषीय मजबूती के रास्ते पर चलना जारी रखना चाहिए। हालांकि, राजकोषीय रुख पर बहुत अधिक ध्यान देने से केंद्र को बचना चाहिए।' एसबीआई रिसर्च की यह रिपोर्ट कर संरचनाओं में राहत प्रदान करने के लिए कॉर्पोरेट करों के साथ व्यक्तिगत आयकर दरों को संरेखित करने और धीरे-धीरे सभी भुगतानकर्ताओं को नई कर व्यवस्था में लाने की वकालत करती  है। 
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इसके अलावा एसबीआई की रिपोर्ट ने बैंक जमा पर कर समानता लाने पर विचार करने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट के अनुसार ऐसा करने से अधिक बचत आकर्षित की जा सकेगी और घरेलू वित्तीय बचत को भी इससे बढ़ावा मिलेगा।  कृषि क्षेत्र के लिए, बजट में वित्तपोषण, आजीविका समर्थन और कृषि ऋण गारंटी ट्रस्ट फंड जैसे मुद्दों को हल करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। रिपोर्ट में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के राजनीतिकरण का उल्लेख करते हुए इसकेक विकल्प तलाशने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान एमएसपी नीतियां व्यापार और निर्यात प्रतिस्पर्धा को कम करती हैं।
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रिपोर्ट में कहा गया है, "एमएसपी तंत्र के लिए अनावश्यक राजनीति, निजी निवेश को हतोत्साहित करना, गैर-एमएसपी फसलों की उपेक्षा, निर्यात प्रतिस्पर्धा में कमी और व्यापार विवादों का बोझ एक जन्मजात समस्या की तरह है। इस लिए इसके वैकल्पिक तंत्र की तलाश तत्परता से जरूरी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए निजी क्षेत्र का भी दायित्व तय किया जाना चाहिए।"

एसबीआई की रिपोर्ट में विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक व्यापक रणनीति विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सुनिश्चित किया जा सके और आपूर्ति शृंखला को अन्वेषण से रीसाइक्लिंग तक सुरक्षित किया जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 10 वर्षों के दौरान हुए सुधारों ने भारत में बैंकिंग क्षेत्र को फिर से मजबूत किया है। रिपोर्अ में इस क्षेत्र में सुधारों को आगे भी जारी रखे जाने का आह्वान किया गया है। रिपोर्ट में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) का विनिवेश और आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री का भी सुझाव दिया गया है।


रिपोर्ट के अनुसार, "एक दशक के परिवर्तनकारी बदलावों के बाद, भारतीय बैंकिंग प्रणाली उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।' रिपोर्ट में कहा गया है कि देश विकसित बनने की यात्रा शुरू कर रहा है। इसके अलावे रिपोर्ट में आयात निर्भरता को कम करने के लिए एमएसएमई के लिए दिवाला और दिवालियापन संहिता में बदलाव और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आगामी बजट में इन सुझावों को शामिल करके, सरकार सतत विकास के लिए एक मजबूत नींव रख सकती है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे सकती है और महामारी के बाद के युग में आर्थिक लचीलापन ला सकती है।

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