नई हकीकतों का बहीखाता: दो लाख करोड़ रुपये से बनेंगे 4.1 करोड़ नए अवसर, हर वर्ग को साधने की कोशिश
लोकसभा चुनाव में उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन न कर पाने का असर मोदी 3.0 के पहले बजट पर साफ दिखा। सरकार ने आर्थिकी के साथ राजनीति की जमीनी हकीकत का संतुलन साधा। किसानों, युवाओं व महिलाओं को खुशी की फुहार दी, तो सात साल बाद मध्य वर्ग को राहत देते हुए आयकर में छूट की घोषणा भी की। युवाओं के असंतोष को थामने के लिए पांच वर्षों में रोजगार सृजन के लिए दो लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया तो सरकार को स्थायित्व देने वाले राजग के सहयोगी दलों के राज्यों बिहार और आंध्र प्रदेश के लिए खजाना खोल दिया।
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मोदी 3.0 के पहले बजट में हाल में हुए आम चुनावों में भाजपा की चुनावी संभावनाओं को झटका देने वाले ग्रामीण भारत के दबाव और बेरोजगारी के मुद्दे का असर साफ नजर आया। यह भी नजर आया कि गठबंधन सरकार में सहयोगी दलों को खुश रखने के लिए क्या कुछ करना पड़ता है।
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 48.21 लाख करोड़ का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनाव पूर्व घोषित चार वर्ग युवा, महिला, गरीब व किसान पर फोकस बनाए रखा है। सीतारमण ने मंगलवार को अपना लगातार सातवां बजट पेश किया तो हर वर्ग को साधने की कोशिश की। बेरोजगारी, कौशल विकास, एमएसएमई और मध्यवर्ग पर ध्यान केंद्रित किया गया। ग्रामीण विकास के लिए 2.66 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया, तो कृषि क्षेत्र के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए।
स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए हर श्रेणी में एंजल निवेशक कर खत्म कर दिया है। मोबाइल फोन और सोने पर उत्पाद शुल्क में कटौती की गई है। कैपिटल गेन टैक्स को सरल बनाया गया है। हालांकि वित्त मंत्री ने सिक्यूरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) को बढ़ा दिया, जिसके कारण शेयर बाजार गोता लगा गए। सीतारमण ने कहा, एक ऐसी दुनिया में जो नीतिगत अनिश्चितता में फंसी है, भारत की अर्थव्यवस्था अपवाद की तरह आने वाले वर्षों में भी चमकती रहेगी। करीब 4.1 करोड़ युवाओं के लिए रोजगार सृजन, कौशल विकास और अवसरों के निर्माण के लिए पांच वर्षों में दो लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था करने के अलावा मैं युवाओं की शिक्षा, रोजगार और कौशल के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये की अलग से प्रावधान कर रही हूं। उन्होंने अंतरिम बजट में बुनियादी ढांचे के लिए पूंजीगत व्यय को 11.11 लाख करोड़ रुपये बनाए भी रखा है।
सात साल बाद बदलाव : नई कर व्यवस्था में स्टैंडर्ड डिडक्शन 75 हजार...17,500 रुपये तक बचत
वित्त मंत्री ने सात साल के लंबे अंतराल के बाद मध्य वर्ग को आयकर में कुछ राहत दी है। नई कर व्यवस्था में करदाताओं के लिए कुल आय पर स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार कर दिया है। अब 7.75 लाख तक आय पर कर नहीं लगेगा। इससे एक रुपये भी अधिक होने पर कर देय होगा। पुरानी व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया।
यह 3 लाख रुपये आय तक शून्य, 3 से 7 लाख तक 5%, 7 से 10 लाख रुपये तक 10%, 10 से 12 लाख तक 15%, 12 से 15 लाख तक 20% और 15 लाख से अधिक की कमाई पर 30% की दर से कर लगेगा।
- इस तरह बचेंगे 17500 रुपये : 20 लाख रुपये की सालाना कमाई पर पहले 2,85,000 रुपये टैक्स लगता था, जो अब 2,67,500 रुपये लगेगा।
- देश के दो तिहाई करदाता नई कर व्यवस्था में शिफ्ट हो चुके हैं।
...लेकिन, शेयर में निवेश पर अधिक टैक्स
शेयर बाजार व म्यूचुअल फंड के निवेशकों को अब अधिक टैक्स भरना पड़ेगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स की दर 10% से बढ़ाकर 12.5% कर दी है। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स भी 20% कर दिया गया है, जो 15% था।
विकसित भारत के लिए नौ प्राथमिकताएं
सरकार ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए नौ प्राथमिकताएं तय की हैं। ये हैं- कृषि में उत्पादकता और अनुकूलता, रोजगार और कौशल प्रशिक्षण, समावेशी मानव संसाधन विकास व सामाजिक न्याय, विनिर्माण व सेवाएं, शहरी विकास, ऊर्जा सुरक्षा, अवसंरचना, नवाचार, अनुसंधान व विकास और अगली पीढ़ी के सुधार।