बजट 2020: कई सेक्टर्स को मिल सकता है बेलआउट पैकेज, फिनटेक को मिले बढ़ावा
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आर्थिक सुस्ती और विकास दर के सबसे कम होने के बीच पेश हो रहे इस बार के बजट में कई सेक्टर्स को उम्मीद है कि उनके लिए वित्त मंत्री बेल आउट पैकेज की घोषणा कर सकती हैं। सुस्ती की वजह से फिलहाल ऑटो, बैंकिंग, रियल एस्टेट और विमानन सेक्टर मुश्किल के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में इन सेक्टर्स के लिए बेलआउट पैकेज की उम्मीद की जा सकती है। वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण फिनटेक सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई बड़ी घोषणाएं कर सकती हैं।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में ज्यादा दबाव
फिनटेक कंपनी मनीटैप के सीईओ व सह-संस्थापक बाला पार्थसरथी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मौजूदा मंदी के कारण खपत फिर से बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे में आयकर में कटौती या मध्य-आय वर्ग के लिए टैक्स स्लैब में बदलाव से लाभ हो सकता है।
ऑटोमोबाइल, बैंकिंग, रियल एस्टेट, दूरसंचार और विमानन क्षेत्र में बेलआउट पैकेज की उम्मीद है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में दबाव बहुत ज्यादा है; इसलिए, सरकार वाहन के मालिकाना हक से जुड़ी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए टारगेटेड योजनाएं शुरू कर सकती है।
ई-कॉमर्स सेग्मेंट को देशी दुकानों के लिए ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कड़े एफडीआई नियमों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, हम रियल एस्टेट उद्योग के लिए नियमों में नरमी और सब्सिडी की उम्मीद कर सकते हैं। इसके अलावा सरकार विशेष राहत घोषणाओं से ग्रामीण खर्चों को प्रोत्साहित करने की कोशिश करेगी। हम निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में आक्रामक निवेश देखेंगे। साथ ही तंगी से जूझ रही एनबीएफसी के लिए वित्तीय स्तर पर मजबूती का दौर आएगा।
फिनटेक इंडस्ट्री की भूमिका महत्वपूर्ण
रूपीरेडी और फिंकफ्रेंड्स के एमडी जितिन भसीन ने बातचीत में कहा कि जब बात पूरे देश में वित्तीय सेवाओं से जुड़े प्रोडक्ट्स की पेशकश की बात आती है तो फिनटेक इंडस्ट्री की भूमिका महत्वपूर्ण है। बिजनेस मॉडल और ग्राहकों के लिए मूल्य प्रस्ताव को मजबूती देने के लिए उद्योग आगामी बजट 2020 में इस क्षेत्र के लिए अलग से उपाय की उम्मीद कर रहा है।
भसीन ने आगे कहा कि शुरुआती तौर पर पहली बार 50 हजार रुपये तक का कर्ज लेने वाले असुरक्षित कर्ज या जिनका क्रेडिट इतिहास बहुत अच्छा नहीं हैं, उन्हें प्रायरिटी सेक्टर लैंडिंग के तौर पर योग्य बनाया जा सकता है। यह बेहतर प्रोडक्ट्स की शुरुआत करने में मददगार होगा और तेजी से बढ़ते हुए लोन सेक्टर को जरूरतमंदों तक अपने प्रोडक्ट्स ले जाने की अनुमति देगा, जहां अब तक औपचारिक लोन इंडस्ट्री नहीं पहुंच सकी है।
वित्तीय सेवाओं के लिए जीएसटी दरों के अनुकूलन से डिजिटल पेमेंट साधनों के साथ-साथ लोन और निवेश उत्पादों के विस्तार में भी और तेजी आएगी। छोटे पर्सनल लोन्स पर केवाईसी से संबंधित नियमों में नरमी दी जा सकती है, जिसमें सीधे बैंक खाते में लोन राशि का वितरण किया जाता है। इससे कंपनियों की प्रक्रिया और सत्यापन में आने वाली लागत में कमी आएगी। डबल केवाईसी को हटाया जा सकता है क्योंकि बैंक खाताधारियों के लिए आवश्यक केवाईसी प्रक्रिया पूरी करते ही हैं।
इसी तरह सभी विनियमित संस्थाओं को आधार-आधारित ई-केवाईसी/वीडियो केवाईसी तक पहुंच सुनिश्चित करानी चाहिए, जिससे ओवरऑल प्रोडक्टिविटी बढ़ जाएगी। इसके अलावा, डिजिटल दस्तावेजों के लिए, सभी राज्यों में एक समान स्टाम्प शुल्क लागू किया जा सकता है।
फिनटेक कंपनियों और एनबीएफसी के लिए लाभांश वितरण कर को कम किया जाना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा इक्विटी कैपिटल को आकर्षित किया जा सके क्योंकि शासन इस समय दोहरा कराधान कर रहा है; इसके अलावा, अकाउंट एग्रीगेटर मॉडल के माध्यम से ओपन बैंकिंग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
एंजिल टैक्स की दर को घटाया जाए
क्यूबेरा के संस्थापक और सीईओ आदित्य कुमार ने बातचीत में कहा कि बाजार से आने वाली बड़े पैमाने की मांग की वजह से फिनटेक लैंडिंग सेक्टर भारत में तेजी से फल-फूल रहा है। उभरते स्टार्टअप्स को फंडिंग करने वाले निवेशकों के लिए मौजूदा 30 फीसदी से एंजिल टैक्स की दर को कम करना और स्थापित स्टार्टअप्स पर कर के बोझ को आगामी बजट में कम करना ऐसे कदम हैं, जो फिनटेक लैंडर्स के लिए बेहद फायदेमंद साबित होंगे।
सरकार को स्टार्टअप को सहजता से फंडिंग जुटाने और 2020-21 व आने वाले वर्षों में विकास से जुड़ी अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए एक इनोवेशन फंड की स्थापना का विकल्प भी देखना चाहिए।