बजट 2020: स्टेनलेस स्टील पर कस्टम ड्यूटी घटे, कम किया जाए विदेशों से आयात
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बजट 2020 के पेश होने से पहले स्टेनलेस स्टील सेक्टर से जुड़ी कंपनियों ने सरकार से बेसिक कस्टम ड्यूटी को कम करने की मांग की है। इसके साथ ही देश में स्टेनलेस स्टील की हिस्सेदारी को बढ़ाने पर सरकार द्वारा जोर देने की बात कही है, ताकि इसकी मांग में इजाफा हो।
देश में स्टेनलेस स्टील की प्रमुख कंपनियों में शुमार जिंदल स्टेनलेस के निदेशक विजय शर्मा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि कुल भारतीय इस्पात उद्योग में स्टेनलेस स्टील की हिस्सेदारी लगभग तीन फीसदी है। एक मूल्य-वर्धित धातु होने के नाते स्टेनलेस स्टील सामान्य स्टील, एल्युमीनियम, लोहे, इत्यादि की तुलना में क्षरण-रोधी, ज़्यादा मज़बूत, स्थायी और आर्थिक रूप से लाभदायक है। ऐसे में हमें घरेलू उपयोग को काफी बढ़ाना होगा।
स्टेनलेस स्टील की होगी अहम भूमिका
शर्मा ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को पांच ख़रब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने में स्टेनलेस स्टील की अहम भूमिका होगी। भारतीय सरकार द्वारा अधिकृत नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पॉलिसी (एनआईपी) इस दिशा में एक आशाजनक कदम है। हाल ही में भारत द्वारा आरसेप (RCEP) संधि पर आपत्ति जताए जाने और विचार-विमर्श से वापसी, घरेलू उद्योग के लिए एक रिहायती कदम था।
कई समस्याओं से जूझ रहा है भारतीय स्टेनलेस स्टील
भारतीय स्टेनलेस स्टील उद्योग कईं समस्याओं से जूझ रहा है। शर्मा ने बताया कि 'कॉस्ट ऑफ़ कैपिटल' और 'लोजिस्टिक्स कॉस्ट' में तीव्रता से भारत में स्टेनलेस स्टील को चीन, इंडोनेशिया, इत्यादि जैसे अत्यधिक उत्पाद वाले देशों से होने वाले अनियमित निर्यात से काफी दिक्कतों का सामना करना प़ड़ रहा है।
भारतीय कंपनियां फिलहाल इनसे कम कीमत पर अपने उत्पादों को नहीं बेच पा रही हैं, जिसका असर उत्पादन और मांग पर पड़ रहा है। भारतीय कंपनियां जिस स्टेनलेस स्टील का निर्माण करती हैं वो अन्य देशों के मुकाबले काफी अच्छा है। लेकिन भारत के द्वारा स्वीकृत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (एफटीए) वाले देशों से बढ़ते आयात के चलते भारतीय स्टेनलेस स्टील उद्योग अपनी पूर्ण स्थापित क्षमता का केवल 55-60 फीसदी उपयोग ही कर पा रहा है। ऐसे में भारतीय उत्पादकों को वैश्विक रूप से एक समतल व्यापारिक स्तर मिलना चाहिए।
समुद्र तट पर केवल स्टेनलेस स्टील ही भरोसेमंद धातु
भारत के 7,500 किमी विराट समुद्र-तट को एक स्थायी और भरोसेमंद धातु की ज़रूरत है क्यूंकि यहाँ क्षरण का खतरा ज़्यादा होता है। स्टेनलेस स्टील अपनी बहु-रुपी खूबियों के साथ इस चुनौती पर ख़रा उतरता है। हमें उम्मीद है कि आगामी बजट में वित्त मंत्रालय भारतीय उद्योग की चुनौतियों को समझकर, उत्तम उपाय सांझा करेगा।
हमें आशा है कि स्टेनलेस स्टील के कच्चे माल जैसे स्क्रैप, फेरो-क्रोम, ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड इत्यादि पर लागू इम्पोर्ट ड्यूटी को रद्द किया जाएगा और साथ ही स्टेनलेस स्टील में निर्मित वस्तुओं पर लागू बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (बीसीडी) को 7.5 फीसदी से 12.5 फीसदी पर सामान्य स्टील के बराबर लाया जाएगा।