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संयुक्त राष्ट्र की माली हालत हुई खराब, खर्चों में कटौती के लिए बंद होंगे एसी, एस्केलेटर

Sat, 12 Oct 2019 01:10 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Sat, 12 Oct 2019 01:10 PM IST
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un is facing biggest cash crunch of decade, will switch off ac, lift and escalators from monday
- फोटो : social media

संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय हालत और खराब हो गई है। खर्चों में कटौती करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में मौजूद एसी, एस्केलेटर सहित मुख्यालय के बाहर लगे फाउंटेन को भी सोमवार से बंद किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यालय में काम कर रहे अधिकारियों व कर्मचारियों से भी आधिकारिक बैठक, यात्रा और डॉक्यूमेंट्स का छह भाषाओं में अनुवाद करने में भी कटौती करने के लिए कहा गया है। 

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सोमवार से लागू होगी नई व्यवस्था

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने यह आदेश जारी करते हुए कहा है कि नई व्यवस्था सोमवार से लागू होगी। यह व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय के अलावा विश्व भर में मौजूद अन्य कार्यालयों में लागू की जाएगी। शुक्रवार को महासचिव ने पत्र लिखकर कहा है कि यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक स्थिति में सुधार नहीं हो जाता है। 

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सदस्य देशों  ने नहीं किया बकाए का भुगतान

महासचिव की ओर से जारी बयान के अनुसार सदस्य देशों ने अगर अपनी वार्षिक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया तो संयुक्त राष्ट्र के कामकाज और सुधार प्रक्रिया के समक्ष जोखिम पैदा हो जाएगा। 193 सदस्य देशों में से अब तक 128 देशों ने तयशुदा बकाया राशि का वार्षिक भुगतान किया है। 

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एक दशक में सबसे गंभीर संकट

संयुक्त राष्ट्र को पिछले एक दशक में पहली बार इतने गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। संगठन के सामने आरक्षित निधि में रखी गई नकदी के अक्तूबर महीने के अंत तक खर्च हो जाने का खतरा मंडरा रहा है जिसकी वजह से कर्मचारियों को वेतन और अन्य सेवाओं के लिए भुगतान का संकट खड़ा हो सकता है।


संयुक्त राष्ट्र के प्रबंधक विभाग की अध्यक्ष कैथरिन पोलार्ड ने आम सभा की बजट कमेटी को बताया कि केवल 128 देशों से चार अक्तूबर तक 199 करोड़ डॉलर की राशि प्राप्त हुई है। लेकिन 65 देशों ने 138.6 करोड़ डॉलर का भुगतान नहीं किया है। इसमें 100 करोड़ डॉलर की राशि अकेले अमेरिका को देनी है।

यह लगातार दूसरा साल है जब यूएन ने अपने आरक्षित बजट को भी खत्म कर लिया है। जहां पिछले साल सदस्य देशों से 78 फीसदी राशि प्राप्त हुई थी, वहीं इस साल यह घटकर के 70 फीसदी रह गया है। इस हिसाब से एक साल का बकाया ही 23 करोड़ डॉलर है। अगर हमें पूरा बजट भी मिल जाए तो भी सदस्य देशों कुल 80.8 करोड़ डॉलर की राशि को अगले दो महीने में जुटाना होगा।  

अमेरिका के बाद चीन संयुक्त राष्ट्र को सबसे ज्यादा धन देता है। नकदी कम होने की वजह से नए पदों पर नियुक्तियां बेहद सीमित संख्या में हो रही हैं और और गैर-वैतनिक खर्च भी सीमित हो गया है। इससे यूएन के कामकाज और नतीजों पर ध्यान केंद्रित करने के प्रयासों पर असर पड़ रहा है।


पिछले सप्ताह यूएन प्रमुख ने कहा था कि रिकॉर्ड स्तर पर नकदी की कमी होने की वजह से उन्हें असाधारण कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है। रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति नहीं हो पा रही है, यात्राएं तभी की जा रही हैं जब वे बेहद जरूरी हों, बैठकें टाली या स्थगित की जा रही हैं। इन कारणों से यूएन के कामकाज पर ना सिर्फ न्यूयॉर्क, जिनेवा, वियना और नैरोबी कार्यालयों बल्कि क्षेत्रीय आयोगों पर भी असर होगा।

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