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Intel Story: 8.9 अरब डॉलर का सरकारी दांव और एनवीडिया की एंट्री, क्या संकटग्रस्त इंटेल के दिन बदलने वाले हैं?

Sat, 27 Sep 2025 03:03 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 27 Sep 2025 03:03 PM IST
सार

Intel Story: कभी चिप निर्माण का मानक माना जाने वाला इंटेल समय के साथ पिछड़ता चला गया। TSMC जैसे ताइवानी प्रतिद्वंद्वी बेहतरीन उत्पादन देने लगे, जबकि इंटेल के उन्नत मैन्युफैक्चरिंग नोड्स बार-बार विफल रहे। इंटेल ने अपने संसाधनों की बहुत ज्यादा बर्बादी की और बहुत सारा समय गंवाया। अब कंपनी को एक बार फिर अपने पैर पर खड़ा करने की कोशिश हो रही है। इसके लिए अमेरिकी सरकार और प्रतिद्वंद्वी कंपनी एनवीडिया दांव लगा रहे हैं। क्या है पूरा माजरा यहां समझें।

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Trump and Nvidia are kind to Intel, Is this the beginning of a comeback or a risk-reduction strategy?
इंटेल का रिवाइवल प्लान - फोटो : amarujala.com

विस्तार

क्या आप जानते हैं कि सफेद चाय और हरी चाय एक ही पौधे से आती हैं? फर्क सिर्फ इसकी प्रोसेसिंग में होती है। सुबह-सुबह पहले तोड़ी गई कोमल पत्तियां बेहतरीन मानी जाती हैं और इनकी कीमत ₹10,000 प्रति किलो तक होती है। लेकिन जरा-सी चूक के बाद वही पत्तियां साधारण चाय बन जाती हैं। इसकी कीमत कुछ सौ रुपये किलो से ज्यादा नहीं होती। कंप्यूटर प्रोसेसर की दुनिया भी कुछ ऐसी ही है। एक ही सेमीकंडक्टर वेफर्स से इंटेल के i3, i5, i7 और i9 जैसे प्रोसेसर निकलते हैं। लेकिन हर चिप अपने तय मानक पूरे नहीं कर पाता। नतीजतन, बेहतरीन क्वालिटी वाले कम और निचले स्तर के प्रोसेसर ज़्यादा बनते हैं। यही वजह है कि हाई-एंड i9 जैसे चिप्स की उपलब्धता बेहद सीमित रहती है।

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क्या है इंटेल की गिरावट और TSMC के उदय की कहानी?

कभी चिप निर्माण का मानक माना जाने वाला इंटेल समय के साथ पिछड़ता चला गया। TSMC जैसे ताइवानी प्रतिद्वंद्वी बेहतरीन उत्पादन देने लगे, जबकि इंटेल के उन्नत मैन्युफैक्चरिंग नोड्स बार-बार विफल रहे। इंटेल ने अपने संसाधनों की बहुत ज्यादा बर्बादी की। बहुत सारा समय गंवाया। 2015 तक इंटेल की फाउंड्री के मामले में लीडरशिप खत्म हो गई और 2021 में कंपनी को अपने GPU उत्पादन भी TSMC को आउटसोर्स करने पड़े। नतीजा कंपनी के प्रतिद्वंद्वी एएमडी ने प्रदर्शन और वैल्यू-फॉर-मनी दोनों मामलों में बढ़त हासिल कर ली, दूसरी ओर इंटेल बार-बार अपने सबसे महत्वाकांक्षी डिजाइनों में देरी करता रहा। नतीजा चिप निर्माण के मामले में अमेरिका की आत्मनिर्भरता कम होती चली गई और टेक मार्केट में अमेरिका का दबदबा कम होने का रिस्क बढ़ने लगा। इसी सोच के साथ इंटेल को फिर से खड़ा करने की रणनीति बननी शुरू हुई। फिलहाल हालात बदलते नजर आ रहे हैं। 

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इंटेल पर अब सरकार और एनवीडिया की नजर क्यों?

अमेरिका की ट्रंप सरकार ने हाल ही में इंटेल में 10% गैर-वोटिंग हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की। इसकी कीमत करीब 8.9 अरब डॉलर है। यह दिखाता है कि वॉशिंगटन अब भी इंटेल को चीन और ताइवान से निपटने के लिए रणनीतिक संपत्ति मानता है। इतना ही नहीं, एनवीडिया ने भी इंटेल में लगभग 4% हिस्सेदारी (करीब 5 अरब डॉलर मूल्य) खरीदने का एलान किया है। और यह कोई सामान्य निवेश नहीं है- यह साझेदारी उत्पादन और तकनीकी सहयोग, दोनों पर केंद्रित है। अब बड़ा सवाल है कि जीपीयू बाजार का निर्विवाद लीडर एनवीडिया, इंटेल जैसे संघर्षरत खिलाड़ी पर क्यों दांव क्यों लगा रहा है। इसका जवाब आत्मनिर्भरता और ट्रंप के मागा (मेक अमेरिका ग्रेड अगेन) से जुड़ा है। एनवीडिया के ज्यादातर हाई-एंड चिप्स ताइवान की कंपनी टीएसएमसी पर निर्भर हैं। भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में यह जोखिम भरा हो सकता है। इंटेल के साथ साझेदारी एनवीडिया को अपना बैकअप प्लान मानकर चल रही है।

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Trump and Nvidia are kind to Intel, Is this the beginning of a comeback or a risk-reduction strategy?
इंटेल - फोटो : लिंक्डइन

इंटेल को पटरी पर लाने के लिए क्या है प्लान? 

एनवीडिया और इंटेल का गठजोड़ दो स्तरों पर काम करेगा। पहला डेटा सेंटर के लिए। इंटेल एनवीडिया के कस्टम x86 CPU बनाएगा। इन्हें एनवीडिया अपने एआई प्लेटफॉर्म में जोड़ सकेगा। दूसरा पर्सनल कंप्यूटिंग के लिए। इंटेल x86 SoCs (CPU + GPU) बनाएगा। इसमें एनवीडिया के RTX चिपलेट्स शामिल होंगे। ये चिप्स हाई-परफॉर्मेंस पीसी की जरूरतें पूरी करेंगे। हालांकि, यह ध्यान रखना होगा कि इंटेल अब भी TSMC की तरह अत्याधुनिक AI GPU बनाने की स्थिति में नहीं है।

इस राह में चुनौतियां क्या हैं?

हालांकि इंटेल और एनवीडिया की साझेदारी कागज पर जितनी आकर्षक लगती है, हकीकत में इतनी आसान नहीं है। इंटेल को साबित करना होगा कि वह समय पर और बड़े पैमाने पर चिप्स बना सकता है। वित्तीय चुनौतियां भी गंभीर हैं। FY24 में इंटेल को 19 अरब डॉलर का घाटा हुआ और FY25 की पहली तिमाही में भी हालात नहीं सुधरे। दूसरी ओर, टीएसएमसी के बनाए उत्पादों से बाजार में एएमडी लगातार हिस्सेदारी बढ़ा रहा है।

बाजार की क्या प्रतिक्रिया है?

चुनौतियों के बावजूद निवेशक इंटेल और एनवीडिया डील को पॉजिटिव संकेत मानते हैं। समझौते की खबरें सामने आने के बाद इंटेल के शेयर एक ही दिन में 22% उछल गए। यह हाल के वर्षों में सबसे तेज उछाल। दूसरी ओर, एएमडी के शेयरों में 5% की गिरावट आई। निवेशक मानते हैं कि यह गठबंधन संतुलन थोड़ा-बहुत बदल सकता है। फिलहाल, इंटेल द्वारा एनवीडिया के सबसे एडवांस AI GPU बनाने की संभावना नहीं है। लेकिन इस डील से दोनों कंपनियों को वही मिलता है जिसकी उन्हें जरूरत है।

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