अमेरिकी टैरिफ भारत के लिए अवसर: 'सेवा आधारित मॉडल से स्वदेशी उत्पादों की ओर बढ़ने का समय', बोले डॉ. हिरानंदानी
भारतीय उद्योगपति डॉ. हीरानंदानी ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ को आत्मनिर्भर बनने के लिए एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। अमेरिकी टैरिफ भारत को मजबूरी में ही सही, लेकिन इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे, जिससे देश की औद्योगिक और नवाचार क्षमता को नई दिशा मिलेगी।
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अमेरिकी टैरिफ को भारत के लिए अवसर है, जिससे इससे देश को सेवा आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर स्वदेशी उत्पादों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा। भारतीय उद्योगपति डॉ. हीरानंदानी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का यह कदम आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने की दिशा में भारत की प्रगति को तेज करेगा।
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झिझक और आत्मविश्वास की कमी
हिरानंदानी ने कहा कि अब तक भारत में झिझक और आत्मविश्वास की कमी के कारण देश ने मुख्य रूप से सेवाओं पर आधारित मॉडल अपनाया। जहां भारतीय कंपनियां अमेरिकी कंपनियों के लिए काम करती रहीं, लेकिन खुद के उत्पाद विकसित करने पर पर्याप्त जोर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां भारत के लिए अपनी औद्योगिक क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजार में अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि अब भारतीय मानसिकता में बदलाव आने वाला है। अब तक हम लगातार सेवाधारित व्यवसाय पर केंद्रित थे, अमेरिका और बाकी दुनिया की सेवा करते रहे, लेकिन अपने उत्पाद नहीं बनाए। हमने न एपल बनाया, न माइक्रोसॉफ्ट हम हिचकिचाते रहे, आत्मविश्वास की कमी रही। लेकिन आज हमारे पास वह अवसर है जब सेवाओं से आगे बढ़कर भारत अपने स्वयं के उत्पाद बनाएगा।
अमेरिकी टैरिफ से देश को नई दिशा मिलेगी
हिरानंदानी ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ भारत को मजबूरी में ही सही, लेकिन इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे, जिससे देश की औद्योगिक और नवाचार क्षमता को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि हां, इसमें मुश्किलें तो हैं। अगर आप अमेरिका को निर्यात नहीं कर सकते, तो हमें इसके लिए कोई दूसरा विकल्प तलाशना चाहिए। बेशक, उत्पाद अलग हो सकते हैं, अवसर भी अलग होंगे, लेकिन पूरी दुनिया को देखने में क्या बुराई है?
हमने अमेरिका सहित दुनिया को हल्के में लिया
हिरानंदानी ने कहा कि हमने अमेरिका को हल्के में लिया। हम दुनिया को हल्के में लेते हैं। हम यह मानते हुए चल रहे थे कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से चली आ रही व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आ चुका है और पुरानी धारणाएं अब लागू नहीं होतीं।
अमेरिका ने अपना रुख साफ कर दिया
उन्होंने कहा कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन ने अपना रुख साफ कर दिया है अब किसी देश के साथ संबंधों के आधार पर नहीं, बल्कि व्यापारिक समीकरणों के हिसाब से फैसले लिए जा रहे हैं। अगर कोई व्यापारिक संबंध अमेरिका के हित में नहीं है, तो वह उस देश को प्राथमिकता नहीं देगा।
विकसित भारत का विजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन का समर्थन करते हुए हिरानंदानी ने कहा कि सरकार ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय कर दी है।
भारत ने नई रणनीति अपनाई
हिरानंदानी ने कहा कि जिस तरह भारत ने लंबे समय तक वैश्विक यथास्थिति को स्थायी मान लिया, उसी तरह देश प्रौद्योगिकी के लिए भी अन्य देशों पर निर्भर रहा चाहे वह चिप निर्माण हो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो या मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर। उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल्स लिमिटेड (HAL) को दिए गए चौथे F404-IN20 फाइटर जेट इंजन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत अब अमेरिका से लड़ाकू विमान नहीं खरीद रहा, बल्कि आदेश HAL को दिए गए हैं।
टैरिफ चुनौतीपूर्ण लेकिन भारत के लिए लाभकारी
हिरानंदानी ने माना कि बदलाव की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण और कभी-कभी पीड़ादायक होती है, लेकिन यह देश के लिए जरूरी और लाभकारी कदम है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय आयात पर 50% टैरिफ और पेनल्टी लगा दी है। अमेरिका ने आरोप लगाया था कि भारत रूसी तेल खरीदकर यूक्रेन-रूस युद्ध को परोक्ष रूप से फंड कर रहा है।