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कंपनियों की अपील: कारोबारी सुगमता बढ़ाने के लिए GST प्रशासन में सुधार करने का सही समय, माफी योजना लाए सरकार
Wed, 21 Jun 2023 04:51 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Wed, 21 Jun 2023 04:51 AM IST
सार
डेलॉय के मंगलवार को जारी सर्वे के मुताबिक, एक जुलाई, 2017 को लागू होने के बाद से जीएसटी प्रशासन में उल्लेखनीय बदलाव आया है। अब इस सरलीकृत कर व्यवस्था के लिए स्वीकृति बढ़ रही है।
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How To Identify Fake GST Bill
- फोटो : Istock
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विस्तार
भारतीय उद्योग जगत का मानना है कि कारोबारी सुगमता बढ़ाने के लिहाज से जीएसटी में सुधारों के अगले चरण को शुरू करने का सही समय आ गया है। इसके साथ ही उद्योग जगत ने मौजूदा कर विवादों के समाधान के लिए एक माफी योजना लाने की अपील भी की।
डेलॉय के मंगलवार को जारी सर्वे के मुताबिक, एक जुलाई, 2017 को लागू होने के बाद से जीएसटी प्रशासन में उल्लेखनीय बदलाव आया है। अब इस सरलीकृत कर व्यवस्था के लिए स्वीकृति बढ़ रही है। सर्वे में शामिल 80 फीसदी कंपनियों का मानना है कि अगले कुछ वर्षों में कारोबार करने में आसानी और क्षेत्रवार विकास के लिए जीएसटी व्यवस्था में अगले चरण के सुधारों का समय आ गया है। वहीं, 70 फीसदी कंपनियां जीएसटी व्यवस्था से हुए बदलावों को लेकर काफी सकारात्मक है। आंकड़ों के लिहाज से यह पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी अधिक है।
एमएसएमई को सर्वाधिक लाभ
सर्वे के मुताबिक, सरलीकृत कर व्यवस्था से छोटे से लेकर बड़े यानी सभी आकार के व्यवसायों को लाभ हुआ है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सबसे बड़ा लाभार्थी हैं।
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डेलॉय के मंगलवार को जारी सर्वे के मुताबिक, एक जुलाई, 2017 को लागू होने के बाद से जीएसटी प्रशासन में उल्लेखनीय बदलाव आया है। अब इस सरलीकृत कर व्यवस्था के लिए स्वीकृति बढ़ रही है। सर्वे में शामिल 80 फीसदी कंपनियों का मानना है कि अगले कुछ वर्षों में कारोबार करने में आसानी और क्षेत्रवार विकास के लिए जीएसटी व्यवस्था में अगले चरण के सुधारों का समय आ गया है। वहीं, 70 फीसदी कंपनियां जीएसटी व्यवस्था से हुए बदलावों को लेकर काफी सकारात्मक है। आंकड़ों के लिहाज से यह पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी अधिक है।
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एमएसएमई को सर्वाधिक लाभ
सर्वे के मुताबिक, सरलीकृत कर व्यवस्था से छोटे से लेकर बड़े यानी सभी आकार के व्यवसायों को लाभ हुआ है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सबसे बड़ा लाभार्थी हैं।
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