India-Fiji Ties: 'भारत और फिजी की आकांक्षाएं एक ही नाव पर सवार', दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद बोले PM मोदी
India-Fiji Relationships: फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी लिगामामादा राबुका और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बुधवार को एक संयुक्त प्रेस वार्ता हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने जलवायु परिवर्तन को फिजी के लिए खतरा बताते हुए कहा कि हम आपदा प्रतिक्रिया से निपटने में उसकी मदद करेंगे। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी लिगामामादा राबुका, हैदराबाद हाउस में भारत और फिजी के बीच हुए समझौतों के आदान-प्रदान के साक्षी बने। प्रधानमंत्री मोदी और उनके फिजी समकक्ष राबुका के बीच वार्ता के बाद भारत और फिजी ने सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी लिगामामादा राबुका प्रधानमंत्री मोदी की बुधवार को एक संयुक्त प्रेस वार्ता हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने जलवायु परिवर्तन को फिजी के लिए खतरा बताते हुए कहा कि हम आपदा प्रतिक्रिया से निपटने में उसकी मदद करेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और फिजी भले ही महासागरों से बंटे हुए हों, लेकिन हमारी आकांक्षाएं एक ही नाव पर सवार हैं। इस दौरान फिजी के नेता भी उनके साथ थे।
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, "33 वर्षों के बाद, 2014 में, किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने फिजी का दौरा किया। मुझे बहुत खुशी और गर्व है कि यह मेरा सौभाग्य था। उस समय, हमने फॉरेन फॉर इंडिया पैसिफिक आइलैंड कोऑपरेशन-FIPIC का गठन किया था। इस पहल ने न केवल भारत-फिजी संबंधों को बल्कि पूरे प्रशांत क्षेत्र के साथ हमारे संबंधों को भी मजबूत किया। प्रधानमंत्री राबुका की इस यात्रा के साथ, हम अपने संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ रहे हैं।"
भारत और फिजी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिजी के समकक्ष सितवेनी लिगामामादा राबुका के साथ व्यापक वार्ता के बाद अपने रक्षा संबंधों को विस्तार देने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और फिजी भले ही महासागरों की दूरी पर हों, लेकिन हमारी आकांक्षाएं एक ही नाव पर सवार हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत और फिजी एक स्वतंत्र, समावेशी, खुले, सुरक्षित और समृद्ध भारत-प्रशांत का समर्थन करते हैं। राबुका रविवार को तीन दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचे। दक्षिण प्रशांत क्षेत्र के प्रधानमंत्री के रूप में यह उनकी पहली भारत यात्रा है। समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में फ़िजी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्र है। प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पकड़ बढ़ाने के चीन के अथक प्रयासों की पृष्ठभूमि में, भारत फ़िजी के साथ अपने रक्षा संबंधों को बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
मोदी और राबुका के बीच वार्ता के बाद, दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को व्यापक बनाने के लिए सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए। मोदी ने कहा, "हमने रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करने का फैसला किया है।" उन्होंने मीडिया को दिए बयान में कहा कि इसके लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत फिजी की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण और उपकरण सहायता प्रदान करेगा। अपने संबोधन में मोदी ने वैश्विक दक्षिण के लिए भारत की प्राथमिकताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण के विकास में सहयात्री है।
उन्होंने कहा, "हम एक ऐसी विश्व व्यवस्था के निर्माण में भागीदार हैं, जहां वैश्विक दक्षिण की स्वतंत्रता, विचारों और पहचान का सम्मान किया जाता है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन फिजी के लिए खतरा है और नई दिल्ली आपदा प्रतिक्रिया से निपटने में उसकी मदद करेगी।
विदेश मंत्रालय की सचिव (दक्षिण) नीना मल्होत्रा ने कहा कि भारत-फिजी के साथ सीधा हवाई संपर्क स्थापित करने के लिए भारतीय निजी एयरलाइनों को आवश्यक नागरिक उड्डयन सहायता देने के लिए तैयार है। फिजी के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा पर नीना मल्होत्रा ने कहा कि सीधी उड़ान संपर्क के बारे में मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी चुनौती है। भारत के पास अभी कोई राष्ट्रीय एयरलाइन नहीं है और फिजी एयरवेज का संचालन सीमित है। अभी तक कोई सीधा हवाई संपर्क नहीं है क्योंकि हमारे पास कोई राष्ट्रीय एयरलाइन नहीं है, इसलिए यह निजी एयरलाइनों के हाथ में है। अगर हमारी कोई भी एयरलाइन कोड-शेयरिंग व्यवस्था करना चाहती है या सीधे उड़ान भरना चाहती है तो हम सुविधा प्रदान करने के लिए तैयार हैं। हमें आवश्यक नागरिक उड्डयन सहायता प्रदान करने और सुविधा प्रदान करने में बहुत खुशी होगी
उन्होंने कहा कि चीनी उद्योग के पतन के साथ फिजी पर्यटन पर अत्यधिक निर्भर हो गया। इससे अन्य आर्थिक क्षेत्रों के विकास में बाधा उत्पन्न हुई। इस अति-निर्भरता और कोविड-19 यात्रा प्रतिबंधों के गंभीर प्रभाव ने देश को महामारी के बाद की अवधि में आर्थिक विविधीकरण की संभावनाओं को तलाशने के लिए प्रेरित किया। कम से कम 3 या 4 क्षेत्र ऐसे हैं जहां अपार संभावनाएं हैं। कृषि, मत्स्य पालन, निर्माण और पर्यटन। कृषि के क्षेत्र में फिजी में जहां भारत से लोग चीनी बागानों के लिए गिरमिटिया मजदूर के रूप में गए थे, अब वहां फिजी चीनी उद्योग नीचे जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन इतना विकसित हो गया है कि पूरा ध्यान पर्यटन पर ही केंद्रित है। पर्यटन पर अत्यधिक निर्भरता है यही वजह है कि अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्र बहुत अच्छी तरह से विकसित नहीं हुए हैं। यही कारण है और कोविड के बाद भी ऐसा हुआ है जब पर्यटन को बड़ा झटका लगा कि इनमें से कई देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं और विदेशों से कुशल श्रमिकों और कुशल पेशेवरों की तलाश कर रहे हैं। इसलिए कृषि एक ऐसा क्षेत्र है जहां हमें अपार संभावनाएं दिखाई देती हैं।
फिजी पीएम ने राष्ट्रपति द्रौपदी से की मुलाकात
फिजी के प्रधानमंत्री राबुका ने राजघाट पर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि भी अर्पित की। उन्होंने आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर भी किए। राबुका को पुस्तकें और महात्मा गांधी की एक प्रतिमा भेंट की गई। राबुका ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात की।