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Tata Group: टाटा समूह के अधिकारी गृह मंत्री शाह व वित्त मंत्री सीतारमण से मिले, जानें क्यों अहम है मुलाकात

Tue, 07 Oct 2025 09:58 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 07 Oct 2025 09:58 PM IST
सार

Tata Group: नोएल टाटा और चंद्रशेखरन, टाटा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा के साथ मंगलवार शाम को बैठक के लिए गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर पहुंचे। सीतारमण भी गृह मंत्री के आवास पर बैठक में शामिल हुईं। यह मुलाकात क्यों अहम है? आइए जानते हैं।

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Tata Group Leadership Meets Home Minister Amit Shah and Finance Minister Nirmala Sitharaman
एन चंद्रशेखरन, टाटा संस और एयर इंडिया के चेयरमैन - फोटो : ANI

विस्तार

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन समेत टाटा समूह के शीर्ष अधिकारी मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिले। यह मुलाकात बोर्ड में नियुक्तियों और संचालन के मुद्दों पर ट्रस्टियों के बीच चल रही खींचतान के बीच हुई।

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नोएल टाटा और चंद्रशेखरन, टाटा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा के साथ मंगलवार शाम को बैठक के लिए शाह के आवास पर पहुंचे। सीतारमण भी गृह मंत्री के आवास पर बैठक में शामिल हुईं।
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यह बैठक टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों के बीच बोर्ड नियुक्तियों और प्रशासन के मुद्दों पर चल रहे अंदरूनी कलह की खबरों के बीच हुई। इस विवाद के कारण 180 अरब डॉलर से अधिक के समूह के कामकाज पर असर पड़ने का खतरा है।
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टाटा ट्रस्ट्स, नमक से लेकर सेमीकंडक्टर तक के कारोबार करने वाले समूह की प्रवर्तक और होल्डिंग कंपनी टाटा संस में अपनी लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह भारत के सबसे मूल्यवान समूह (टाटा ग्रुप) पर निर्णायक असर डालता है।

सूत्रों के अनुसार टाटा ट्रस्ट्स में दो हिस्से हैं, एक हिस्सा नोएल टाटा के साथ जुड़ा है, जिन्हें रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्ट का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। चार ट्रस्टियों के दूसरे समूह का नेतृत्व मेहली मिस्त्री कर रहे हैं। इनका संबंध विस्तारित शापूरजी पलोनजी परिवार से हैं। इस परिवार के पास टाटा संस में लगभग 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मेहली को कथित तौर पर लगता है कि उन्हें महत्वपूर्ण मामलों से दूर रखा गया है।

सूत्रों ने बताया कि विवाद का मुख्य कारण टाटा संस के बोर्ड की सीटें हैं। यह बोर्ड 156 वर्ष पुराने समूह को नियंत्रित करता है। इसमें 30 लिस्टेड कंपनियों सहित लगभग 400 कंपनियां शामिल हैं।

टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस और वेणु श्रीनिवासन ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। मेहली मिस्त्री की ओर से भी टिप्पणी फिलहा नहीं आई है। उन्होंने कॉल और संदेशों का उत्तर नहीं दिया है।


एक सूत्र ने कहा, "देश की अर्थव्यवस्था के लिए टाटा समूह की अहमियत को देखते हुए सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वह किसी एक व्यक्ति को इसका नियंत्रण सौंप सकती है। टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों के बीच चल रही अंदरूनी कलह का असर टाटा संस पर भी पड़ रहा है।"

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