Tariffs: 'अमेरिकी टैरिफ की धमकी के आगे भारत को झुकने की जरूरत नहीं', बोले नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत
Tariffs: नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने कहा है कि अमेरिका की ओर से टैरिफ की धमकी पर भारत को झुकने की जरूरत नहीं है। उनका मानना है कि हमें डटे रहना चाहिए। हमारे पास बातचीत के लिए अब भी 20 दिन हैं। उन्होंने कहा कि हमें व्यापक और गुप्त बातचीत करनी चाहिए। आइए हम इस बारे में विस्तार से जानें।
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अमेरिका की ओर से टैरिफ की धमकी पर भारत को झुकने की जरूरत नहीं है। हमें डटे रहना चाहिए...हमें अभी (अमेरिका पर जवाबी टैरिफ नहीं लगाना चाहिए), क्योंकि हमारे पास बातचीत के लिए अब भी 20 दिन हैं। बातचीत में धैर्य एक गुण है। हमें व्यापक और गुप्त बातचीत करनी चाहिए। लेकिन लंबे समय तक। हम अमेरिका से बोइंग विमान खरीदते हैं। अमेरिका की कई वैश्विक डिजिटल कंपनियां भारत में काम करती हैं। हम उन्हें अपना डेटा इस्तेमाल करने की आजादी देते हैं। ये सभी तथ्य टैरिफ की बातचीत के टेबल पर भारत के लिए बहुत फायदेमंद हैं। नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत गुरुवार को यह बात कही।
जी20 शेरपा रहे अमिताभ कांत ने कहा, "मैं यात्रा और पर्यटन में बहुत विश्वास रखता हूं और यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। हमने पिछले 89 वर्षों से अतुल्य भारत की ब्रांड मार्केटिंग नहीं की है। प्रधानमंत्री ने पर्यटन पर बहुत जोर दिया है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें न केवल भारत सरकार, बल्कि हर राज्य को यात्रा और पर्यटन को बढ़ावा देने में अग्रणी बनना चाहिए। आज, केवल राजस्थान, केरल और कश्मीर ही ऐसा कर रहे हैं। भारत के हर राज्य को पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए। हमें अतुल्य भारत के एक बहुत ही एकीकृत मार्केटिंग अभियान पर ध्यान देना चाहिए। भारत के लिए जरूरी है कि यह दुनिया भर की वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में पैठ बनाए। भारत 1800 विमान खरीद रहा है। इन विमानों का इस्तेमाल भारतीयों को दुनिया के बाकी हिस्सों में ले जाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इनका इस्तेमाल दुनिया भर से पर्यटकों को भारत की ओर आकर्षित करने के लिए किया जाना चाहिए।"
अमिताभ कांत ने आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर छिड़ी बहस पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद कठोर था। सभी कुत्तों को एक साथ इकट्ठा करना संभव नहीं है। हमें नागरिकों और नगरपालिकाओं को इसे संभालने देना चाहिए। कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह नगरपालिकाओं की समस्या है। यह न्यायिक फैसले का मुद्दा नहीं है जो इस समस्या का समाधान कर सके।