फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Supreme Court said: majority of shareholders consent required to close debt schemes

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: ऋण योजनाओं को बंद करने के लिए अधिकांश शेयरधारकों की सहमति जरूरी

Wed, 14 Jul 2021 10:46 PM IST
योगेश साहू पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 14 Jul 2021 10:46 PM IST
सार

उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बुधवार को कहा कि ऋण योजनाओं को बंद करने से पहले अधिकांश शेयरधारकों की सहमति जरूरी है और यदि न्यासी नियमों का उल्लंघन करते हैं तो बाजार नियामक सेबी के पास हस्तक्षेप करने की ताकत होगी।

विज्ञापन
Supreme Court said: majority of shareholders consent required to close debt schemes
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बुधवार को कहा कि ऋण योजनाओं को बंद करने से पहले अधिकांश शेयरधारकों की सहमति जरूरी है और यदि न्यासी नियमों का उल्लंघन करते हैं तो बाजार नियामक सेबी के पास हस्तक्षेप करने की ताकत होगी।

विज्ञापन


शीर्ष अदालत का फैसला फ्रैंकलिन टेम्पलटन द्वारा दायर अपील सहित इस संबंध में दायर अन्य याचिकाओं पर आया। फ्रैंकलिन टेम्पलटन ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी को अपनी छह म्यूचुअल फंड (एमएफ) योजनाओं को अपने निवेशकों की सहमति हासिल किए बिना बंद करने से रोक दिया गया था।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने इस मुद्दे पर नियमों और विनियमों की व्याख्या के आधार पर फैसला दिया, न कि फ्रैंकलिन टेम्पलटन की छह म्यूचुअल फंड योजनाओं के समापन से संबंधित मामले के तथ्यों के संबंध में।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने कहा कि हमने वैधानिक प्रावधानों की व्याख्या की है। हम ऋण योजनाओं को बंद करने के लिए अधिकांश शेयरधारकों की सहमति पर उच्च न्यायालय द्वारा व्यक्त विचारों से सहमत हैं।

नियमों की वैधता को बरकरार रखते हुए न्यायमूर्ति खन्ना ने पीठ द्वारा लिए गए फैसले को सुनाते हुए कहा कि यदि न्यासी इसका उल्लंघन करते हैं, तो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) मामले में दखल दे सकता है।

पीठ ने कहा कि हमने तथ्यों की पड़ताल बिल्कुल भी नहीं की है। उन्हें खुला छोड़ दिया जाएगा। साथ ही न्यायालय ने कहा कि फर्म और अन्य की याचिका पर निर्णय के लिए अक्टूबर में सुनवाई की जाएगी। पीठ ने यह भी कहा कि यह मूल रूप से एक सैद्धांतिक व्याख्या है। हमने बहुत सी चीजों को नहीं छुआ है।

शीर्ष अदालत ने 12 फरवरी को म्यूचुअल फंड योजनाओं को बंद करने के लिए ई-वोटिंग प्रक्रिया की वैधता को बरकरार रखा था और कहा था कि यूनिटधारकों को धन का वितरण जारी रहेगा।

अडाणी ग्रीन एनर्जी को कर्ज सीमा बढ़ाने की मिली मंजूरी

अडाणी ग्रीन एनर्जी को अपनी कर्ज सीमा को बढ़ाकर 25 हजार करोड़ रुपये करने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मिल गई है। इस प्रस्ताव को 13 जुलाई, 2021 को हुई वार्षिक आम बैठक में मंजूरी दी गई। इससे पहले कंपनी की उधार सीमा 15 हजार करोड़ रुपये थी।

कंपनी ने बुधवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि कर्ज सीमा को बढ़ाकर 25,000 करोड़ रुपये करने के विशेष प्रस्ताव को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई है। कंपनी के शेयरधारकों ने नौ जनवरी, 2018 को हुई बैठक में निदेशक मंडल को समय-समय पर 15,000 करोड़ रुपये तक उधार लेने के लिए अधिकृत करने वाला एक प्रस्ताव पारित किया था।

कंपनी ने वार्षिक आम बैठक के बाद भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए कर्ज सीमा को 15 हजार करोड़ से बढ़ाकर 25 हजार करोड़ कर दिया है। इसके अलावा शेयरधारकों ने विनीत एस. जैन को प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के रूप में नियुक्त करने को भी मंजूरी दे दी है। सदस्यों ने कंपनी के निदेशक के रूप में राजेश एस अडाणी की फिर से नियुक्ति के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed