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Supreme Court: बैंक घोटालों में RBI कर्मियों की संलिप्तता के दावे झूठे, केंद्रीय बैंक ने दाखिल किया हलफनामा
Wed, 04 Jan 2023 05:50 PM IST
विवेक दास
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विवेक दास
Updated Wed, 04 Jan 2023 05:50 PM IST
सार
Supreme Court: आरबीआई ने शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में कहा, “इस संबंध में, यह निवेदन किया जाता है कि याचिकाकर्ता की ओर से घोटालों को आरबीआई अधिकारियों से जोड़ने की कोशिश करने वाले दावे याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए किसी भी प्रथम दृष्टया साक्ष्य के अभाव में भ्रामक हैं और इसकी पुष्टि नहीं हुई है।”
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से विभिन्न बैंकिंग घोटालों में उसके अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच की मांग वाली याचिका में जो बातें हैं वे “भ्रामक और गैर-प्रमाणित” हैं।
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आरबीआई ने न्यायालय से यह भी कहा कि उसके पास कर्मचारियों के आचरण की जांच के लिए आंतरिक तंत्र मौजूद है। स्वामी की याचिका खारिज करने की मांग करते हुए आरबीआई ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास याचिका दायर करने का कोई अधिकार नहीं है और यह तथ्यात्मक तथा कानूनी त्रुटियों से पूर्ण है।
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आरबीआई ने शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में कहा, “इस संबंध में, यह निवेदन किया जाता है कि याचिकाकर्ता की ओर से घोटालों को आरबीआई अधिकारियों से जोड़ने की कोशिश करने वाले दावे याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए किसी भी प्रथम दृष्टया साक्ष्य के अभाव में भ्रामक हैं और इसकी पुष्टि नहीं हुई है।”
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इसमें कहा गया, “यह अनुरोध किया जाता है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप है, या उसके कार्यों या चूक के संबंध में प्रथम दृष्टया सबूत हैं तो उसके आचरण की जांच करने के लिए आरबीआई के पास एक आंतरिक तंत्र/ढांचा है। याचिकाकर्ता ने इस संबंध में कोई सबूत या विशिष्ट आरोप प्रस्तुत नहीं किया है और प्रतिवादी संस्था के खिलाफ केवल अस्पष्ट और भ्रामक आरोप लगाए गए हैं।”
आरबीआई ने शीर्ष अदालत को बताया कि उसका एक केंद्रीय सतर्कता प्रकोष्ठ (सीवीसी) भी है, जो कर्मचारियों के आचरण की निगरानी करता है। विभिन्न बैंकिंग घोटालों में भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच की मांग करने वाली सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका के जवाब में केंद्रीय बैंक की ओर से यह हलफनामा दायर किया गया।
न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान स्वामी को हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। न्यायालय ने 17 अक्टूबर को स्वामी की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आरबीआई को नोटिस जारी किये थे।
स्वामी ने आरोप लगाया है कि किंगफिशर, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यस बैंक जैसी विभिन्न संस्थाओं से जुड़े घोटालों में आरबीआई अधिकारियों के शामिल होने की जांच नहीं की गई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरबीआई के अधिकारियों ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, बैंकिंग विनियमन अधिनियम और भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम सहित विभिन्न कानूनों का प्रत्यक्ष उल्लंघन करते हुए 'सक्रिय रूप से मिलीभगत' की।
CBI
- फोटो : Amar Ujala
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की। इसमें अहमदाबाद के अतिरिक्त आयकर आयुक्त संतोष करनानी को अग्रिम जमानत देने वाले गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है। करनानी को भ्रष्टाचार के मामले में आरोपित किया गया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया। इसके बाद पीठ ने मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की। इसमें अहमदाबाद के अतिरिक्त आयकर आयुक्त संतोष करनानी को अग्रिम जमानत देने वाले गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है। करनानी को भ्रष्टाचार के मामले में आरोपित किया गया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया। इसके बाद पीठ ने मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की।