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आम्रपाली प्रोजेक्ट के लिए एनबीसीसी को मिले 500 करोड़ : सुप्रीम कोर्ट

Fri, 22 May 2020 10:57 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 22 May 2020 10:57 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने शु्क्रवार को जेपी मॉर्गन की संपत्ति कुर्क करने की अनुमति प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दे दी। न्यायालय ने यह आदेश विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों का उल्लंघन कर घर खरीदारों के पैसे को कथित तौर पर दूसरे कामों में लगाने के लिए अब बंद हो चुके आम्रपाली समूह से लेनदेन में शामिल पाए जाने के बाद दिया।

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Supreme Court allows Enforcement Directorate to attach assets of JP Morgan in Amrapali Case
सुप्रीम कोर्ट

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से कहा है कि आम्रपाली परियोजनाओं को पूरा करने के लिए से एनबीसीसी को 500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने सरकार से करीब 1000 करोड़ रुपये की जीएसटी छूट देने पर भी विचार करने को कहा है।

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जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई सुनवाई में केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी से कहा, इस मामले में कोई प्राइवेट प्लेयर नहीं है। परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी सरकारी कंपनी एनबीसीसी की है। पैसों की कमी की वजह से काम रुका है। लिहाजा सरकार को फंड की व्यवस्था करनी होगी। इसमें परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा जीएसटी के तौर पर 1000 करोड़ की छूट दी जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 27 मई को होगी।
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फ्लैट खरीदारों के वकील एमएल लाहोटी ने कहा, आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अनसोल्ड प्रॉपर्टी को बेचकर 2220 करोड़ आ सकते हैं। करीब 5228 यूनिट अनसोल्ड हैं। साथ ही 398 बोगस आवंटन हैं, उनसे भी रकम आ सकती है।
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इसके अलावा 5856 फ्लैट निर्धारित मूल्य से कम में बेचे गए, इनसे 345 करोड़ रुपये की रिकवरी हो सकती है। लाहोटी ने कहा, आम्रपाली की तमाम संपत्तियों की नीलामी के करीब 7881 करोड़ रुपये और उसके निदेशकों की संपत्ति से 799 करोड़ रुपये आ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट आम्रपाली की संपत्तियों को नीलाम करने का आदेश पहले ही दे चुका है।

जेपी मॉर्गन की संपत्ति जब्त करने का निर्देश

ईडी ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को जेपी मॉर्गन कंपनी में 187 करोड़ रुपये के डायवर्जन की बात बताई, जिस पर पीठ ने कंपनी की संपत्ति जब्त करने और मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया। पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को लाहोटी के सुझावों पर कार्ययोजना लेकर आने के लिए कहा है। शीर्ष कोर्ट ने 23 जुलाई 2019 को आम्रपाली ग्रुप का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था और कहा था कि आम्रपाली की लंबित परियोजनाओं को एनबीसीसी पूरा करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली की लीज भी निरस्त कर दी थी। इस मामले में कोर्ट रिसिवर भी नियुक्त हुआ है जिसे सुनिश्चित करना है कि खरीदारों को फ्लैट आवंटित हो। बीते दिसंबर को शीर्ष कोर्ट ने खरीदारों को बकाया रकम 31 जनवरी तक देने के लिए कहा था।

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