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Sugar Production: देश में चीनी का उत्पादन 18 फीसदी बढ़ा, जानिए कौन सा राज्य रहा अव्वल

Sat, 31 Jan 2026 03:43 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Sat, 31 Jan 2026 03:43 PM IST
सार

जनवरी तक देश में चीनी उत्पादन में 18 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। महाराष्ट्र सबसे बड़ा उत्पादक बना हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में भी उत्पादन बढ़ा है। बढ़ते उत्पादन और लागत को देखते हुए चीनी उद्योग ने न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) में संशोधन की मांग दोहराई है।

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Sugar production in the country increased by 18%, know which state has the highest crushing
चीनी - फोटो : Freepik.com

विस्तार

भारतीय चीनी और जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (आईएसएमए) के मुताबिक, जनवरी में भारत का चीनी उत्पादन बढ़कर 195.03 लाख टन हो गया। यह पिछले सीजन की समान अवधि में 164.79 लाख टन था। इस तरह साल-दर-साल आधार पर उत्पादन में 18.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। आईएसएमए के अनुसार, फिलहाल देशभर में 515 चीनी मिलें परिचालन में हैं, जो पिछले साल इसी समय संचालित 501 मिलों से थोड़ा अधिक है। चीनी पेराई का सीजन आमतौर पर अक्तूबर से शुरू होता है।

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महाराष्ट्र सबसे आगे

आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य हैं और तीनों राज्यों में इस साल उत्पादन बढ़ा है। महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 78.72 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले सीजन की समान अवधि के मुकाबले करीब 42 फीसदी अधिक है। राज्य में इस समय 206 मिलें चालू हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 190 थी।

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यूपी और कर्नाटक में भी सुधार

दूसरे नंबर पर रहने वाले उत्तर प्रदेश ने जनवरी के अंत तक 55.1 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 2.5 लाख टन (लगभग 5 फीसदी) ज्यादा है, जिसे लगातार पेराई का समर्थन मिला। वहीं कर्नाटक में भी पेराई की रफ्तार बेहतर रही और उत्पादन में पिछले सीजन की तुलना में करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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एमएसपी बढ़ाने की फिर उठी मांग

आईएसएमए ने एक बार फिर चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) में संशोधन की मांग दोहराई है। संगठन ने कहा कि बढ़ती उत्पादन लागत के अनुरूप MSP में जल्द संशोधन करना उद्योग की वित्तीय स्थिरता, किसानों को समय पर गन्ना भुगतान और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी है—और इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।


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