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सरकार ने राज्यों की कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाया, अब जीडीपी का पांच फीसदी ले सकेंगे उधार
Sun, 17 May 2020 03:18 PM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sun, 17 May 2020 03:18 PM IST
सार
- सरकार ने राज्यों के कर्ज उठाने की सीमा को बढ़ाया
- अब राज्य जीडीपी का पांच फीसदी कर्ज ले सकते हैं
- इस कदम से राज्यों को 4.28 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त धन उपलब्ध होगा
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष (2020-21) के लिए राज्यों की कुल कर्ज उठाने की सीमा बढ़ा कर पांच फीसदी करने की घोषणा की। अभी तक वे राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के तीन फीसदी तक ही बाजार से कर्ज ले सकते थे। इस कदम से राज्यों को 4.28 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त धन उपलब्ध होगा।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की पांचवीं और अंतिम किस्त जारी करते हुए संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र ने वास्तविक राजस्व संग्रह बजट अनुमानों से काफी कम रहने के बाद भी अप्रैल में राज्यों को करों से प्राप्त राशि में से 46,038 करोड़ रुपये दिए।
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उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के समक्ष संसाधनों की कमी के बाद भी राज्यों को अप्रैल और मई में कुल 12,390 करोड़ रुपये के बराबर राजस्व घाटा अनुदान दिया गया।
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इसके अलावा, अप्रैल के पहले सप्ताह में 11,092 करोड़ रुपये राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) को अग्रिम तौर पर जारी किए गए। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम से संबंधित प्रत्यक्ष गतिविधियों के लिए 4,113 करोड़ रुपये से अधिक जारी किए।
वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के अनुरोध पर, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने राज्यों के लिए कर्ज जुटाने के उपायों (वेज एंड मीन्स एडवांस लिमिट) में 60 फीसदी की वृद्धि की। इसके अलावा, एक माह में लगातार ओवरड्राफ्ट की स्थिति 14 दिनों से बढ़ाकर 21 दिनों तक रख सकने की छूट दी गई।
इसी तरह एक तिमाही में ओवरड्राफ्ट की स्थिति कुल मिला कर 32 दिन की बजाय 50 दिन तक रखने की छूट दी गई है।
राज्यों के लिए 2020-21 के दौरान उधार जुटाने की पहले से स्वीकृत कुल सीमा 6.41 लाख करोड़ रुपये (सकल राज्य घरेलू उत्पाद का तीन फीसदी) है। राज्यों ने अब तक अधिकृत सीमा का केवल 14 फीसदी उधार लिया है। 86 फीसदी अधिकृत कर्ज सीमा को अभी तक उपयोग में नहीं लाया गया है।
हालांकि राज्य इसके बावजूद कुल उधार की सीमा को जीएसडीपी के तीन फीसदी से बढ़ाकर पांच फीसदी करने की मांग कर रहे थे।