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NSE Co-Location Scam: एनएसई को-लोकेशन 'घोटाले' से जुड़ा मामला, अदालत ने स्वीकार की सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट

Tue, 26 Aug 2025 09:08 PM IST
पवन पांडेय बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 26 Aug 2025 09:08 PM IST
सार

विशेष न्यायाधीश गगनदीप सिंह ने रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कहा कि एनएसई और एसईबीआई की जिम्मेदारी है कि वे निवेशकों के हितों की रक्षा करें। सिर्फ नियम बनाना काफी नहीं है, सख्त अमल भी जरूरी है। अगर ऑडिट और नियमों की प्रक्रिया कागज पर ही सीमित रहेगी तो आम निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है।

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Special court accepts CBI closure report in NSE co-location 'scam'-linked case
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

एनएसई (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) को-लोकेशन 'स्कैम' से जुड़े एक मामले में विशेष अदालत ने सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। यह मामला मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडेय की स्थापित एक कंपनी से जुड़ा था, जिसने दो स्टॉक ब्रोकर्स का ऑडिट किया था।
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क्या था पूरा मामला?
एनएसई में 'को-लोकेशन सुविधा' के तहत कुछ ब्रोकरों को अपने सर्वर सीधे एनएसई के डाटा सेंटर में लगाने की अनुमति थी। इससे उन्हें सामान्य निवेशकों और अन्य ब्रोकरों के मुकाबले तेजी से शेयर की कीमतों की जानकारी मिल जाती थी। आरोप था कि इस सुविधा का गलत इस्तेमाल हुआ और कुछ ब्रोकरों को अनुचित फायदा मिला। संजय पांडे की कंपनी आई-सेक सर्विसेज ने 2013 से 2015 के बीच दो बड़े ब्रोकरों, एसएमसी ग्लोबल और शास्त्रा सिक्योरिटीज, का ऑडिट किया था। आरोप था कि यह ऑडिट सिर्फ कागजी काम था और असल खामियों को छिपाने के लिए किया गया था।
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सीबीआई की जांच में क्या निकला?
सीबीआई ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में माना कि एसईबीआई (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) के नियमों का उल्लंघन हुआ। लेकिन एजेंसी को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे साबित हो सके कि ऑडिट जानबूझकर धांधली के इरादे से किया गया था। इससे साथ न ही यह साबित हो पाया कि इन ऑडिट खामियों के कारण शेयर बाजार में कोई गड़बड़ी जैसे सर्कुलर ट्रेडिंग या 'पंप एंड डंप' घोटाला हुआ हो। जांच में यह भी सामने आया कि उस समय एसईबीआई के पास ऐसे कड़े प्रावधान नहीं थे जिनके जरिए फोन कॉल्स या अन्य रिकॉर्ड लंबे समय तक सुरक्षित रखे जा सकें।


संजय पांडे ने 2001 में यह कंपनी बनाई थी और 2006 में डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद में कंपनी का प्रबंधन उनके परिवार के हाथ में चला गया। सीबीआई ने ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के हवाले से इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। 2023 में भी सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने और जांच करने को कहा था। अब अतिरिक्त जांच के बाद कोर्ट ने रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।

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मामले में सीबीआई ने कहा कि हालांकि कुछ नियमों का पालन नहीं हुआ, लेकिन यह धोखाधड़ी या जालसाजी की श्रेणी में नहीं आता। इसके साथ ही एजेंसी ने एसईबीआई चेयरमैन को सिफारिशें भेजी हैं कि भविष्य में ऐसी खामियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। अदालत ने इस केस में आपराधिक साजिश का कोई ठोस सबूत न मिलने पर क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी दे दी, लेकिन साथ ही यह संदेश भी दिया कि बाजार नियामकों की जिम्मेदारी महज औपचारिक नहीं बल्कि व्यवहारिक और कड़ी होनी चाहिए।
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