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रिकॉर्ड: रबी सीजन में अब तक 634 लाख हेक्टेयर में बुवाई, धान-मक्का और गेहूं में रही तेजी; जौ और चने में गिरावट

Tue, 06 Jan 2026 08:15 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 06 Jan 2026 08:15 AM IST
सार

कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी सीजन में अब तक 634.14 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल से 16.4 लाख हेक्टेयर अधिक है। गेहूं की बुवाई 6.3% बढ़कर 334.7 लाख हेक्टेयर और धान की 17.57 लाख हेक्टेयर हो गई है। दलहन की बुवाई भी बढ़कर 134.3 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है।

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Sowing completed on 634 lakh hectares during the Rabi season with strong progress in paddy maize and wheat
गेहूं - फोटो : Adobestock

विस्तार

रबी सीजन में इस बार बंपर बुवाई हुई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, 2 जनवरी तक 634.14 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। 2024-25 में समान अवधि में 617. 74 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। इस साल कुल बुवाई में 16.40 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। गेहूं की बुवाई 6.3 फीसदी अधिक हुई है। इस बार खरीफ सीजन में गेहूं की बुवाई 334.7 लाख हेक्टेयर में हो गई है।

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2024- 25 में यह 328.4 लाख हेक्टेयर थी। धान की बुवाई 14.5 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 17.57 लाख हेक्टेयर हो गई है। अधिक समय तक हुई बारिश के बाद भी मिट्टी में नमी से बुवाई बढ़ी है। दलहन की बुवाई 134.30 लाख हेक्टेयर में हुई है जो एक साल पहले 130. 87 लाख हेक्टेयर थी। चना 17.5 लाख हेक्टर में बोया जा चुका है।
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मोटे अनाज के रकबे में मामूली बढ़ोतरी
श्री अन्न यानी मोटे अनाज का रकबा 51.69 लाख हेक्टेयर रहा। पिछले साल इसी सीजन में यह 50.66 लाख हेक्टेयर था। इसमें ज्वार की बुवाई 22 लाख हेक्टेयर से घटकर 20.74 लाख हेक्टेयर रह गई है। मक्का ने रिकॉर्ड बनाया है। इसकी खेती 21. 87 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 23.32 लाख हेक्टेयर हो गई है। जौ की बुवाई मामूली गिरकर 6.78 लाख हेक्टेयर रही।

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96.30 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई
आंकड़ों के मुताबिक, तिलहनों की बुवाई 96.30 लाख हेक्टेयर रही। पिछली बार यह रकबा 93.27 लाख हेक्टेयर था। सरसों का रकबा बढ़कर 89.36 लाख हेक्टेयर, मूंगफली का रकबा घटकर 3.3 लाख हेक्टेयर रह गया है। सूरजमुखी और तिल की बुवाई में भी थोड़ी नरमी देखने को मिल रही है। बंपर बुवाई ने सरकार को पहले से ही अन्न भंडार के नियोजन के लिए कार्य योजना तैयार करने के लिए प्रेरित कर दिया है।

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