धुंध के साये में कारोबार: उत्तर भारत के 34 लाख छोटे व मंझोले कारोबारी प्रभावित, 70 लाख श्रमिक भी परेशानी में
Smog in North India: उत्तर भारत में फैला धुंध का साया अब छोटे और मंझाले कारोबारियों पर भी असर डाल रहा है। अनुमानों के अनुसार 34 लाख छोटे कारोबारी और 70 लाख श्रमिक इसकी मार झेलने को मजबूर हैं। आइए जानते हैं इस पर बाजार के जानकारों की क्या है राय।
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देश की राजधानी दिल्ली समेत पूरा उत्तर भारत इन दिनों धुंध की चपेट में है। हालात दमघोंटू होने के बाद दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रेप-4 लगाने का फैसला लिया लेकिन हालत सुधरने का नाम नहीं ले रहा। अनुमान है कि 34 लाख छोटे और मंझोले कारोबारियों को दिल्ली का धुंध भरा मौसम महंगा पड़ रहा है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत पूरी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बड़ी संख्या में कामगार भी धुंध के कारण प्रभावित हो रहे हैं। अगर हालात जल्दी नहीं बदले कारोबारियों को उत्पादन में कमी की आने की आशंका है। ऐसा हुआ तो छोटे और मंझोले कारोबारी बड़ा वित्तीय नुकसान उठाने को विवश होंगे।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने अनुमानत जताया है कि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में 34 लाख से अधिक छोटे और मंझोले कारोबारी धुंध के कारण प्रभावित हो रहे हैं। इनके अलावा करीब 70 लाख श्रमिक भी गैस चैंबर जैसे माहौल की मार झेलने को विवश है।
पाबंदियों के कारण आपूर्ति शृंखला प्रभावित, उत्पादन लागत भी बढ़ा
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष हेमंत जैन के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के चरण IV के लागू होने से निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियां रुक गई हैं, जिससे औद्योगिक संचालन में और बाधा आ रही है। उन्होंने बताया कि परिवहन क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप आपूर्ति शृंखला भी बाधित हुई है और उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है।
जैन के अनुसार लंबे समय तक धुंध के संपर्क में रहने से श्रमिकों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है, जिससे उत्पादकता घट रही है। इससे उत्पादन में देरी भी हो रही है। उद्योग जगत हालात से निपटने के लिए स्वच्छ ईंधन, वायु शोधन प्रणाली और मास्क जैसे सुरक्षात्मक उपाय अपना रहे हैं।
दिल्ली-एनसीआर और आस-पास के इलाकों की वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर
दिल्ली-एनसीआर और आस-पास के इलाकों की वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर है। इसका मुख्य कारण कारण पराली जलाने, वाहनों से निकलने वाले धूएं और निर्माण कार्य में वृद्धि को माना जा रहा है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) दिल्ली के अध्यक्ष जयदीप आहूजा के अनुसार संगठन अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान तलाशने के लिए सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
आहूजा के अनुसार सीआईआई उत्तर भारत के राज्यों के साथ मिलकर नई तकनीकों के जरिए पराली जलाने की घटनाओं को कम करने की कोशिश कर रहा है। अस्थायी राहत के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को क्लाउड सीडिंग का भी प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि, उन्होंने चेताया है कि दिल्ली-एनसीआर में लगातार वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए बहुराष्ट्रीय कंपनियों और स्टार्ट-अप यहां निवेश से हिचकिचा सकते हैं। उन्होंने धुंध के हालात में श्रमिकों की कमी से होने वाली उत्पादन हानि को मापने की आवश्यकता पर भी बल दिया और कहा कि अधिकांश क्षेत्रों में घर से काम करने का समाधान व्यवहार्य नहीं है।
30 लाख करोड़ रुपये का सकल घरेलु उत्पाद धुंध की चपेट में
अगर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद की बात करें तो मौजूदा कीमतों पर वित्तीय वर्ष 2023-24 में 30 लाख करोड़ रुपये थी। अनुमानों के अनुसार, धुंध के कारण उत्तरी राज्यों की वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है। आंकड़ों के अनुसार पंजाब में करीब 15 लाख, हरियाणा में 10 लाख और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में करीब 9 लाख छोटे कारोबारी हैं। इस तरह, इनकी कुल संख्या 34 लाख के करीब है।
वायु गुणवत्ता के खतरनाक स्तर से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ीं
मंगलवार को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई। कई एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) स्टेशनों ने अधिकतम 500 का आंकड़ा दर्ज किया, जोर "गंभीर से बुरी" श्रेणी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, आनंद विहार, जहांगीरपुरी और बवाना जैसे इलाकों में सुबह-सुबह एक्यूआई 500 का स्तर पार कर गया। वहीं, आरके पुरम और द्वारका सेक्टर 8 जैसे इलाकों में 500 के करीब का आंकड़ा दर्ज किया गया। मंगलवार क्षेत्र में घने कोहरे का लगातार सातवां दिन था, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। औद्योगिक निकायों और सरकारी एजेंसियों पर इस संकट से निपटने और अर्थव्यवस्था व सार्वजनिक कल्याण पर इसके दूरगामी प्रभावों को कम करने का दबाव बढ़ रहा है।