Smartphone Export: भारत बना दुनिया का स्मार्टफोन हब, 2025 में 30 अरब डॉलर निर्यात के मायने क्या?
भारत हाल के वर्षों में दुनिया के लिए स्मार्टफोन फैक्टरी के लिए तब्दील होता जा रहा है। भारत से 2025 में 30 अरब डॉलर के मोबाइल निर्यात किए गए। इस उपलब्धि के क्या मायने हैं, विस्तार से समझने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
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विस्तार
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की बढ़ती धमक के बारे में बताया है। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आंकड़ा साझा करते हुए बताया है कि भारत अब दुनिया के लिए स्मार्टफोन विनिर्माण का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। कैलेंडर वर्ष 2025 (जनवरी से दिसंबर) के दौरान देश का स्मार्टफोन निर्यात 30 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना का ऐतिहासिक उछाल
स्मार्टफोन के अलावा पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की तस्वीर भी बेहद सकारात्मक है। पिछले महीने वैष्णव ने बताया था कि 2025 में भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 47 अरब डॉलर (करीब 4.15 लाख करोड़ रुपये) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। साल 2014-15 से तुलना करें तो पिछले 11 वर्षों में देश के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना और उत्पादन में 6 गुना की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इन आंकड़ों के दम पर इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन चुका है।
कैसे बढ़ा मेड इन इंडिया का दबदबा?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का कुल उत्पादन 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, इस अवधि में निर्यात 0.38 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अगर केवल मोबाइल फोन विनिर्माण की बात करें तो देश ने एक लंबी छलांग लगाई है:
- वर्तमान में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल उत्पादक देश है।
- 2014-15 में देश में जहां केवल 2 मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर करीब 300 हो गई है।
- आज भारत में बिकने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन 'मेड इन इंडिया' हैं।
- पिछले 11 वर्षों में मोबाइल उत्पादन 0.18 लाख करोड़ रुपये से उछलकर 5.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि इसका निर्यात 0.01 लाख करोड़ रुपये (नगण्य) से बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
रोजगार, एमएसएमई और पीएलआई स्कीम का क्या लाभ मिला?
इस सेक्टर की तेज ग्रोथ का सीधा असर रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। लार्ज स्केल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए लाई गई पीएलआई स्कीम ने 13,475 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है, जिसके परिणामस्वरूप 9.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन हासिल हुआ है। इस औद्योगिक बूम ने देश में 25 लाख नई नौकरियां पैदा की हैं, जिनमें महिलाओं की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित हुई है और युवाओं के लिए लंबी अवधि के कौशल विकास के अवसर बने हैं। साथ ही, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए भी विकास के नए रास्ते खुले हैं।
कंपोनेंट विनिर्माण की दिशा में बढ़ रहा देश?
अभी तक सरकार का मुख्य फोकस केवल तैयार उत्पादों के निर्माण पर था। लेकिन अब नीतिगत रणनीति में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। सरकार अब मॉड्यूल्स, कंपोनेंट्स, सब-मॉड्यूल्स, कच्चे माल और इन्हें बनाने वाली मशीनों की घरेलू क्षमता विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इस अहम बदलाव को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के जरिए समर्थन दिया जा रहा है। यह कदम भविष्य में भारत को एक असेंबली हब से निकालकर पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र में बदल देगा।