आसमान छूती महंगाई : 30 लाख के होम लोन पर 905 रुपये बढ़ेगी किस्त, पांच लाख के ऑटो लोन पर अब 122 रुपये ज्यादा चुकाने होंगे
आसमान छूती महंगाई पर काबू पाने के लिए आरबीआई ने बुधवार को रेपो दर 0.50 फीसदी बढ़ा दिया है। अब बैंक भी होम, ऑटो और विभिन्न प्रकार के कर्ज महंगे करेंगे। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। उनके लिए न सिर्फ घर और कार खरीदना महंगा हो जाएगा बल्कि पहले से ज्यादा मासिक किस्त (ईएमआई) चुकानी पड़ेगी।
मान लीजिए, आपने 20 साल की अवधि के लिए 30 लाख का होम लोन लिया है तो मई के मुकाबले अब हर महीने आपकी ईएमआई 905.4 रुपये बढ़ जाएगी। हर साल आपको 10,864.80 रुपये की चपत लगेगी। अगर आपने कार खरीदने के लिए 5 साल के लिए 5 लाख रुपये का कर्ज लिया है तो रेपो दर में इस बढ़ोतरी के बाद हर महीने 122 रुपये ज्यादा मासिक किस्त देनी पड़ेगी। एक साल में यह रकम 1,464 रुपये बढ़ जाएगी।
कैड स्थायी स्तर पर
चालू खाते का घाटा (कैड) स्थायी स्तर पर रहेगा। 2021-22 की तीसरी तिमाही में यह बढ़कर जीडीपी का 2.7% हो गया था। इस दौरान देश के आयात और निर्यात में वृद्धि हुई है।
ऐसे समझें...हर महीने कितना बढ़ेगा आपकी जेब पर बोझ
होम लोन
| कर्ज की रकम | 30 लाख |
| मई में रेपो दर बढ़ने के बाद | 6.90 फीसदी पर |
| ईएमआई | 23,079.30 |
| रेपो दर 0.50 फीसदी बढ़ने के बाद | 7.40 फीसदी पर |
| ईएमआई | 23,984.70 |
कार लोन
| कर्ज की रकम | 5 लाख |
| मई में रेपो दर बढ़ने के बाद | 8.90 फीसदी पर |
| ईएमआई | 10,355 |
| रेपो दर 0.50 फीसदी बढ़ने के बाद | 9.40 फीसदी पर |
| ईएमआई | 10,477 |
महंगाई को लेकर सतर्क है सरकार : गवर्नर
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि सरकार महंगाई की मौजूदा स्थिति को लेकर सचेत है। नीतिगत दर को लेकर आगामी परिस्थितियों को देखते हुए कदम उठाया जाएगा। अब सरकार को आगे आपूर्ति पक्ष से जुड़े उन उपायों पर निर्णय लेना है, जिन्हें वे आवश्यक समझते हैं। सटीक उपाय क्या हो सकते हैं, इस पर विचार या टिप्पणी करना केंद्रीय बैंक का काम नहीं है। दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था की उत्पादक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। आर्थिक वृद्धि के लिहाज से कर्ज देने के लिए बैंकों के पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध होगी।
- गर्वनर ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने नीतिगत रुख में बदलाव करते हुए ‘उदार रुख बरकरार’ की शब्दावली को ‘प्रोत्साहन उपाय वापस लेने’ से बदला है।
- सरकार और आरबीआई के बीच हर मुद्दे पर लगातार बातचीत होती रहती है। इसमें क्रिप्टोकरेंसी जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
- आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर ने कहा कि केेंद्रीय बैंक वित्त वर्ष के अंत तक डिजिटल मुद्रा की शुरुआत के साथ सरकार की घोषणा को लागू करेगा।
डिजिटल कर्ज देने वाले अपंजीकृत एप की पुलिस में करें शिकायत
दास ने कहा, डिजिटल ऋण देने वाले अपंजीकृत एप से कर्ज लेने वाले ग्राहकों को किसी भी तरह की समस्या होने पर स्थानीय पुलिस से संपर्क करना चाहिए। ऐसे एप आरबीआई के साथ पंजीकृत नहीं हैं। वह स्वयं ही संचालित हैं। केंद्रीय बैंक सिर्फ पंजीकृत संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई करेगा। ऐसे संस्थाओं की सूची आरबीआई की वेबसाइट पर है।
भारत अन्य देशों से बेहतर स्थिति में : सीईए
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अनंत नागेश्वरन ने कहा कि मध्यम अवधि के लिहाज से अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। भारत अन्य देशों के मुकाबले आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कहा, आप महंगाई की मौजूदा चिंता को छोड़कर देखें तो भारत वित्तीय प्रणाली के बूते पिछले दशक से बाहर आया है। बैंकों और वित्तीय क्षेत्र का बही-खाता सुधरा है। कॉरपोरेट क्षेत्र की स्थिति भी बेहतर हुई है।
आरबीआई और सरकार महंगाई को काबू में लाने एवं वृद्धि को गति देने के लिए कदम उठा रहे हैं। घरेलू स्तर पर चुनौतियां हैं, जिनकी वजह वैश्विक स्थिति है। चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए जाते हैं। -अजय सेठ, सचिव, डीईए
सरकारी नीतियों से महामारी से उबरने में मिली मदद : वित्तमंत्री
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार की नीतियों और उठाए गए सक्रिय कदमों से देश को महामारी के कारण पैदा हुई स्थिति से उबरने में मदद मिली। इन कदमों में कॉरपोरेट कर में कटौती, जीएसटी, आईबीसी कोड और अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण जैसे उपाय शामिल हैं। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत विशेष सप्ताह समारोह में उन्होंने कहा कि भारत ने अपने मजबूत बुनियादी ढांचे के साथ कई चुनौतियों का सामना किया और सफलता पाई। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में कोरोना महामारी के बावजूद भारतीय खुदरा निवेशकों ने शेयर बाजार तक पहुंचने के लिए ऑनलाइन साधन खोजे हैं। निवेशक शिक्षा में बाजार नियामक सेबी की अहम भूमिका रही है।
रेपो दर में वृद्धि से मकानों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। रियल्टी उद्योग ने कहा, ब्याज दरों में आधा फीसदी और मई में 0.4% वृद्धि से होम लोन 0.90 फीसदी महंगा हो जाएगा। इससे लोग मकान खरीदने का फैसला टाल सकते हैं।
वैसे ब्याज दरें 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से काफी कम हैं। उस समय ब्याज दर 12 फीसदी हुआ करती थी, जो अब 7 फीसदी के आसपास है। हाउसिंग क्षेत्र में लोग अब भी निवेश के रूप में पैसा नहीं लगाते हैं बल्कि रहने के लिए मकान खरीदने पर जोर देते हैं। -अनुज पुरी चेयरमैन, एनारॉक
होम लोन महंगे होने, प्रॉपर्टी को विकसित करने की लागत बढ़ने और कीमतों के दबाव का असर मकान खरीदारों की धारणा को प्रभावित करेगा। -शिशिर बैजल, चेयरमैन, नाइट फ्रैंक
बैंकरों ने रेपो दर में बढ़ोतरी के फैसले को सराहा
नीतिगत दरों में वृद्धि बढ़ती अनिश्चितताओं का व्यापक आकलन है। रुपे क्रेडिट कार्ड को यूपीआई से जोड़ने से वित्तीय समावेशन के साथ ग्राहकों को सुविधा मिलेगी। -दिनेश खारा, अध्यक्ष, एसबीआई
रेपो दर में वृद्धि उम्मीद के अनुरूप है। सभी तिमाहियों के लिए महंगाई का अनुमान 5% से ऊपर हैं। इसलिए कीमतों में स्थिरता लाना जरूरी है। -एके गोयल, चेयरमैन, आईबीए
मार्च तक 5.75 फीसदी तक पहुंचेगी रेपो दर
एसबीआई का कहना है कि मार्च, 2023 तक आरबीआई रेपो दर को बढ़ाकर 5.75 तक पहुंचा सकता है। यह कोरोना पूर्व स्तर के बराबर होगी। अगस्त में रेपो दर बढ़कर 5.25 फीसदी और अक्तूबर में 5.5 फीसदी हो सकती है।
महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए यह कदम जरूरी था। हालांकि, बैंकिंग सिस्टम में अब भी तरलता काफी है। -सुनील कुमार सिन्हा मुख्य अर्थशास्त्री, इंडिया रेटिंग
महंगाई को देखते हुए आगे प्रमुख नीतिगत दरों में और ज्यादा इजाफा होने का अनुमान है। एमपीसी की होने वाली अगली दो बैठकों में रेपो दर में 0.35 और 0.25 फीसदी का इजाफा हो सकता है। -अदिति नायर, मुख्य अर्थशास्त्री, इक्रा