अर्थव्यवस्था: जीडीपी में लगातार गिर रहा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का हिस्सा, करोड़ों लोगों की बेरोजगारी का कारण बनी ये आर्थिक सुस्ती
वर्ष 2015 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का जीडीपी में कुल योगदान लगभग 15 फीसदी से ज्यादा, अब गिरकर 12.93 फीसदी से भी नीचे, शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी का सबसे बड़ा कारण मान रहे विशेषज्ञ...
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देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लगातार गिरावट आ रही है। वर्ष 2015 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का देश की जीडीपी में कुल योगदान लगभग 15 फीसदी से ज्यादा था जो अब गिरकर 13 फीसदी से भी नीचे आ चुका है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दो फीसदी से ज्यादा की कमी का अर्थ लगभग तीन लाख करोड़ रुपये के सकल उत्पादन में कमी के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इसके कारण निर्माण क्षेत्र के साथ-साथ अन्य प्रमुख क्षेत्रों में लाखों नौकरियों की कमी के रूप में भी सामने आता है और बेरोजगारी बढ़ती है। वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर सात फीसदी हो चुकी है। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 8.2 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 6.5 फीसदी दर्ज की गई है।
कब कितना रहा निर्माण क्षेत्र का योगदान
विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, देश के निर्माण क्षेत्र में वर्ष 2010 से ही लगातार कमी आ रही है। 2010 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का जीडीपी में कुल योगदान 17 फीसदी से भी अधिक था जो लगातार घटता गया। 2012 में यह लगभग 16 फीसदी पर आ गया तो 2014 में 15 फीसदी रह गया। इसके बाद एक बार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बढ़ोतरी दर्ज हुई और यह 2016 में लगभग 15.50 तक पहुंच गया, लेकिन इसके बाद यह लगातार कम हो रहा है।
2018 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का देश की जीडीपी में योगदान 15 फीसदी से नीचे आ गया और 2020 में यह 12.96 फीसदी पर पहुंच गया है। निर्माण क्षेत्र में आ रही कमी सीधे बेरोजगारी को बढ़ा रही है। इसके कारण लोगों की क्रय शक्ति कम हो रही है और बाजार में मांग नहीं बढ़ रही है। यह पूरी अर्थव्यवस्था की सुस्ती का कारण भी बना हुआ है।
कामकाजी लोगों में आ रही कमी
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आ रही गिरावट का सीधा संबंध कामकाजी लोगों की संख्या में आ रही कमी के रूप में भी देखा जा सकता है। 2012 में देश की कुल आबादी में कामकाजी लोगों की संख्या लगभग 50.8 फीसदी थी जो 2014 में 49.9 फीसदी तक आ गई। 2016 में देश के कामकाजी लोगों की संख्या गिरकर 47.8 फीसदी तक पहुंच गई। 2018-19 में कामकाजी लोगों की संख्या 47.3 फीसदी तक पहुंच गई। इस दौरान नौजवानों के कुल रोजगार में भागीदारी में कमी आना बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है।
क्यों आ रही कमी
विशेषज्ञों के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आ रही कमी को पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों, स्टील-सीमेंट सहित सभी धातुओं के मूल्यों में वृद्धि सहित अन्य प्रमुख सामग्रियों की बढ़ती कीमतों के रूप में देखा जा सकता है। कोरोना काल ने बंद हुए उद्योगों की मार को बढ़ा दिया है। नोटबंदी के बाद से अब तक उद्योगों के पास नकदी की कमी को दूर नहीं किया जा सका है। यह भी उद्योगों के गति न पकड़ने का सबसे बड़ा कारण है।
कैसे दूर होगी यह कमी
आर्थिक मामलों के जानकार और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि उद्योग जगत के सामने नकदी की उपलब्धता बड़ा संकट थी, लेकिन सरकार ने तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का सस्ता और आसान कर्ज उपलब्ध कराकर इस संकट को दूर करने का काम किया है। कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियां सुस्त पड़ी थीं, लेकिन जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था खुली है, इसमें गति आ रही है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि देश की अर्थव्यवस्था जल्द ही गति पकड़ेगी और नौकरियों का संकट भी खत्म होगा।