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Share Market: क्या शेयर बाजार में फिर आएगी गिरावट? ईसीबी के इस फैसले से भाग सकते हैं विदेशी निवेशक

Thu, 08 Sep 2022 07:50 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 08 Sep 2022 07:50 PM IST
सार

Share Market: आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि अमेरिका-यूरोपीय केंद्रीय बैंकों के द्वारा नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ सकता है। इससे विदेशी निवेशक एक बार फिर विदेशी बाजारों का रुख कर सकते हैं। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ना तय है...

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Share Market: Policy rate hike by ECB could scared foreign investors
Share Market - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) ने महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए नीतिगत जमा दरों में अप्रत्याशित 75 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी है। ईसीबी के इस निर्णय को एतिहासिक बताया जा रहा है और अनुमान है कि आने वाले दिनों में नीतिगत दरों में और ज्यादा बढ़ोतरी की जा सकती है। अमेरिकी सेंट्रल बैंक ने पहले ही नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का रुख अपनाया हुआ है। आने वाले दिनों में अमेरिकी सेंट्रल बैंक भी नीतिगत दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ सकता है। इससे विदेशी निवेशक एक बार फिर विदेशी घरेलू बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर बड़ी गिरावट हो सकती है। इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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पूरी दुनिया में ज्यादातर देश महंगाई की मार से जूझ रहे हैं। महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए नीतिगत दरों को बढ़ाकर बाजार से तरलता घटाने को इससे निपटने का आजमाया हुआ तरीका माना जाता है। इसी कारण दुनिया के ज्यादातर बैंक नीतिगत दरों को बढ़ाकर महंगाई पर नियंत्रण करने की नीति अपनाए हुए हैं। अमेरिका के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी पॉलिसी रेट्स में बढ़ोतरी की थी। अब यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने भी नीतिगत दरों में बढ़ोतरी कर दी है। माना जा रहा है कि इन बैंकों के द्वारा जल्द ही दोबारा नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है।  

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यूरोप में बनी रहेगी महंगाई

ईसीबी का अनुमान है कि यूरोपीय देशों में आने वाले समय में भी महंगाई की औसत दर 8.1 फीसदी रह सकती है। अगले वर्ष महंगाई में कुछ राहत मिलने के आसार हैं, लेकिन इसके बाद भी यह 5.5 फीसदी बनी रह सकती है, जो आम आदमी की जिंदगी को परेशानी में डालने वाली रहेगी। हालांकि, इसके अगले वर्ष यानी 2024 तक महंगाई पर नियंत्रण पाने का अनुमान लगाया गया है। 2024 तक महंगाई दर घटकर 2.3 फीसदी तक रह सकती है।

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भारत पर क्या पड़ेगा असर

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि अमेरिका-यूरोपीय केंद्रीय बैंकों के द्वारा नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ सकता है। विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों में कमजोर रिटर्न को देखते हुए विदेशी बाजारों का रुख करना शुरू कर दिया था। लेकिन भारत में महंगाई के नियंत्रण में आने और शेयर बाजार में स्थिरता बने रहने के कारण वे शीघ्र ही लौट आए। लेकिन जिस प्रकार से यूरोपीय बैंक ने अब तक की नीतिगत दरों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी की है, इससे विदेशी निवेशक एक बार फिर विदेशी बाजारों का रुख कर सकते हैं। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ना तय है।

जीडीपी ग्रोथ में भी कमी का अनुमान

यूरोपीय अर्थव्यवस्था महंगाई की तगड़ी मार झेल रही है। रूस की रणनीतिक चालों के कारण इन बाजारों में तेल-गैस कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है और उसकी जीडीपी ग्रोथ कम हो रही है। ईसीबी ने अपने पूर्व के अध्ययन में 2022 में जीडीपी में 2.1 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था, लेकिन नए अनुमानों में इसे एक फीसदी से भी नीचे केवल 0.9 फीसदी तक रह जाने का अनुमान लगाया गया है। कई देशों में नकारात्मक वृद्धि होने का अनुमान भी लगाया जा रहा है।

भारत के निर्यात पर पड़ेगा असर

अमेरिका और यूरोपीय बाजार भारत के बड़े बिजनेस पार्टनर हैं। इन देशों को भारतीय सामानों की बड़ी मात्रा का निर्यात किया जाता है। लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि महंगाई और कमजोर जीडीपी ग्रोथ के कारण इन देशों में आम आदमी की क्रय शक्ति में कमी आएगी और भारतीय उत्पादों की मांग घट सकती है। भारत के लिए केवल संतोष करने वाली बात यह है कि इसी बीच चीन में कोरोना की मार दोबारा तेज हो चुकी है और उसके कई बाजारों में अभी भी उत्पादन नहीं हो पा रहा है। चीन के दूसरे बाजारों में भी सप्लाई चेन टूट रही है। इससे चीनी वस्तुओं का निर्यात नहीं हो पा रहा है, जिसका लाभ भारत को मिल सकता है।

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