वैश्विक मंदी की कोई स्थिति नहीं, घट सकती हैं रेपो दर: शक्तिकांत दास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव के चलते चिंताएं तो हैं लेकिन वैश्विक मंदी की कोई स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत अर्थव्यवस्था में लगातार सकारात्मक घटनाक्रम हो रहे हैं, जिससे सुस्ती से पार पाना आसान हो जाएगा।
ब्लूमबर्ग इंडिया इकोनॉमिक फोरम 2019 में अपने संबोधन में दास ने कहा कि जीडीपी की तुलना में महज 19.7 फीसदी कर्ज के साथ भारत दुनिया के सबसे कम कर्ज वाले देशों में से एक है।
आयात-निर्यात में हो रहा सुधार
जीडीपी की तुलना में भारत के आयात और निर्यात में सुधार हो रहा है। हालांकि बाह्य क्षेत्र प्रबंधन के मामले में चिंता के कई क्षेत्र हैं। उन्होंने मौजूदा सुस्ती के लिए मांग और निवेश में कमी को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन उन्होंने सरकार के पास वित्तीय प्रोत्साहन के लिए सीमित गुंजाइश होने की भी बात कही।
विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद
उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य चुनौतीपूर्ण है। वैश्विक वृद्धि दर घट रही है और केंद्रीय बैंक इससे उबरने के लिए लगातार मौद्रिक नीति में नरमी ला रहे हैं। हालांकि यह कोई मंदी नहीं है।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि यूएस फेड के ब्याज दर घटाने के फैसले से विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के मसले पर उन्होंने कहा कि हाल में क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई पर खास असर नहीं पड़ेगा।
घट सकती हैं रेपो दर
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि विकास को गति देने के लिए दर में आगे कटौती की ‘गुंजाइश’ बनी हुई है और आगे एक साल तक महंगाई के लक्ष्य के नीचे स्थिर रहने की संभावना है। आरबीआई इस साल अभी तक रेपो दर में 110 आधार अंकों यानी 1.10 फीसदी की कमी कर चुका है।