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Service Sector: सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में 13 साल की दूसरी सबसे बड़ी तेजी, मजबूत मांग से दिखी वृद्धि

Tue, 06 Jun 2023 05:55 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 06 Jun 2023 05:55 AM IST
सार

एसएंडपी ग्लोबल इंडिया सेवा पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक पिछले महीने घटकर 61.2 रह गया। अप्रैल, 2023 में यह 62 था।

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Services sector activity picks up second fastest in 13 years, boosted by strong demand
S&P Global - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मांग की अनुकूल स्थितियों और नए ग्राहकों की मदद से सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में मई, 2023 में 13 साल की दूसरी सबसे बड़ी तेजी रही। इस दौरान सेवा क्षेत्र में वृद्धि की रफ्तार अप्रैल, 2023 के मुकाबले कम रही।

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एसएंडपी ग्लोबल इंडिया सेवा पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक पिछले महीने घटकर 61.2 रह गया। अप्रैल, 2023 में यह 62 था। इस गिरावट के बावजूद सेवा क्षेत्र के उत्पादन में जुलाई, 2010 के बाद दूसरी सबसे तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। यह लगातार 22वां महीना है, जब सेवा खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) 50 से ऊपर है। पीएमआई का 50 से अधिक रहना गतिविधियों में विस्तार और इससे नीचे का आंकड़ा सुस्ती का संकेत है। एसएंडपी ग्लोबल इंडिया कंपोजिट पीएमआई उत्पादन सूचकांक अप्रैल, 2023 की तरह मई, 2023 में भी बिना किसी बदलाव के 61.6 रहा।
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उत्पादन और रोजगार सृजन में बढ़ोतरी
एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस में संयुक्त निदेशक (अर्थशास्त्र) पॉलियाना डी लीमा ने कहा कि मई के पीएमआई आंकड़े मौजूदा मांग में लचीलापन और प्रभावशाली उत्पादन वृद्धि को दर्शाते हैं। इससे यह भी पता चलता है कि भारत के गतिशील सेवा क्षेत्र में रोजगार सृजन हुआ है।

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  • लीमा का कहना है कि सर्वे में शामिल कंपनियों ने नई मांग को पूरा करने के लिए अपने कार्यबल का विस्तार किया।
  • मजबूत मांग और अनुकूल हालात को देखते हुए कंपनियों में अगले 12 महीनों में कारोबारी गतिविधियों में बढ़ोतरी को लेकर उत्साह है।

...तो प्रभावित हो सकता है आर्थिक विकास
लीमा का कहना है कि उत्पादन लागत में बढ़ोतरी खरीद शक्ति को कम करने के साथ सेवाओं के शुल्क को प्रभावित कर सकती है। इससे मांग पर विपरीत असर पड़ेगा। कुल मिलाकर, लगातार बढ़ती लागत संभावित रूप से आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकती है। साथ ही, इन चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनियां वैकल्पिक विकल्प की तलाश कर सकती हैं।

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