बाजार का 'रोलर-कोस्टर' हफ्ता: वैश्विक तनाव के बावजूद सेंसेक्स में 4000 अंकों से अधिक का उछाल, समझें गुणा-गणित
तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 918.60 अंक या 1.20 फीसदी की बढ़त के साथ 77,550.25 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार के दौरान यह 990.85 अंक या 1.29 फीसदी उछलकर 77,622.50 के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 275.50 अंक या 1.16 फीसदी चढ़कर 24,050.60 पर समाप्त हुआ। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बाजार की चाल के बारे में विस्तार से जानने के लिए पढ़ें।
विस्तार
शेयर बाजार में 6 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ कारोबारी हफ्ता भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक 'रोलर-कोस्टर' राइड के रूप में दर्ज हो गया है। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बावजूद, बाजार ने जिस तरह वापसी की, वह किसी चमत्कार से कम नहीं। अगर आप एक आम निवेशक हैं, तो आपके लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि इस हफ्ते बाजार ने 73,000 के गोते से लेकर ऐतिहासिक 77,500 तक की उड़ान कैसे भरी?
आइए पूरे हफ्ते में बाजार की चाल और इससे जुड़े गुणा-गणित को सवालों और जवाबों के जरिए आसान भाषा में समझते हैं।
सवाल: सोमवार से शुक्रवार तक बीएसई सेंसेक्स की चाल कैसी रही?
जवाब: इस हफ्ते बाजार की चाल पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय खबरों और कूटनीतिक बयानों से तय हुई। सोमवार, 6 अप्रैल को बाजार भारी दहशत में खुला, जहां सेंसेक्स 73,477.53 पर खुला और शुरुआती कारोबार में ही 72,728.66 के दैनिक निचले स्तर पर जा गिरा। लेकिन दोपहर बाद अमेरिका-ईरान युद्धविराम की अफवाहों से सेंसेक्स रिकवर होकर 74,106.85 पर बंद हुआ। मंगलवार (7 अप्रैल) को यह बढ़त जारी रही और सेंसेक्स 74,616.58 पर पहुंच गया। बुधवार, 8 अप्रैल बाजार के लिए सबसे ऐतिहासिक दिन रहा, जब दो हफ्ते के सशर्त युद्धविराम की घोषणा पर सेंसेक्स 2,946 अंकों (करीब 4%) की लंबी छलांग के साथ 77,562.90 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, गुरुवार (9 अप्रैल) को इस्राइल की ओर से लेबनान में हमले के बाद फिर से 931.25 अंकों की तेज गिरावट आई और सेंसेक्स 76,631.65 पर बंद हुआ।
हफ्ते के आखिरी करोबारी दिन बाजार के बेंचमार्क सूचकांक कहां बंद हुए?
शुक्रवार, 10 अप्रैल को बैंकिंग और ऑटो शेयरों में फिर से भारी खरीदारी के दम पर सेंसेक्स 918.60 अंक (1.20%) उछलकर 77,550.25 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी भी सोमवार के 22,600 के निचले स्तर से उड़ान भरकर शुक्रवार को 24,050.60 के ऐतिहासिक आंकड़े पर बंद हुआ। इस तरह पूरे हफ्ते के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 4,745.57 (6.52%) अंकों की बढ़त के साथ 77,550.25 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी 275.50 (1.16%) अंक चढ़कर 24,050.60 पर पहुंच गया।
#हफ्ते के दौरान बीएसई सेंसेक्स का चार्ट
सवाल: बाजार में आए इतने बड़े उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह क्या थी?
जवाब: इस पूरी उठापटक के केंद्र में पश्चिम एशिया (विशेषकर ईरान, इस्राइल और अमेरिका) का भू-राजनीतिक संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य का अवरोध था। युद्ध के डर से ब्रेंट क्रूड ऑयल 118-120 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर गया था, जिससे भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति का डर पैदा हो गया था। लेकिन 8 अप्रैल को जैसे ही युद्धविराम की खबर आई, ब्रेंट क्रूड 16% गिरकर 94.36 डॉलर पर आ गया, जिससे बाजार में 2900 से ज्यादा अंकों की ऐतिहासिक राहत रैली आई। इसके अलावा, घबराहट में भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले 95.30 के सर्वकालिक निचले स्तर पर चला गया था, लेकिन रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आक्रामक हस्तक्षेप से यह 10 अप्रैल को संभलकर 92.45 पर आ गया, जिससे निवेशकों का भरोसा लौटा।
सवाल: विदेशी निवेशक लगातार शेयर बेच रहे थे, तो बाजार 77 हजार के पार कैसे पहुंच गया?
जवाब: यह घरेलू खुदरा निवेशकों और उनके 'सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान' (एसआईपी) की ताकत का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस हफ्ते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफआईआई) ने जमकर बिकवाली की। 6 अप्रैल को उन्होंने 8,692.11 करोड़ रुपये, 8 अप्रैल की ऐतिहासिक तेजी वाले दिन 2,811.97 करोड़ रुपये और 9 अप्रैल को 1,711.19 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। लेकिन इसके ठीक उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बाजार को गिरने से बचा लिया। जब विदेशी निवेशक शेयर डंप कर रहे थे, तब डीआईआई यानी घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 6 अप्रैल को 7,979.5 करोड़ रुपये और 8 अप्रैल को 4,168.17 करोड़ रुपये की आक्रामक शुद्ध खरीदारी की। शुक्रवार 10 अप्रैल को भी घरेलू निवेशकों ने 955.90 करोड़ रुपये के स्टॉक खरीदे। इसी मजबूत घरेलू पूंजी ने विदेशी बिकवाली के सुनामी को रोक लिया।
सवाल: उठापटक के बीच किन सेक्टर्स और शेयरों में सबसे ज्यादा एक्शन देखने को मिला?
जवाब: संकट के इस दौर में धातु और खनन क्षेत्र सबसे बड़े आउटपरफॉर्मर बनकर उभरे, क्योंकि वैश्विक रसद बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक धातुओं की कीमतें बढ़ गईं। हिंडाल्को और टाटा स्टील जैसे शेयरों में भारी खरीदारी हुई। बैंकिंग क्षेत्र ने भी बाजार को सहारा दिया। मजबूत ऋण वृद्धि की उम्मीदों पर बैंक निफ्टी 8 अप्रैल को 55,703.9 के स्तर तक पहुंच गया था। शुक्रवार को एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एक्सिस बैंक और एसबीआई प्रमुख गेनर रहे। इसके विपरीत आईटी शेयरों में टीसीएस, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसी कंपनियों में मुनाफावसूली हावी रही। वहीं, वैश्विक अनिश्चितता के डर से सोने में सुरक्षित निवेश बढ़ा और 8 अप्रैल को सोना 1,50,448 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जो बाद में 1,50,920 रुपये तक हो गया।
सवाल: विश्व बैंक और अन्य संस्थानों के अनुमानों में निवेशकों के लिए क्या इशारा है?
जवाब: विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध और महंगी ऊर्जा के कारण वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 7.6% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है। इसके बावजूद, भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक फंडामेंटल मजबूत हैं और यह सबसे तेजी से बढ़ने वाली उभरती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। जानकारों के मुताबिक, निवेशकों को अब बहुत सावधानी और चयनात्मकता बरतनी चाहिए। बाजार में अभी ऐसे शेयरों की तलाश करें जिनकी बैलेंस शीट मजबूत हो और जो महंगाई व बढ़ी हुई लागत के बावजूद ग्राहकों तक बोझ डालने की क्षमता रखते हों। ग्लोबल टेंशन पूरी तरह खत्म होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, इसलिए मजबूत घरेलू पूंजी के सहारे 'बाय-ऑन-डिप्स' (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति ही भारतीय निवेशकों के लिए कारगर साबित हो रही है।