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Adani: 'सेबी ने जरूरी तथ्य छिपाए और शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई', याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में ये कहा
Mon, 11 Sep 2023 08:03 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Mon, 11 Sep 2023 08:03 PM IST
सार
Adani Row: सेबी ने 25 अगस्त को शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि उसने अदाणी समूह के खिलाफ दो आरोपों को छोड़कर सभी आरोपों की जांच पूरी कर ली है और समूह में निवेश करने वाली विदेशी इकाइयों के वास्तविक मालिकों के बारे में पांच कर पनाहगार देशों से अब भी सूचना का इंतजार है।
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विस्तार
अदाणी-हिंडनबर्ग विवाद में जनहित याचिका दायर करने वालों में से एक ने शीर्ष अदालत में आरोप लगाया है कि बाजार नियामक सेबी ने उच्चतम न्यायालय से महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया और अदाणी की कंपनियों की ओर से कथित स्टॉक हेरफेर पर राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के पत्र को नजरअंदाज कर दिया।
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शीर्ष अदालत अदाणी-हिंडनबर्ग विवाद पर चार जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिनमें वकील एमएल शर्मा और विशाल तिवारी, कांग्रेस नेता जया ठाकुर और कानून की छात्रा अनामिका जायसवाल याचिकाकर्ता हैं।
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सेबी ने 25 अगस्त को शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि उसने अदाणी समूह के खिलाफ दो आरोपों को छोड़कर सभी आरोपों की जांच पूरी कर ली है और समूह में निवेश करने वाली विदेशी इकाइयों के वास्तविक मालिकों के बारे में पांच कर पनाहगार देशों से अब भी सूचना का इंतजार है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने उच्चतम न्यायालय को सौंपी स्थिति रिपोर्ट में कहा कि वह जिन 24 मामलों की जांच कर रहा है, उनमें से 22 में जांच पूरी हो गई है।
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अनामिका जायसवाल ने शीर्ष अदालत में दायर हलफनामे में कहा है कि ओवर इनवॉयसिंग मामले में अदाणी समूह के खिलाफ जांच चल ही रही थी। जिसमें राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने 2014 में तत्कालीन सेबी अध्यक्ष को एक पत्र भेजकर उन्हें सतर्क किया था कि समूह बिजली उपकरणों के आयात में अधिक मूल्यांकन के तरीके का उपयोग करके कथित तौर पर गबन किए गए धन का उपयोग करके शेयर बाजार में हेरफेर कर सकता है। हलफनामे में दावा किया गया है कि पत्र के साथ एक सीडी भी थी जिसमें 2,323 करोड़ रुपये की हेराफेरी के सबूत थे और डीआरआई की ओर से जांच किए जा रहे मामले पर दो नोट थे।
हलफनामे में कहा गया है कि पत्र में यह भी कहा गया है कि डीआरआई की मुंबई जोनल इकाई से और दस्तावेज प्राप्त किए जा सकते हैं। याचिकाकर्ता ने कहा है कि सेबी ने न केवल इस अदालत से महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है और डीआरआई के अलर्ट पर सुस्ती दिखाई है, बल्कि सेबी की ओर से अदाणी की जांच करने में हितों का भी स्पष्ट टकराव है।
हलफनामे में कहा गया है, "सिरिल श्रॉफ मैनेजिंग पार्टनर सिरिल अमरचंद मंगलदास कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सेबी की समिति के सदस्य रहे हैं, जो इनसाइडर ट्रेडिंग जैसे अपराधों को देखती है।' हलफनामे में कहा गया है कि उनकी बेटी की शादी गौतम अदाणी के बेटे से हुई है। हलफनामे में कहा गया है कि यह स्पष्ट रूप से हितों के टकराव को दर्शाता है।"
याचिकाकर्ता ने कहा कि सेबी की 24 जांच रिपोर्टों में से पांच अदाणी समूह की कंपनियों के खिलाफ इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों पर हैं। एक पत्रकार संघ 'संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग परियोजना' की जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों का हवाला देते हुए हलफनामे में कहा गया है कि मॉरीशस स्थित दो कंपनियों- इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड (ईआईएफएफ) और ईएम रिसर्जेंट फंड (ईएमआरएफ) ने 2013 और 2018 के बीच अदाणी की चार कंपनियों के शेयरों में बड़ी मात्रा में निवेश और कारोबार किया था।
जायसवाल ने हलफनामे में दावा किया है, "इन दोनों कंपनियों के नाम सेबी की 13 संदिग्ध विदेशी पोर्टफोलियो निवेश/विदेशी इकाइयों की सूची में शामिल हैं, लेकिन सेबी उनके अंतिम लाभकारी मालिकों या आर्थिक हित वाले शेयरधारकों का पता लगाने में असमर्थ रहा है।"
याचिकाकर्ता ने कहा कि सेबी की ओर से नियमों और परिभाषाओं में बार-बार किए गए संशोधनों से अदाणी समूह को फायदा हुआ है। इन संशोधनों ने वास्तव में अदाणी समूह को एक ढाल और एक बहाना प्रदान किया है, जिसके कारण उनके नियामक उल्लंघन और कीमतों में हेरफेर का पता नहीं चल पाया है।