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सेबी का बड़ा फैसला: अब ₹10,000 में खरीदें कॉर्पोरेट बॉन्ड्स; रिटेल निवेशकों के लिए डेट मार्केट के खुले द्वार

Thu, 18 Dec 2025 08:18 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 18 Dec 2025 08:18 PM IST
सार

शेयर बाजार नियामक सेबी ने लिया बड़ा फैसला। अब मात्र 10,000 में निवेश करने का रास्ता साफ। कॉर्पोरेट और जीरो-कूपन बॉन्ड्स के मामले में दूट। जानें कैसे सेबी के इस नए नियम से रिटेल निवेशकों के लिए डेट मार्केट में निवेश पर असर पड़ेगा।

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Sebi relaxes norms, allows issuers to sell debt securities at lower face value of Rs 10000
सेबी। - फोटो : ANI

विस्तार

सेबी ने ऋण बाजार में छोटे निवेशकों की मौजूदगी बढ़ाने के लिए एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। बाजार नियामक ने गुरुवार को इससे जुड़े नियमों में ढील दी है। इन बदलावों के बाद अब कंपनियां अपनी ऋण प्रतिभूतियों को मात्र 10,000 रुपये के अंकित मूल्य पर जारी कर सकेंगी। सबसे खास बात यह है कि इस दायरे में अब 'जीरो-कूपन' इंस्ट्रूमेंट्स को भी शामिल कर लिया गया है, बशर्ते उनकी मैच्योरिटी अवधि निश्चित हो और उनमें कोई जटिल शर्तें न जुड़ी हों।

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क्या है नया सर्कुलर?

सेबी की ओर से जारी ताजा सर्कुलर के अनुसार, अब जारीकर्ता  ऐसी ऋण प्रतिभूतियां ला सकते हैं जिनकी फेस वैल्यू कम हो। ये प्रतिभूतियां या तो ब्याज देने वाली हो सकती हैं या फिर जीरो-कूपन वाली।

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इससे पहले, जुलाई 2024 में सेबी ने कंपनियों को बॉन्ड या गैर-परिवर्तनीय प्रतिदेय वरीयता शेयरों (NCRPS) को एक लाख रुपये के बजाय 10,000 रुपये की कम फेस वैल्यू पर जारी करने की अनुमति दी थी। हालांकि, उस समय यह छूट केवल उन प्रतिभूतियों तक सीमित थी जो नियमित ब्याज या लाभांश का भुगतान करती थीं।

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जीरो-कूपन बॉन्ड का मामला

बाजार विशेषज्ञों ने नियामक का ध्यान इस ओर दिलाया था कि 'जीरो-कूपन बॉन्ड' नियमित ब्याज नहीं देते, बल्कि इन्हें 'डिस्काउंट' पर जारी किया जाता है और 'फेस वैल्यू' पर भुनाया जाता है। उदाहरण के तौर पर, 10,000 रुपये का बॉन्ड 9,200 रुपये में खरीदा जा सकता है और मैच्योरिटी पर निवेशक को पूरे 10,000 रुपये मिलते हैं। बीच का अंतर ही निवेशक की कमाई होती है। बाजार की इस जरूरत को समझते हुए, सेबी ने अब 10,000 रुपये की न्यूनतम सीमा में इन जीरो-कूपन बॉन्ड्स को भी जगह दे दी है।

रिटेल निवेशकों और बाजार के लिए इसके मायने

अब तक कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में मुख्य रूप से बड़े संस्थानों जैसे एचएनआई और संस्थागत निवेशकों का ही दबदबा था।  क्योंकि टिकट साइज (न्यूनतम निवेश)1 लाख रुपये या उससे अधिक होता था। अब 10,000 रुपये की सीमा होने से एक आम नौकरीपेशा व्यक्ति भी अपने पोर्टफोलियो में फिक्स्ड डिपॉजिट के अलावा कॉरपोरेट बॉन्ड्स शामिल कर सकेगा। 

पोर्टफोलियो में विविधता

रिटेल निवेशक अक्सर केवल इक्विटी (शेयर बाजार) या म्यूचुअल फंड तक सीमित रहते हैं। डेट मार्केट में आसान पहुंच उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच एक स्थिर रिटर्न का विकल्प देगी। जीरो-कूपन बॉन्ड्स उन लोगों के लिए बेहतरीन हैं जो नियमित आय के बजाय लंबी अवधि में पूंजी की वृद्धि चाहते हैं।

बाजार में बढ़ेगी लिक्विडिटी

जब छोटे निवेशक बड़ी संख्या में बाजार में आते हैं, तो सेकेंडरी मार्केट में बॉन्ड्स की खरीद-बिक्री आसान हो जाती है। इससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है, जिससे कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना और निवेशकों के लिए समय से पहले बाहर निकलना आसान हो जाता है।

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