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Yes Bank Case: सुप्रीम कोर्ट से राणा कपूर की जमानत याचिका खारिज, सरकार से पूछा- जांच में इतनी देरी क्यों?

Fri, 04 Aug 2023 01:04 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 04 Aug 2023 01:04 PM IST
सार

Yes Bank Case: सुप्रीम कोर्ट ने यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को हिलाकर रख दिया। यस बैंक मुश्किल में चला गया और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को निवेशकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाना पड़ा। पीठ ने कहा, ''आपको उन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर लेना होगा जिनमें बड़ी गड़बड़ी हुई है और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। अगर ईडी की जांच में इतना समय लग रहा है तो इसमें कुछ गलत है।"

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SC rejects YES Bank founder Rana Kapoor's bail in money laundering case
यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर। - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर की जमानत याचिका खारिज कर दी। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले ने 'पूरी बैंकिंग प्रणाली को हिलाकर रख दिया।' अदालत ने यह भी सवाल किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) 3,642 करोड़ रुपये के यस बैंक घोटाले की जांच में इतना समय क्यों ले रहा है?

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कोर्ट ने कहा, "इस मामले ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को हिलाकर रख दिया। यस बैंक मुश्किल में चला गया और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को निवेशकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाना पड़ा।" पीठ ने कहा, ''आपको उन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर लेना होगा जिनमें बड़ी गड़बड़ी हुई है और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। अगर ईडी की जांच में इतना समय लग रहा है तो इसमें कुछ गलत है।
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इसके जवाब में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ने कहा, "सैकड़ों मुखौटा कंपनियां हैं. जांच में लंबा समय लग रहा है क्योंकि हम विदेशों से जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।" इस बीच, राणा कपूर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से कहा, "बैंक को मुश्किल डाल दिया गया गया था, लेकिन यह एक आदमी को अनिश्चित काल तक सलाखों के पीछे रखने का कारण नहीं बन सकता। वह 8 मार्च, 2020 से सलाखों के पीछे है। वह तीन साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं और इस मामले में जो  न्यूनतम सजा संभव है उससे अधिक काट चुके हैं।"
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इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "एक बार उन्हें जमानत मिल गई तो मुकदमा कभी खत्म नहीं होगा। एएसजी ने तब अदालत को सूचित किया कि यह एक जटिल जांच है।" जब अदालत ने कहा कि उसे मामले में हस्तक्षेप करने की कोई जरूरत महसूस नहीं हो रही है तो अभिषेक सिंघवी ने कहा, यह एक कभी न खत्म होने वाली जांच है और पीएमएलए अदालत पर काम का अत्यधिक बोझ है।

सिंघवी ने आगे कहा कि सार्वजनिक धन का कोई नुकसान नहीं हुआ और राणा कपूर ने 2019 में पद छोड़ दिया था। शीर्ष अदालत की जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार करने के बाद राणा कपूर की ओर से वापस ले लिया गया। कपूर डीएचएफएल धनशोधन मामले में मार्च 2020 से जेल में बंद हैं।


यह मामला बैंक के अधिकारियों की ओर से खुदरा निवेशकों को बैंक के एटी 1 (अतिरिक्त टियर-1) बॉन्ड की गलत बिक्री से संबंधित है। यह आरोप लगाया गया था कि बैंक और कुछ अधिकारियों ने द्वितीयक बाजार में एटी-1 बॉन्ड बेचते समय निवेशकों को इसके जोखिम के बारे में सूचित नहीं किया था। एटी-1 बॉन्ड की बिक्री 2016 में शुरू हुई और 2019 तक जारी रही।

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