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SC: वीडियोकॉन के मुखिया को अंतरिम जमानत देने का विरोध करने वाली सीबीआई की याचिका स्वीकार, धूत को नोटिस
Wed, 05 Jul 2023 04:24 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 05 Jul 2023 04:24 PM IST
सार
उच्च न्यायालय ने 20 जनवरी को धूत को अंतरिम जमानत देते हुए कहा था कि सीबीआई ने उनकी गिरफ्तारी के लिए जो कारण बताए हैं, वे 'काफी लापरवाह और बिना किसी तथ्य के' हैं। यह कहते हुए कि एक जांच अधिकारी सिर्फ अपनी पसंद या मर्जी के आधार पर किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उच्चतम न्यायालय वीडियोकॉन-आईसीआईसीआई बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में वीडियोकॉन समूह के संस्थापक वेणुगोपाल धूत की अंतरिम जमानत को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करने के के लिए बुधवार को सहमत हो गया। न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल एसवी राजू की इस दलील पर संज्ञान लिया कि केस डायरी की जांच किए बिना धूत को जमानत दे दी गई। इसके बाद पीठ ने वेणुगोपाल धूत को नोटिस जारी किया।
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उच्च न्यायालय ने 20 जनवरी को धूत को अंतरिम जमानत देते हुए कहा था कि सीबीआई ने उनकी गिरफ्तारी के लिए जो कारण बताए हैं, वे 'काफी लापरवाह और बिना किसी तथ्य के' हैं। यह कहते हुए कि एक जांच अधिकारी सिर्फ अपनी पसंद या मर्जी के आधार पर किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकता है। उच्च न्यायालय ने विशेष अदालत को फटकार लगाते हुए कहा था कि उसने रिमांड आवेदन के साथ-साथ केस डायरी की जांच के लिए कोई "गंभीर प्रयास" नहीं किया।
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धूत को बीते साल 26 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने धूत को एक लाख रुपये का नकद मुचलका भरने पर अंतरिम जमानत दे दी थी। सीबीआई का आरोप है कि आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकॉन समूह के संस्थापक वेणुगोपाल धूत द्वारा प्रवर्तित वीडियोकॉन समूह की कंपनियों को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के दिशा-निर्देशों और बैंक की ऋण नीति का उल्लंघन करते हुए 3,250 करोड़ रुपये की ऋण सुविधाएं मंजूर की थीं।
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सीबीआई ने चंदा कोचर और दीपक कोचर, दीपक कोचर द्वारा संचालित नूपावर रिन्यूएबल्स (एनआरएल), सुप्रीम एनर्जी, वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड तथा वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2019 के तहत दर्ज प्राथमिकी में आरोपी बनाया है।
उसने आरोप लगाया कि इस मंजूरी के एवज में धूत ने सुप्रीम एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (एसईपीएल) के माध्यम से नूपावर रिन्यूएबल्स में 64 करोड़ रुपये का निवेश किया और 2010 से 2012 के बीच हेरफेर करके पिनेकल एनर्जी ट्रस्ट को एसईपीएल स्थानांतरित की। पिनेकल एनर्जी ट्रस्ट और एनआरएल का प्रबंधन दीपक कोचर के ही पास था।