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एसबीआई रिसर्च का खुलासा: महामारी में ज्यादा दाम पर सामान बेच रहे ऑनलाइन स्टोर

Wed, 19 May 2021 08:37 AM IST
देव कश्यप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 19 May 2021 08:37 AM IST
सार

  • अधिकतर स्टोर्स ने जरूरी उत्पादों पर घटा दिए डिस्काउंट
  • 0.15 फीसदी बढ़ जाएगी खुदरा महंगाई दर ऑनलाइन बिक्री को शामिल करने पर

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SBI Research Revealed Online Stores Selling Goods at high Price in Corona pandemic
ऑनलाइन खरीदारी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोरोना महामारी में एक तरफ जहां ग्राहक ज्यादातर खरीदारी ऑनलाइन कर रहे, वहीं मौके का फायदा उठाते हुए ग्रोफर्स, नेचर बास्केट, लिशियस जैसे प्लेटफॉर्म ने उत्पाद अधिक दाम पर बेचने शुरू कर दिए हैं। एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि अधिकतर ऑनलाइन स्टोर्स ने महामारी के दौरान डिस्काउंट में बड़ी कटौती कर दी है।

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रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना से पहले ऑनलाइन स्टोर्स पर बिकने वाले उत्पादों के दाम उनके अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से काफी कम होते थे, क्योंकि फिजिकल स्टोर्स से प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ज्यादा डिस्काउंट दिए जाते थे। अब संक्रमण के डर और लॉकडाउन से ज्यादातर ग्राहकों ने ऑनलाइन खरीदारी शुरू कर दी है, जिससे स्टोर्स ने भी डिस्काउंट में कटौती कर दी है। आलम यह है कि इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जरूरी उत्पादों के दाम उसी कंपनी के फिजिकल स्टोर से भी ज्यादा हो गए हैं और इन पर छूट भी न के बराबर पहुंच गई है। रिपोर्ट का कहना है कि ऑनलाइन स्टोर्स पर उत्पादों के दाम बढ़ने से खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर भी असर पड़ता है।
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महंगाई में नहीं जुड़ते ऑनलाइन बिक्री के आंकड़े
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, राष्ट्रीय सांख्यकी कार्यालय के खुदरा महंगाई के आंकड़ों में ऑनलाइन बिक्री शामिल नहीं होती। यही कारण है कि दिसंबर, 2020 से अप्रैल, 2021 तक हुए शोध में खुदरा महंगाई एनएसओ की महंगाई दर 4.30 फीसदी रही, वहीं एसबीआई के शोध में यह 5.35 फीसदी दिखी है। अगर ऑनलाइन बिक्री आंकड़ों को शामिल किया जाए, तो खुदरा महंगाई 0.15 फीसदी तक बढ़ सकती है।
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महंगाई थामनी है, तो तेल के दाम घटाना जरूरी
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि सरकार को महंगाई पर लगाम कसना है तो पेट्रोल-डीजल के दाम घटाना बेहद जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता तो ग्राहकों के गैर जरूरी उप्तादों पर खर्च बढ़ते जाएंगे, जो अभी कुल खर्च का 59 फीसदी पहुंच गया है। मार्च में यह 52 फीसदी था। इससे आगे भी खुदरा महंगाई बढ़ने का जोखिम रहेगा, जो घटती विकास दर के बीच अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं होगा।

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