फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   SBI Research debunks Raghuram Rajan's comments on Indian growth slowing down

SBI Research: पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन के दावे को किया खारिज, हिंदू विकास दर के तर्क को कहा 'पक्षपातपूर्ण'

Tue, 07 Mar 2023 01:16 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Tue, 07 Mar 2023 01:16 PM IST
सार

SBI Research: रिपोर्ट में कहा गया है, 'वित्त वर्ष  2023 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर में तिमाही क्रमिक आधार पर गिरावट का रुख रहा है। चुनिंदा तिमाहियों में यह तर्क दिया गया है कि भारत राज कृष्ण द्वारा गढ़ी गई विकास दर (3.5-4 प्रतिशत) की ओर जा रहा है, जो 1947-1980 की अवधि में दौरान विकास पर हावी रही थी।'

विज्ञापन
SBI Research debunks Raghuram Rajan's comments on Indian growth slowing down
रघुराम राजन - फोटो : पीटीआई

विस्तार

एसबीआई रिसर्च ने अपनी इकोरैप रिपोर्ट में कहा है कि भारत के 'हिंदू विकास दर' की ओर बढ़ने का तर्क गलत सोच पर आधारित और पक्षपातपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बचत और निवेश से संबंधित आंकड़ों को देखते हुए यह अपरिपक्व प्रतीत होता है। विकास की हिंदू दर शब्द 1978 में अर्थशास्त्री राज कृष्ण की ओर से गढ़ा गया था। उन्होने वर्ष 1947-1980 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद के संदर्भ में लगभग 3.5-4.0% की आर्थिक वृद्धि की बात कही थी। 

विज्ञापन


रिपोर्ट में कहा गया है, 'वित्त वर्ष  2023 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर में तिमाही क्रमिक आधार पर गिरावट का रुख रहा है। चुनिंदा तिमाहियों में यह तर्क दिया गया है कि भारत राज कृष्ण द्वारा गढ़ी गई विकास दर (3.5-4 प्रतिशत) की ओर जा रहा है, ये 1947-1980 की अवधि में दौरान विकास पर हावी रही थी।'
विज्ञापन


इकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है, 'बचत और निवेश के आंकड़ों के आधार पर हम इसे देखें तो यह गलत तरीके से बनाया गया, पक्षपातपूर्ण और प्रीमैच्योर्ड लगता है। एसबीआई रिसर्च की यह रिपोर्ट आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने मीडिया से कहा था कि भारत की आर्थिक वृद्धि राज कृष्ण के 'हिंदू विकास दर' के करीब है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके अलावा एसबीआई रिसर्च ने तर्क दिया कि कुल सकल पूंजी निर्माण (जीसीएफ) में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों का संस्थागत हिस्सा वित्त वर्ष 12 से जीडीपी के क्रमशः लगभग 10 प्रतिशत और 34 प्रतिशत पर लगभग स्थिर रहा है। 


विश्व बैंक के अनुसार सकल पूंजी निर्माण में अर्थव्यवस्था की अचल संपत्तियों के अलावा निवेश और इन्वेंट्री के स्तर पर शुद्ध परिवर्तन शामिल हैं। सरकार की ओर से सकल पूंजी निर्माण 2021-22 में 11.8 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो 2020-21 में 10.7 प्रतिशत था। एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका निजी क्षेत्र के निवेश पर भी प्रभाव पड़ा, जो इसी अवधि में 10 प्रतिशत से बढ़कर 10.8 प्रतिशत हो गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed