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Report: रूस से खरीद बंद होने पर दुनिया में 10 फीसदी बढ़ेंगे क्रूड के दाम, यहीं से हो रहा 10% कच्चा तेल आपूर्ति

Sat, 09 Aug 2025 08:20 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 09 Aug 2025 08:20 AM IST
सार

एक अनुमान के मुताबिक रूस से खरीद बंद होने पर दुनियाभर में क्रूड ऑयल के दाम 10 फीसदी बढ़ जाएंगे। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति में रूस की हिस्सेदारी 10% है।

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SBI Report If purchase from Russia stopped crude price will increase 10 pc in world know supply share details
कच्चे तेल व्यापार पर एसबीआई की रिपोर्ट (सांकेतिक) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उच्च टैरिफ के दबाव में आकर अगर सभी देशों ने रूस से कच्चे तेल की खरीदारी बंद कर दी, तो इससे वैश्विक स्तर पर क्रूड के दाम 10 फीसदी बढ़ जाएंगे। एसबीआई ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा, कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति में रूस की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी है। रूस से तेल खरीदारी बंद करने पर दुनियाभर में क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी। ऐसा तब तक होगा, जब तक कोई अन्य तेल उत्पादक देश इस कमी को पूरा करने के लिए आगे न आए। रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से न सिर्फ देशों का आयात बिल बढ़ेगा, बल्कि लागत और महंगाई के मोर्चे पर भी चुनौतियों का सामना करना होगा। कुल मिलाकर, अनिश्चितताओं और अस्थिरता के इस दौर में इन सबका नकारात्मक असर वैश्विक जीडीपी की वृद्धि दर पर पड़ेगा।

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12 अरब डॉलर बढ़ेगा भारत का आयात बिल
भारत अगर टैरिफ के दबाव में आकर रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो इससे देश का आयात बिल (क्रूड विल) करीब 12 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के तीसरे सबसे बड़े क्रूड आयातक की प्रतिदिन रिफाइनिंग क्षमता करीब 52 लाख बैरल है। भारत अगर चालू वित्त वर्ष 2025-26 की शेष अवधि के लिए रूसी तेल खरीद बंद करता है, तो आयात विल में 9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है। 2026-27 के लिए यह बिल बढ़कर 11.7 अरब डॉलर पहुंच सकता है।

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  • 35.1% है भारत की कुल कच्चा तेल खरीद में रूस की हिस्सेदारी
  • 2030 तक देश में 10 लाख बैरल प्रतिदिन और बढ़ेगी मांग

आपूर्ति बाधित होने पर भारत के पास विकल्प
रूसी आपूर्ति अगर बाधित होती है, तो भारत मौजूदा समझौतों के तहत मध्य पूर्वी उत्पादकों की ओर लौट सकता है। इन समझौतों के लचीलेपन का लाभ उठाकर कमी को पूरा कर सकता है। हालांकि, भारत का तेल नेटवर्क लचीला होने के बावजूद रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद बंद होने से ईंधन की बढ़ी लागत के रूप में अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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कुल आयात में रूस का 35 फीसदी हिस्सा
यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध के बीच भारत ने 2022 में भारी छूट पर रूस से कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था। अब यह भारत का सबसे बड़ा क्रूड आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर 2024-25 में 35.1 फीसदी पहुंच गई, जो 2019-20 में महज 1.7 फीसदी थी। भारत ने 2024-25 में कुल 24.5 करोड़ मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात किया, जिसमें रूस की हिस्सेदारी 8.8 करोड़ मीट्रिक टन रही।

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