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एसबीआई रिपोर्ट: अर्थशास्त्रियों की मांग- इक्विटी पर एनटीसीजी कर हटे, दावा- पूंजी का बाहर जाना इससे होगा कम

Mon, 12 Oct 2026 08:15 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 12 Oct 2026 08:15 PM IST
सार

एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने इक्विटी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) कर खत्म करने की मांग की है। भारी पूंजी बहिर्प्रवाह और रुपये पर दबाव के बीच यह सुझाव दिया गया है।

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SBI Demands Scrapping LTCG Tax on Equities Amid Heavy Outflows
एसबीआई - फोटो : Adobestock

विस्तार

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने इक्विटी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) कर को खत्म करने की मांग की है। सोमवार को जारी अपनी 'इकोरैप' रिपोर्ट में एसबीआई रिसर्च ने यह सुझाव दिया। उनका मानना है कि इससे निवेशक लंबे समय तक बाजार में निवेशित रहेंगे। यह प्रस्ताव अस्थिर विदेशी पूंजी प्रवाह को स्थिर करने और अचानक बहिर्प्रवाह के जोखिम को कम करने में मदद करेगा। अचानक पूंजी निकासी से रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।

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वर्तमान में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) इक्विटी निवेश पर 12.5 फीसदी एलटीसीजी कर का भुगतान करते हैं। केंद्रीय बजट 2026 में सूचीबद्ध इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर 12.5 फीसदी एलटीसीजी कर दर को यथावत रखा गया था। यह फ्रेमवर्क 2024 के एक बड़े राजकोषीय सुधार के दौरान स्थापित किया गया था। विदेशी निवेशकों ने अक्तूबर में अब तक भारतीय इक्विटी से 44,166 करोड़ रुपये निकाले हैं। इस साल कुल बहिर्प्रवाह तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

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एलटीसीजी कर हटाने की मांग क्यों?

एसबीआई रिसर्च ने सरकार से इक्विटी सेगमेंट में अस्थिर पूंजी प्रवाह को स्थिर करने पर गंभीरता से विचार करने को कहा है। इसके लिए होल्डिंग पीरियड को 2-3 साल तक बढ़ाने और इक्विटी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स कर को खत्म करने का सुझाव दिया गया है। यह कदम विदेशी पूंजी को भारतीय बाजार में लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करेगा। इससे रुपये पर पड़ने वाले दबाव को भी कम किया जा सकेगा।

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विदेशी निवेशक क्यों निकाल रहे पूंजी?

विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कई कारण हैं। इनमें कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि शामिल है। उत्तर एशियाई बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित रैली भी अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित कर रही है। भारतीय इक्विटी से एफपीआई की निकासी 2026 में 3.04 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह 2025 में दर्ज 1.66 लाख करोड़ रुपये से काफी अधिक है। भारत में एआई-थीम वाले स्टॉक की अनुपस्थिति और अन्य बाजारों, खासकर अमेरिका में बढ़ती यील्ड भी एक कारण है।

अन्य क्या सुझाव दिए गए?

एसबीआई रिसर्च ने निर्यात आय की वापसी को करीब छह महीने की उचित अवधि के भीतर सुव्यवस्थित करने का भी सुझाव दिया है। निर्यातकों को आमतौर पर विदेशी खरीदारों को इसी अवधि के लिए क्रेडिट पीरियड देना होता है। इस अवधि से आगे किसी भी विस्तार को मामला-दर-मामला आधार पर दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट में ईसीबी (एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स) पर विदहोल्डिंग टैक्स (वर्तमान में 5-20 फीसदी) पर अधिक स्पष्टता की भी मांग की गई है। यह डीटीएए (डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट) के तहत लाभ सुनिश्चित करने और अधिकारियों द्वारा सामान्य या विशिष्ट खंडों के सुसंगत अनुप्रयोग के लिए आवश्यक है।

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