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सहारा विवाद: नौ साल में निवेशकों के 129 करोड़ ही लौटाए जा सके, सामने नहीं आ रहे दावेदार, सेबी के खाते में है 23 हजार करोड़ रुपये

Thu, 05 Aug 2021 07:30 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 05 Aug 2021 07:30 PM IST
सार

सहारा विवाद काफी चर्चित रहा। समूह की दो कंपनियों के करीब तीन करोड़ निवेशकों को ब्याज समेत पैसा लौटाने का आदेश दिया गया है, लेकिन दावेदार बहुत कम संख्या में सामने आ रहे हैं।

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Sahara dispute: In nine years, only 129 crores of investors could be returned, claimants are not appearing, there is 23 thousand crore rupees in SEBIs account
sebi - फोटो : pti

विस्तार

सहारा समूह की दो कंपनियों के निवेशकों को नौ साल में मात्र 129 करोड़ रुपये ही लौटाए जा सके हैं। पिछले साल पूंजी बाजार नियामक 'सेबी' मात्र 14 करोड़ रुपये ही लौटा सका, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर खोले गए विशेष खाते में सेबी के पास निवेशकों के लौटाने के लिए 23 हजार करोड़ रुपये का भंडार है। 

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बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रतिभूमि व विनिमय बोर्ड (सेबी) को सहारा समूह की इन कंपनियों के निवेशकों को पैसा लौटाने का जिम्मा सौंपा हैै। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सहारा समूह ने निवेशकों को लौटाने के लिए विशेष एस्क्रो अकाउंट में 23,000 करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं। सेबी द्वारा गुरुवार को  दी ताजा जानकारी में यह बात कही गई है। 
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सहारा समूह की दो कंपनियों के बांडधारकों में से अधिकांश दावे के लिए सामने नहीं आए हैं। कोर्ट ने इन कंपनियों को अगस्त 2012 में करीब तीन करोड़ निवेशकों को ब्याज समेत पैसा लौटाने का आदेश दिया था। 
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पिछले साल लौटाए जा सके मात्र 14 करोड़ रुपये
पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में सेबी मात्र 14 करोड़ रुपये ही लौटा सका है, जबकि सेबी-सहारा के रिफंड खातों में इस दौरान 1400 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अपनी नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में सेबी ने कहा कि उसे 31 मार्च, 2021 तक 19,616 आवेदन प्राप्त हुए। इसमें लगभग 81.6 करोड़ रुपये के रिफंड के दावे शामिल थे। इनमें से 16,909 मामलों में 129 करोड़ रुपये, जिसमें 66.35 करोड़ रुपये मूलधन और 62.34 करोड़ रुपये ब्याज शामिल है, का रिफंड जारी किया है। 2.3 करोड़ रुपये से अधिक के 483 आवेदनों में त्रुटियों को दूर करने के लिए निवेशकों को वापस भेजा गया है।

इससे पहले सेबी ने 31 मार्च, 2020 को बताया था कि उसके द्वारा रिफंड की गई कुल राशि को 115.2 करोड़ रुपये है। सेबी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित विभिन्न आदेशों और नियामक द्वारा पारित कुर्की आदेशों के अनुसार, 31 मार्च, 2021 तक कुल 15,473 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। 

सुप्रीम कोर्ट के 31 अगस्त 2012 के फैसले के अनुसार बांडधारकों को रिफंड करने के बाद उन पर अर्जित ब्याज के साथ इन राशियों को विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा किया गया है। 31 मार्च, 2021 तक, जमा की गई कुल राशि इन बैंकों में 23,191 करोड़ रुपये हैं।जबकि 31 मार्च, 2020 को यह राशि 21,770.70 करोड़ रुपये थी।


सहारा समूह ने यह कहा
सेबी के नवीनतम बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, सहारा समूह ने कहा कि उसके अपने अनुमान के अनुसार सहारा-सेबी खाते में ब्याज सहित जमा राशि लगभग 25,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए। समूह ने आरोप लगाया कि सेबी के पास सहारा और उसके निवेशक का पैसा अनुचित ढंग से रोक कर बैठा है। रिफंड के दावों को आमंत्रित करने के लिए सेबी द्वारा वर्षों से दिए गए अखबारों के विज्ञापनों के विभिन्न दौरों का उल्लेख करते हुए, सहारा ने कहा कि नियामक ने पिछले विज्ञापन में स्पष्ट कर दिया था कि वह जुलाई 2018 के बाद प्राप्त किसी भी दावे पर विचार नहीं करेगा। इसका मतलब है कि सेबी के लिए और अधिक दावेदारों का भुगतान नहीं किया जाना है और सहारा के द्वारा जमा किए गए पूरे 25,000 करोड़ रुपये अनुचित रूप से सेबी के पास हैं। उन्हें सहारा को वापस कर दिया जाना चाहिए। सहारा ने अपने तीन करोड़ निवेशकों से संबंधित सभी मूल दस्तावेज सेबी को नौ साल पहले दे दिए थे। वर्षों पहले सत्यापन के लिए और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, 25,000 करोड़ रुपये की यह राशि अंततः सहारा को वापस आ जाएगी। 

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