टेलीकॉम कंपनियों को देना होगा 1.47 लाख करोड़, सरकार ने नहीं किया रियायत पर विचार
दूरसंचार कंपनियों को 1.47 लाख करोड़ रुपये चुकाना होगा। केंद्र सरकार ने इसको लेकर के कंपनियों को अभी किसी तरह की रियायत नहीं दी है। दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में ये जानकारी दी।
इतना है लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम का बकाया
दूरसंचार कंपनियों पर 31 अक्तूबर 2018 तक लाइसेंस फीस के अलावा स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज (एसयूसी) के तौर पर कुल 55054.51 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा लाइसेंस फीस के तौर पर कंपनियों को 93 हजार करोड़ रुपये चुकाने हैं।
कंपनियों को चुकाने हैं इतने करोड़ रुपये
दूरसंचार मंत्री ने बताया कि भारती एयरटेल को 13904 करोड़ रुपये, वोडाफोन को 17984.23 करोड़, आइडिया सेल्लूयर को 6745.37 करोड़, आर-कॉम को 3887.46 करोड़, महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड को 585.88 करोड़ रुपये का एसयूसी का बकाया हैं।
लाइसेंस फीस के तौर पर वोडाफोन-आइडिया को 28,309 करोड़, भारती एयरटेल को 21,682 करोड़, टेलीनॉर को 1,950 करोड़,और टाटा ग्रुप की कंपनियों को 9,987 करोड़ रुपये चुकाने हैं। प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सकल राजस्व और समायोजित सकल राजस्व के बारे में सही से बता दिया है। कोर्ट ने कंपनियों से तीन माह के अंदर भुगतान करने का आदेश जारी किया है।
प्रसाद ने कहा है कि लाइसेंस फीस की 1.47 लाख करोड़ रुपये की राशि प्रोविजनल हैं और इसमें कोर्ट के फैसला आने के बाद इजाफा हो सकता है।