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बैंक में पुराने नोट जमा कराने को लेकर नई पाबंदी

Mon, 19 Dec 2016 09:50 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 19 Dec 2016 09:50 PM IST
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Rs 5000 shall be made only once per account until December 30th 2016
Bank - फोटो : Bureau
कर चोरी करने वालों पर नोटबंदी के बाद भी नकेल कसने की कवायद लगातार जारी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इसी कड़ी में सोमवार को एलान किया कि अब 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों में 30 दिसंबर तक सिर्फ एक बार ही 5000 रुपये से अधिक राशि केवाईसी खाते में जमा कराई जा सकती है। इतना ही नहीं, 5000 रुपये से अधिक राशि जमा करने वालों को बैंक अधिकारियों को बताना होगा कि अब तक वे पुराने नोट क्यों नहीं जमा करा पाए थे। 
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केंद्रीय बैंक ने ये कड़ी शर्तें एक ही खाते में 5000 रुपये से अधिक एकमुश्त राशि जमा करने वालों पर भी लगाई हैं। लेकिन कहा है कि नई कालाधन कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत पुराने नोट जमा करने की कोई सीमा नहीं होगी।
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आरबीआई अधिसूचना के मुताबिक, बैंक खातों में पुराने नोट जमा करने पर कुछ बंदिशें लगाने का फैसला किया गया है जबकि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना-2016 के तहत ऐसे नोट जमा कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पीएमजीकेवाई के तहत अघोषित आय की राशि जमा करने पर 50 फीसदी कर लगाने और शेष 25 प्रतिशत राशि को चार वर्ष की लॉक-इन अवधि में ब्याजमुक्त रखने का फैसला किया गया है। 
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वित्त मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में बताया कि 500 और 1000 रुपये पुराने नोटों की स्थिति पर समय-समय पर समीक्षा हुई है। इन नोटों को चलन से हटाए हुए पांच सप्ताह से अधिक समय बीत चुुके हैं और माना जा रहा है कि अधिकतर लोगों ने अपना पैसा जमा कर दिया है। इसी बात को समझते हुए अब सरकार ने आगामी 30 दिसंबर तक 5000 रुपये से ज्यादा के ऐसे नोटों को सिर्फ एक बार ही जमा करने का मौका देने का फैसला किया है। इस बारे में रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिया है।

अधिक राशि जमा करने वालों को कम से कम दो बैंक अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होकर जवाब देना होगा कि इससे पहले वे पुराने नोट क्यों नहीं जमा करा पाए और संतोषजनक जवाब पाने के बाद ही उन्हें यह रकम जमा कराने की अनुमति दी जाएगी। उनका जवाब भविष्य में कभी लेखा परीक्षण के रिकॉर्ड के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (सीबीएस) में भी उनके खाते पर उचित निशान लगा दिया जाएगा ताकि वे आगे कोई राशि जमा न कर सकें। 

हालांकि 5000 रुपये तक के पुराने नोट सामान्य नियमों के तहत 30 दिसंबर तक जमा किए जा सकते हैं। यहां तक कि इस दौरान यदि एक ही खाते में 5000 रुपये से कम राशि कई बार जमा करते हुए 30 दिसंबर तक 5000 रुपये से अधिक रकम हो जाते हैं तो उनके लिए भी एक बार ही जमा करने का नियम लागू होगा और 30 दिसंबर तक उस खाते में फिर कोई रकम जमा नहीं कराई जा सकती है।

पुराने नोटों में 5000 रुपये की राशि  किसी एक खाते में मानक बैंकिंग प्रक्रिया के तहत जमा कराई जा सकती है और इसके लिए वैध पहचान का प्रमाण देना होगा। इन सभी राशियों के लिए केवाईसी खाता होना भी जरूरी है। 

ग्रामीण उपभोक्ताओं को मिले फ्री डाटा: ट्राई 

Rs 5000 shall be made only once per account until December 30th 2016

लेस-कैश लेनदेन में सहयोग देने के लिए दूरसंचार नियामक ट्राई ने मासिक आधार पर ग्रामीण उपभोक्ताओं को एक ‘निश्चित मात्रा’ में फ्री डाटा देने की सिफारिश की है। इस योजना का खर्च यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड द्वारा उठाए जाने का सुझाव दिया है।

ट्राई का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्तियों के लिए डाटा सुविधाएं मुहैया कराने और कैशलेस अर्थव्यवस्था में सरकार के प्रयासों को सहयोग देने के तहत ग्रामीण उपभोक्ताओं को प्रति माह 100 एमबी डाटा मुफ्त उपलब्ध कराया जाए। 

टैक्स भुगतान के लिए पुराने नोट मंजूर 

Rs 5000 shall be made only once per account until December 30th 2016

सरकार ने अघोषित आय कल्याण योजना के तहत 30 दिसंबर तक टैक्स भुगतान के लिए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। जिनके पास अघोषित आय है, वे 50 प्रतिशत टैक्स देकर और इसमें से 25 फीसदी राशि ब्याज-रहित जमा योजना में जमा करके प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का लाभ उठा सकते हैं।

2005 से पहले के नोट वाले ग्राहकों को नहीं लौटा सकते बैंक 
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि जो ग्राहक 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के साथ सन 2005 से पहले वाले करेंसी नोट जमा कराने आते हैं, उन्हें बैंक लौटा नहीं सकते। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि नोटबंदी की घोषणा में 2005 से पहले के नोट भी शामिल हैं। बैंक इन नोटों को जमा तो कर सकते थे लेकिन इन्हें फिर से जारी नहीं कर सकते थे। 

भविष्य निधि की ब्याज दर घटाकर 8.65 फीसदी तय

Rs 5000 shall be made only once per account until December 30th 2016

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज को घटाकर 8.65 फीसदी करने का निर्णय किया है। वित्त वर्ष 2015-16 में यह 8.8 प्रतिशत थी। इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के उपाध्यक्ष अशोक सिंह ने बंगलूरू में बैठक के बाद कहा, ‘ईपीएफओ के निर्णय लेने वाले शीर्ष निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) ने वर्तमान वित्त वर्ष में ब्याज दर को 8.65 फीसदी करने का निर्णय किया है जो 2015-16 में 8.8 फीसदी थी।’

ईपीएफओ के आय के अनुमान के मुताबिक यदि वह 8.8 फीसदी का ब्याज मौजूदा वित्तवर्ष में भी देता है तो उसे 383 करोड़ रुपये का घाटा होगा। हालांकि पिछले वित्त वर्ष में 8.8 फीसदी ब्याज देने के बाद ईपीएफओ के पास 409 करोड़ रुपये का अधिशेष बच गया था जिसका प्रयोग वह चाहे तो इस साल भी उतना ही ब्याज देने के लिए कर सकता है।

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