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RBI: महंगाई पर जोखिम बरकरार, मौद्रिक नीति उपायों व आपूर्ति के मोर्चे पर हस्तक्षेप से मिली राहत

Fri, 17 Nov 2023 06:28 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 17 Nov 2023 06:28 AM IST
सार

केंद्रीय बैंक ने बृहस्पतिवार को जारी नवंबर के बुलेटिन में कहा, सितंबर में खुदरा महंगाई के करीब 5 फीसदी और अक्तूबर में 4.87 फीसदी पर रहना राहत की बात है। लेकिन, वैश्विक हालातों की वजह से अभी कीमतों पर जोखिम बना हुआ है।

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Risk on inflation remains relief from monetary policy measures and intervention on supply front
आरबीआई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आरबीआई ने कहा कि मौद्रिक नीति उपायों और आपूर्ति के मोर्चे पर हस्तक्षेप से खुदरा महंगाई में कमी आई है, लेकिन हम अब भी मुश्किलों से बाहर नहीं निकले हैं। महंगाई पर जोखिम बना हुआ है और अभी लंबा सफर तय करना बाकी है। हालांकि, त्योहारों के दौरान मांग बेहतर रहने से 2023-24 की अक्तूबर-दिसंबर (तीसरी तिमाही) अवधि में आर्थिक वृद्धि दर तिमाही आधार पर अधिक रहने की उम्मीद है।
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केंद्रीय बैंक ने बृहस्पतिवार को जारी नवंबर के बुलेटिन में कहा, सितंबर में खुदरा महंगाई के करीब 5 फीसदी और अक्तूबर में 4.87 फीसदी पर रहना राहत की बात है। लेकिन, वैश्विक हालातों की वजह से अभी कीमतों पर जोखिम बना हुआ है। 2022-23 के पहले सात महीनों में कुल महंगाई में तेजी आई थी। वास्तव में नवंबर, 2022 पहला महीना था, जब खुदरा महंगाई आरबीआई के संतोषजनक 2 से 6 फीसदी के दायरे में आई। खुदरा महंगाई 2022-23 में 6.7 फीसदी और चालू वित्त वर्ष में जुलाई-अगस्त के दौरान 7.1 फीसदी पर पहुंच गई थी। 
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यूपीआई: दो माह में एक अरब बढ़ा लेनदेन
केंद्रीय बैंक ने बुलेटिन में कहा, यूपीआई लेनदेन दो महीने की छोटी अवधि में एक अरब बढ़ा है। इसके साथ ही, यूपीआई के जरिये लेनदेन की संख्या बढ़कर 11 अरब के स्तर पर पहुंच गई है। लेख में कहा गया है कि सरकार के बुनियादी ढांचे पर खर्च, निजी पूंजीगत खर्च में वृद्धि, स्वचालन, डिजिटलीकरण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने से निवेश मांग मजबूत बनी हुई है।
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भारत पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था
चालू खाते का घाटा नरम है। विदेशी मुद्रा भंडार बेहतर स्थिति में है। बाजार विनिमय दरों पर भारत पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था चालू तिमाही में नरम पड़ने के संकेत दे रही है। सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में महामारी के बाद जो तेजी आई थी, वह अब खत्म होने वाली है। हालांकि, आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज हुई है। जीडीपी महामारी-पूर्व स्तर से ऊपर पहुंच गई है।  


2024-26 के दौरान 7.1 फीसदी तक रहेगी वृद्धि दर
वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं मध्यम अवधि में मजबूत रहेगी। 2023-24 से 2025-26 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सालाना 6-7.1 फीसदी की वृद्धि होगी। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में कहा, वैश्विक अनिश्चितताओं का भारतीय जीडीपी पर कम असर पड़ेगा। हालांकि, धीमी वैश्विक वृद्धि व बाहरी मांग आर्थिक गतिविधियों पर असर डालेगी। महंगाई को तेज कर सकती है। लेकिन, भारत की वृद्धि घरेलू स्तर पर केंद्रित होने से उम्मीद है कि आर्थिक वृद्धि पर इसका कम असर होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वस्थ कॉरपोरेट बही-खातों व अन्य सुधारों से बैंकों का फंसा कर्ज मार्च, 2025 तक 3-3.5% तक घट जाएगा। भारत में ब्याज दरों में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना नहीं होने से बैंकिंग उद्योग के लिए जोखिम भी सीमित रहेगा।
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