Inflation: 9 माह तक घटने के बाद फिर बढ़ सकती है खुदरा महंगाई, RBI की निचली सीमा से ऊपर निकल जाएगी मुद्रास्फीति
सब्जियों की कीमतें मई से बढ़ रही हैं, जिसमें जुलाई में सबसे तेज उछाल देखने को मिला। हालांकि, अगस्त में वृद्धि की रफ्तार धीमी हो गई और क्रमिक आधार पर इसके तीन फीसदी बढ़ने का अनुमान है।
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लगातार नौ महीने तक घटने के बाद खुदरा महंगाई अगस्त, 2025 के आंकड़ों में फिर बढ़ सकती है। हालांकि, इसमें चिंता की कोई बात नहीं है, क्योंकि बढ़ोतरी के बाद भी यह कम ही रहेगी। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट के मुताबिक, खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में उछाल के कारण अगस्त के आंकड़ों में खुदरा महंगाई बढ़कर 2.08 फीसदी पहुंच जाएगी। जुलाई में यह घटकर करीब 8 साल के निचले स्तर 1.55 फीसदी पर आ गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में खाद्य वस्तुओं की कीमतें मासिक आधार पर 0.6 फीसदी बढ़ सकती हैं। हालांकि, एक साल पहले की तुलना में कीमतें कम ही रहेंगी। लेकिन, मासिक आधार पर वृद्धि से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, यह आरबीआई की दो फीसदी की निचली सीमा के पार निकल जाएगी। जुलाई के आंकड़ों में खुदरा महंगाई जनवरी, 2019 के बाद साढ़े छह साल में पहली बार दो फीसदी से नीचे आई थी। सरकार अगस्त के खुदरा महंगाई के आंकड़े शुक्रवार को जारी करेगी।
सब्जियों के महंगी होने की रफ्तार धीमी
सब्जियों की कीमतें मई से बढ़ रही हैं, जिसमें जुलाई में सबसे तेज उछाल देखने को मिला। हालांकि, अगस्त में वृद्धि की रफ्तार धीमी हो गई और क्रमिक आधार पर इसके तीन फीसदी बढ़ने का अनुमान है। प्याज के दाम मध्यम गति से बढ़े, जबकि आलू में गिरावट आई। फूलगोभी, पत्तागोभी और बैंगन जैसी फसलों की बेहतर आवक ने भी इस उछाल को थामने में मदद की।
तेल, चीनी और गुड़ की कीमतों में उछाल
- अगस्त में तेल और वसा की महंगाई बढ़कर 22.4 फीसदी पहुंच गई, जो जुलाई में 19.2 फीसदी थी। कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल सरसों और नारियल तेल में देखा गया।
- चीनी और कन्फेक्शनरी उत्पादों की महंगाई बढ़कर चार फीसदी के पार निकल गई, जो जुलाई में 3.3 फीसदी थी। गुड़ एक फीसदी महंगा हुआ है।
दाल और फलों के मोर्चे पर राहत
अनाज की महंगाई घटकर 2.8 फीसदी रहने का अनुमान है। चावल और गेहूं के पर्याप्त भंडार के कारण कीमतों में सुस्ती दिखाई दे रही है, जो पिछले साल के विपरीत है, क्योंकि सरकार को लगभग इसी समय मूल्य नियंत्रण के उपाय करने पड़े थे। अरहर दाल की कीमतों में लगातार 13वें महीने गिरावट रही।