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Inflation: घटने के बावजूद खुदरा महंगाई आरबीआई के दायरे से बाहर, रेपो दर के फिर यथावत रहने का अनुमान

Wed, 13 Sep 2023 06:37 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 13 Sep 2023 06:37 AM IST
सार

आईडीएफसी बैंक के अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि वह खाद्य महंगाई में होने वाली वृद्धि पर जोर देगा क्योंकि आने वाले समय में इसमें नरमी की उम्मीद है।

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retail inflation is out of scope of RBI repo rate is expected to remain the same again
rbi new - फोटो : istock

विस्तार

खुदरा महंगाई अगस्त, 2023 में घटने के बावजूद केंद्रीय बैंक के संतोषजनक दायरे से बाहर है। विशेषज्ञों का दावा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित (सीपीआई) महंगाई में इस गिरावट के बावजूद आरबीआई मौद्रिक नीति समिति की आगामी बैठक में भी 2023-24 के लिए रेपो दर में बदलाव नहीं करेगा। 
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आईडीएफसी बैंक के अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि वह खाद्य महंगाई में होने वाली वृद्धि पर जोर देगा क्योंकि आने वाले समय में इसमें नरमी की उम्मीद है। फिलहाल, सेवाओं और वस्तुओं की महंगाई में नरमी से मुख्य महंगाई अच्छी स्थिति में बनी हुई है। इसलिए, पूरे वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान प्रमुख नीतिगत दर के यथावत रहने की ही उम्मीद है। 
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सितंबर में राहत की उम्मीद
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि सब्जियों और अन्य खाद्य उत्पादों के दाम धीरे-धीरे घट रहे हैं। सितंबर में खुदरा महंगाई के मोर्च पर राहत मिलने की उम्मीद है। इस दौरान सीपीआई महंगाई 5.3 से 5.5 फीसदी के बीच रह सकती है। राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा, झारखंड और कर्नाटक में सर्वाधिक रही। उत्तराखंड में खुदरा महंगाई 7.84 फीसदी, पंजाब में 7.34 फीसदी व यूपी में 7.20 फीसदी रही।
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बुनियादी ढांचे में सबसे ज्यादा बढ़त
देश के औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) में जुलाई में 5.7 फीसदी की वृद्धि में सबसे अधिक योगदान बुनियादी ढांचा क्षेत्र का रहा। इस दौरान बुनियादी ढांचा क्षेत्र में उत्पादन की वृद्धि दर सबसे ज्यादा 11.4 फीसदी रही। पूंजीगत वस्तुओं में 4.6 फीसदी की वृद्धि हुई। एक साल पहले की समान अवधि में इसमें 5.1 फीसदी वृद्धि हुई थी। हालांकि, टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में 2.7 फीसदी की गिरावट आई। एक साल पहले की समान अवधि में इसमें 2.3 फीसदी वृद्धि हुई थी।
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