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RBI: भारतीय रिजर्व बैंक ने भुगतान प्रणाली कानून के तहत जुर्माने के नियम को किया कड़ा; अब 10 लाख तक का दंड संभव
Thu, 30 Jan 2025 11:07 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 30 Jan 2025 11:07 PM IST
सार
भारतीय रिजर्व बैंक ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम के तहत जुर्माने के नियमों में बदलाव करते हुए उन्हें और कड़ा बना दिया है। बता दें कि, इस अधिनियम के तहत अब 10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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आरबीआई (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम (पीएसएस अधिनियम) के तहत नए नियम लागू किए हैं, जिससे बैंकों और भुगतान सेवा कंपनियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। अब अगर कोई भुगतान प्रणाली बिना अनुमति के संचालित की जाती है, गोपनीय जानकारी लीक होती है या समय पर जुर्माना नहीं भरा जाता, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा और भारी दंड लगाया जा सकता है।
क्या हैं नए नियम?
आरबीआई ने अपनी प्रवर्तन कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए कुछ अहम बदलाव किए हैं:
बिना लाइसेंस के भुगतान सेवाओं का संचालन अपराध माना जाएगा।
गोपनीय या प्रतिबंधित जानकारी का खुलासा करना नियमों का उल्लंघन होगा।
अगर तय समय में आरबीआई की तरफ से लगाया गया जुर्माना नहीं भरा गया, तो दंड लगेगा।
क्या है जुर्माने की नई सीमा?
पहले आरबीआई को अधिकतम 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का अधिकार था। लेकिन जन विश्वास अधिनियम, 2023 के लागू होने के बाद, इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये या उल्लंघन से जुड़ी राशि का दोगुना (जो भी ज्यादा हो) कर दिया गया है। यह बदलाव 22 जनवरी, 2024 से प्रभावी हो गया है।
हर दिन 25,000 रुपये तक अतिरिक्त जुर्माना
अगर कोई बैंक या भुगतान सेवा कंपनी नियमों का लगातार उल्लंघन करती है, तो पहले लगे जुर्माने के बाद भी हर दिन 25,000 रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है। यह दंड तब तक जारी रहेगा जब तक उल्लंघन को ठीक नहीं किया जाता।
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समझौता करने लायक अपराधों पर क्या होगा?
आरबीई ने साफ किया है कि ऐसे अपराध जिनमें जेल की सजा का प्रावधान है, वे समझौता योग्य नहीं होंगे। केवल वे मामले जो भौतिक उल्लंघनों (जैसे प्रक्रिया में गड़बड़ी) से जुड़े हैं, उन पर ही जुर्माने को कम करने या समझौता करने का विकल्प दिया जाएगा।
आरबीआई ने क्यों किए ये बदलाव?
इन नए नियमों का मकसद डिजिटल भुगतान प्रणाली में अधिक पारदर्शिता लाना और वित्तीय क्षेत्र में अनुशासन बनाए रखना है। आरबीआई चाहता है कि सभी बैंक और भुगतान सेवा कंपनियां नियमों का सख्ती से पालन करें, ताकि उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रह सकें और डिजिटल लेन-देन सुरक्षित बने रहें।
बैंकों और कंपनियों को क्या करना होगा?
अब सभी बैंकों और भुगतान सेवा कंपनियों को आरबीआई के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, अन्यथा वे भारी जुर्माने की चपेट में आ सकते हैं। इस फैसले से डिजिटल भुगतान क्षेत्र में बेहतर नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
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क्या हैं नए नियम?
आरबीआई ने अपनी प्रवर्तन कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए कुछ अहम बदलाव किए हैं:
बिना लाइसेंस के भुगतान सेवाओं का संचालन अपराध माना जाएगा।
गोपनीय या प्रतिबंधित जानकारी का खुलासा करना नियमों का उल्लंघन होगा।
अगर तय समय में आरबीआई की तरफ से लगाया गया जुर्माना नहीं भरा गया, तो दंड लगेगा।
क्या है जुर्माने की नई सीमा?
पहले आरबीआई को अधिकतम 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का अधिकार था। लेकिन जन विश्वास अधिनियम, 2023 के लागू होने के बाद, इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये या उल्लंघन से जुड़ी राशि का दोगुना (जो भी ज्यादा हो) कर दिया गया है। यह बदलाव 22 जनवरी, 2024 से प्रभावी हो गया है।
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हर दिन 25,000 रुपये तक अतिरिक्त जुर्माना
अगर कोई बैंक या भुगतान सेवा कंपनी नियमों का लगातार उल्लंघन करती है, तो पहले लगे जुर्माने के बाद भी हर दिन 25,000 रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है। यह दंड तब तक जारी रहेगा जब तक उल्लंघन को ठीक नहीं किया जाता।
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समझौता करने लायक अपराधों पर क्या होगा?
आरबीई ने साफ किया है कि ऐसे अपराध जिनमें जेल की सजा का प्रावधान है, वे समझौता योग्य नहीं होंगे। केवल वे मामले जो भौतिक उल्लंघनों (जैसे प्रक्रिया में गड़बड़ी) से जुड़े हैं, उन पर ही जुर्माने को कम करने या समझौता करने का विकल्प दिया जाएगा।
आरबीआई ने क्यों किए ये बदलाव?
इन नए नियमों का मकसद डिजिटल भुगतान प्रणाली में अधिक पारदर्शिता लाना और वित्तीय क्षेत्र में अनुशासन बनाए रखना है। आरबीआई चाहता है कि सभी बैंक और भुगतान सेवा कंपनियां नियमों का सख्ती से पालन करें, ताकि उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रह सकें और डिजिटल लेन-देन सुरक्षित बने रहें।
बैंकों और कंपनियों को क्या करना होगा?
अब सभी बैंकों और भुगतान सेवा कंपनियों को आरबीआई के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, अन्यथा वे भारी जुर्माने की चपेट में आ सकते हैं। इस फैसले से डिजिटल भुगतान क्षेत्र में बेहतर नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।