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जियो: आईपीओ से पहले दबाव में रिलायंस का शेयर, 52 हफ्ते के निचले स्तर पर भाव, एक महीने में कितनी गिरावट?

Mon, 12 Oct 2026 02:56 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 12 Oct 2026 02:56 PM IST
सार

जियो प्लेटफॉर्म्स के ₹30,200 करोड़ के देश के सबसे बड़े आईपीओ से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर ₹1,155.10 के 52-हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया है। जानिए गिरावट की मुख्य वजहें और मोतीलाल ओसवाल की री-रेटिंग रिपोर्ट। पूरी खबर पढ़ें।

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Reliance Shares Hit 52-Week Low Ahead of Record ₹30,200 Crore Jio Platforms IPO
जियो - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के शेयरों में देश के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ 'जियो प्लेटफॉर्म्स' की दस्तक से ठीक पहले बड़ा दबाव देखने को मिल रहा है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन रिलायंस का शेयर बिकवाली के झटकों के बीच फिसलकर ₹1,155.10 के 52 हफ्ते के नए निचले स्तर पर आ गया। बाजार में जारी इस गिरावट ने भले ही आम निवेशकों के बीच घबराहट पैदा की हो, लेकिन दलाल स्ट्रीट के शीर्ष एनालिस्ट्स इसे 'वैल्यू अनलॉकिंग' से ठीक पहले खरीदारी का बेहतरीन मौका मान रहे हैं।

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52 हफ्ते के नए निचले स्तर पर क्यों फिसला रिलायंस का शेयर?

कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में तेज बिकवाली दर्ज की गई। 

  • हालिया प्रदर्शन का आंकड़ा: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर सोमवार को दोपहर 1:22 बजे रिलायंस का शेयर लगभग 1 फीसदी की कमजोरी के साथ ₹1,159.10 पर कारोबार कर रहा था, जबकि दिन के निचले स्तर ₹1,155.10 को छूते हुए इसने 52-सप्ताह का नया निचला स्तर बनाया।
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  • एक महीने और सालाना गिरावट: आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने के दौरान इस दिग्गज शेयर में 7.90 फीसदी (लगभग 8%) की गिरावट आ चुकी है। वहीं, साल 2026 में अब तक रिलायंस का शेयर 26 फीसदी तक टूट चुका है।
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  • दबाव की मुख्य वजह: आईपीओ से पहले होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट और व्यापक बाजार में अनिश्चितता के चलते शेयर के भावों पर अल्पकालिक दबाव बना हुआ है।

देश के सबसे बड़े जियो आईपीओ की क्या हैं मुख्य बारीकियां?

रिलायंस की टेलीकॉम और डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का आईपीओ भारतीय प्राथमिक बाजार के इतिहास को नया मोड़ देने की तैयारी में है।

संभावित प्राइस बैंड: मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी अपने शेयरों का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर के बीच तय कर सकती है।
मार्केट वैल्यूएशन और आईपीओ का आकार: ऊपरी प्राइस बैंड (₹1,119) के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स का बाजार मूल्यांकन लगभग ₹10.3 लाख करोड़ (करीब 107 अरब डॉलर) बैठता है। कंपनी इस इश्यू के जरिए करीब ₹30,200 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है, जो हासिल होने पर भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ साबित होगा।
महत्वपूर्ण तारीखें: अनुमानों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में आम निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन 21 अक्टूबर को खुलकर 23 अक्टूबर को बंद हो सकता है, जबकि शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्तूबर को संभावित है।

जियो के आईपीओ से रिलायंस इंडस्ट्रीज को कैसे मिलेगा वैल्यू अनलॉक का फायदा?

भले ही रिलायंस का शेयर अपने 1 साल के निचले स्तर पर आ गया हो, लेकिन ब्रोकरेज फर्म्स इस गिरावट को एक रणनीतिक अवसर के रूप में देख रही हैं।

  • होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट में कमी: ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषण के अनुसार, रिलायंस के मौजूदा शेयर भाव में जियो में उसकी हिस्सेदारी पर फिलहाल 18% से 36% का 'होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट' शामिल है।
  • स्वतंत्र मूल्यांकन से री-रेटिंग: बाजार में लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स का स्वतंत्र बाजार मूल्य तय होगा। मोतीलाल ओसवाल ने जियो प्लेटफॉर्म्स की कुल वैल्यू करीब ₹11.2 लाख करोड़ आंकी है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज की लगभग 66.48 फीसदी हिस्सेदारी है। अलग लिस्टिंग से यह डिस्काउंट घटेगा और रिलायंस के शेयरों की री-रेटिंग होगी।
  • बुलिश टारगेट प्राइस: मोतीलाल ओसवाल ने रिलायंस पर अपनी 'बाय' रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹1,530 का टारगेट प्राइस दिया है, जो मौजूदा स्तरों से लगभग 30 फीसदी की बढ़त की संभावना को दर्शाता है।

जियो प्लेटफॉर्म्स का ₹30,200 करोड़ का मेगा आईपीओ रिलायंस इंडस्ट्रीज के कॉरपोरेट इतिहास का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। 52-सप्ताह के निचले स्तर पर होने के बावजूद, बाजार जानकारों का मानना है कि 28 अक्तूबर को संभावित लिस्टिंग के साथ ही रिलायंस के शेयरों में छिपी वैल्यू खुलकर सामने आएगी। अल्पकालिक मंदी के बाद मध्यम से लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्थिति आकर्षक वैल्यूएशन और मजबूत री-रेटिंग का रास्ता खोल सकती है।

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