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Reliance: रिलायंस इंफ्रा बनाम अरावली पावर, 526 करोड़ का अवार्ड अनिल अंबानी की कंपनी के पक्ष में

Wed, 13 Aug 2025 06:36 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Wed, 13 Aug 2025 06:36 PM IST
सार

अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने अरावली पावर कंपनी के खिलाफ 526 करोड़ रुपये का मध्यस्थता फैसला अपने पक्ष में किया। तीन सदस्यीय मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने बहुमत से यह माना है कि अरावली पावर द्वारा किया अनुबंध समाप्त करना अवैध था।

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Reliance Infra vs Aravali Power, 526 crore award in favor of Ambani company
रिलायंस - फोटो : Adobestock

विस्तार

रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने अरावली पावर कंपनी के खिलाफ 526 करोड़ रुपये का मध्यस्थता फैसला जीता है। यह अनुकूल परिणाम मध्यस्थ न्यायाधिकरण के उस फैसले के परिणामस्वरूप आया है, जिसमें उनके अनुबंध की समाप्ति को अमान्य माना गया था। 

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अरावली पावर द्वारा किया गया अनुबंध अवैध था
कंपनी ने बुधवार को बताया कि तीन सदस्यीय मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने बहुमत से यह माना है कि अरावली पावर द्वारा किया अनुबंध समाप्त करना अवैध था। गलत तरीके से अनुबंध समाप्त करने के कारण हुए नुकसान और लागत के लिए कंपनी के दावों को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। 
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रिलायंस इंफ्रा ने 2018 में मध्यस्थता की आह्वान किया था
रिलायंस इंफ्रा ने 2018 में अरावली पावर कंपनी लिमिटेड के खिलाफ मध्यस्थता का आह्वान किया था। कंपनी ने ब्याज समेत 526.23 करोड़ रुपये जीता है। कंपनी ने कहा कि इस पुरस्कार का उपयोग रिलायंस इंफ्रा द्वारा पूंजी वृद्धि के लिए किया जाएगा।


दूसरे मामले में हुई अरावली पावर की जीत
1 जुलाई को, दिल्ली उच्च न्यायालय ने अरावली पावर कंपनी से रिलायंस इंफ्रा की याचिका पर जवाब मांगा। इसमें पिछले साल दिसंबर में अनिल अंबानी की कंपनी के खिलाफ जीते गए 600 करोड़ रुपये के मध्यस्थता फैसले को लागू करने की मांग की गई थी। 

अरावली पावर ने अनुबंध के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए 2018 में रिलायंस इंफ्रा को टर्मिनेशन नोटिस जारी किया था और आर्बिट्रेशन का सहारा लिया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने बहुमत से अपने फैसले में 419 करोड़ रुपये की मूल राशि, 5 करोड़ रुपये की लागत, 149 करोड़ रुपये का ब्याज और वास्तविक भुगतान की तारीख तक मूल राशि पर भविष्य का ब्याज देने का आदेश दिया था।
 

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